विशेष लेख

हरित क्रांति का ‘अग्रदूत’

वे खुद को “ग्रेट डिप्रेशन की देन कहा करते थे” और वे एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने दुनिया की खाद्य समस्या को हल करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्हें ‘हरित क्रांति का जनक’ भी कहा जाता है और शांति के नोबेल पुरस्कार,

Published on 9 Oct 2009 - 16:49

वैश्वीकरण को प्राय: वैश्विक पश्चिमीकरण के रूप में देखा जाता है। इस विषय पर कई समर्थको एवं विरोधियों के बीच बहुत अधिक सहमति है। वैश्वीकरण को अच्छी दृष्टि से देखने वाले इसे विश्व के लिए पश्चिमी सभ्यता का अद्भुत योगदान मानते है। यूरोप में महत्वपूर्ण विकास का एक रोचक इतिहास है: सबसे पहले यहाँ

Published on 2 Oct 2009 - 18:39

अमेरिका की सिलीकॉन वैली और भारत के बैंगलूरू ने निश्चित ही मलेशिया के मल्टीमीडिया कॉरीडोर या टोक्यो बे के अत्याधुनिक आइटी पार्क की तुलना में जबरदस्त सफलता हासिल की है. सिलीकॉन वैली के सफल उद्यमी

Published on 18 Sep 2009 - 12:20

1993 में लेखक इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति के साथ

भारत और चीनः राहें जुदा-जुदा

इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में भारत की तेज और एकाएक उन्नती ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। अधिकांश लोगों को पिछले तीन

Published on 11 Sep 2009 - 14:08

        यदि जसवंतसिंह को जिन्नावाली किताब के कारण निकाला गया है तो यह घटना भाजपा का शाश्वत कलंक कहलाएगी| किसी पार्टी का संसदीय बोर्ड इतना गैर-जिम्मेदाराना फैसला कैसे कर सकता है? संसदीय बोर्ड किसी भी पार्टी का दिलो-दिमाग होता है| लगता है, शिमला में उसे

Published on 25 Aug 2009 - 19:03

शिक्षा का अधिकार विधेयक (राइट टु एजूकेशन या आरटीई बिल) में सबसे नया और सशक्त विचार है. इसमें देशभर के निजी क्षेत्र के गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में समाज के कमजोर तबके के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटों के आरक्षण का प्रावधान है. मूल रूप से इसके अंतर्गत स्कूल वाउचरों के वितरण का विचार है. हालांकि सरकार इस शब्दावली का इस्तेमाल नहीं

Published on 13 Aug 2009 - 22:48

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