विशेष लेख

इस सवाल का जो लगभग अनबूझ जवाब मैंने दिया है उसका महत्व समझने में कुछ पल का वक्त लगेगा, मैं यह कह रहा हूं कि स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा संबंधित स्कूलों, परिवारों और कुल मिलाकर समाज के लिए या तो अच्छी हो सकती है या फिर

Published on 4 Dec 2009 - 13:11

भारत शोध और विकास के मुख्य केंद्र के रूप में उभर रहा है, लेकिन क्या यह सिलीकॉन वैली से आगे निकल पाएगा?

जब अमेरिकी भारत के टैक्नोलॉजी सेक्टर के बारे में सोचते हैं, उनके दिमाग में आज भी भारत की छवि एक

Published on 24 Nov 2009 - 19:17

हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं. यह घटना जनता की नुमाइंदगी के साम्यवादी दावे को व्यापक रूप से नकार देती है. फिर भी, ऐसे साम्यवादी दावे अब भी बरकरार हैं जो कभी-कभार युवाओं की नई पीढ़ी को चौंकाते हैं

Published on 9 Nov 2009 - 13:35

नब्बे के दशक की बात है जब मैं पूर्व भारत में काफी भ्रमण किया करता था। अपनी इन यात्राओं से मैं इस नतीजे पर पहुंच गया था कि भारत जल्द ही आर्थिक तौर पर तरक्की कर लेगा और इतिहास में पहली बार भारतीय हर बात की कमी से जूझने से उपर उठकर एक ऐसे युग में पहुंच जाएंगे जब अधिकांश की जिंदगी आराम की होगी।

Published on 28 Oct 2009 - 18:20

उन्हें अपने एक रिश्तेदार से मिलने कनॉट प्लेस से प्रीत विहार जाना था। उन्हें हेल्पलाइन से कोई जानकारी नहीं मिली। पूछने पर विघ्नेश ने बताया कि उन्हें हिन्दी नहीं आती और जानकारी देने वाले को हिन्दी के अलावा कोई और भाषा नहीं आती है।

इसी तरह रोहिणी में रहने वाली शिल्पा ने अपने बुजुर्ग दादा की कानूनी मदद के

Published on 22 Oct 2009 - 15:42

हमारी फिल्मों, नाटकों और साहित्य में इस्तेमाल परंपरागत शब्द, अलंकार और उपमाओं को लेकर विरोध की पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ सी आ गई है। विचारों की ऐसी अभिव्यक्ति सदियों से हमारी रोजमर्रा की भाषा और बोलचाल का हिस्सा रही है। एक दशक पहले तक इन बातों को कोई आपत्तिजनक नहीं मानता था।

Published on 13 Oct 2009 - 16:40

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