कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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निजी स्कूलोँ को उनके क्लासरूम के आकार के हिसाब से जज करने के बजाए उनके रिजल्ट के आधार पर क्योँ नही जज किया जा सकता है? हमारे लिए लाइब्रेरी के साइज के बारे में जानने के बजाए यह जानना जरूरी क्योँ नही हो सकता है कि बच्चोँ में पढ़ने का कौशल कितना है? हमारे लिए यह तय करना जरूरी क्योँ है कि एक गणित के अध्यापक की योग्यता क्या है, जबकि यह जानना जरूरी है कि उसके छात्र गणित में कितने कुशल हो रहे हैं? प्राइवेट स्कूलोँ को उनके यहाँ उपलब्ध संसाधनोँ और उनकी गुणवत्ता के आधार पर शुल्क लेने की अनुमति मिलनी

Published on 22 Sep 2017 - 17:20

यद्यपि सन् 1991 से भारत में आर्थिक सुधारों की शुभारंभ और मुक्त बाजार के साथ भारतीयों के प्रेम प्रसंग को शुरू हुए दो दशक बीत चुके हैं, इसके बावजूद पूंजीवाद को भारत में अपना मुकाम पाने के लिए अबतक जद्दोजहद करना पड़ रहा है। अधिकांश लोगों की भांति भारतीय भी मानते हैं कि बाजार फलदायक तो है लेकिन नैतिक नहीं है। लेकिन मेरी राय इसके बिल्कुल उलट है। मेरा मानना है कि इंसान अनैतिक होता है और लोकतंत्र के तहत या राजतंत्र के तहत, समाजवादी व्यवस्था हो अथवा पूंजीवादी समाज बुरा व्यवहार वही करता है। बाजार नामक

Published on 31 Oct 2016 - 20:46
दूसरों से मुझे बचाना तो राज्य का कर्तव्य है, लेकिन मुझे खुद से ही बचाना इसके दायरे में नहीं आता। हमारे संविधान में यही धारणा निहित है, जो जिम्मेदार नागरिक के रूप में मुझ पर भरोसा करता है और राज्य से हस्तक्षेप के बिना मुझे अपनी जिंदगी शांतिपूर्वक जीने की आजादी देता है। इसीलिए पोर्न साइट ब्लॉक करने का सरकार का आदेश गलत था। उसे श्रेय देना होगा कि उसने जल्दी ही अपनी गलती पहचान ली और रुख बदल लिया- इसने वयस्कों की साइट से प्रतिबंध हटा लिया जबकि चाइल्ड पोर्न साइट पर
Published on 16 Nov 2015 - 16:06

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