कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://gurcharandas.org

बहुत से भारतीयों की धारणा अभी भी यही है कि बाजार धनी लोगों को और अधिक धनी तथा गरीबों को और अधिक गरीब बनाता है तथा यह भ्रष्टाचार एवं क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा देता है। वास्तव में यह एक गलत धारणा है। वास्तविकता यही है कि पिछले दो दशकों में व्यापक तौर पर समृद्धि बढ़ी है और तकरीबन 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। बावजूद इसके लोग अभी भी बाजार पर अविश्वास करते हैं। आंशिक तौर पर इसके लिए आर्थिक सुधारकों को दोष दिया जा सकता है, जो प्रतिस्पर्धी बाजार की विशेषताओं अथवा धारणा को ब्रिटेन की

Published on 23 Jul 2019 - 00:02

संदर्भः मोदी से मोहभंग और राहुल गांधी पर भरोसा न होने से उनके सामने वोट देने का विकल्प नहीं

जब 2014 में मैंने मोदी को वोट दिया था तो मैंने अपने वामपंथी मित्र खो दिए थे। मैंने अपने दक्षिणपंथी मित्र तब गंवा दिए जब मैंने नोटबंदी, बहुसंख्यकों के प्रभुत्व की राजनीति करने और हमारे संस्थानों को कमजोर करने के लिए मोदी की आलोचना की। जब मेरे दोस्त ही नहीं बचे तो मैं समझ गया कि मैं सही जगह पहुंच गया हूं। आम चुनाव निकट आने

Published on 15 Apr 2019 - 19:44

जब भी चुनाव आते हैं तो मैं यह सोचकर हताश हो जाता हूं कि हम सच्चे, स्वतंत्र और सुधार चाहने वाले उदार नागरिकों की बजाय फिर अपराधियों, लुभावने नारों वाले भ्रष्टों और राजनीति क वंश के सदस्यों को चुन लेंगे। इस बार तमिलनाडु में शशिकला और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की धक्कादायक जीत साफ-सुथरे उदारवादियों की नाकामी को रेखांकित करती है।

इस समस्या के समाधान के लिए मैंने एक बार आदर्श उदारवादी राजनीतिक दल की हिमायत की थी। 21वीं सदी में युवा और

Published on 29 Mar 2019 - 17:57

Pages