कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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वित्तमंत्री ने खतरा न उठाकर संजीदगी दिखाई, संरक्षणवाद को पलटने में नाकाम रहीं

हमारी जैसी मंदी से निपटने के केवल दो ही तरीके हैं। एक उपभोग के जरिए और दूसरा निवेश के माध्यम से। इस बजट में दूसरा तरीका अपनाया गया है और मेरे विचार में यह सही रास्ता है। उपभोग के पहले तरीके में लोगों के हाथों में बैंक ट्रांसफर के माध्यम से पैसा देना पड़ता। वे पैसा खर्च करते, सामान इस्तेमाल करते और मांग को बढ़ाते, जिससे फैक्टरियां चलतीं और अधिक नौकरियां आतीं, जिससे और खर्च बढ़ता। इस चक्र के चलने से

Published on 6 Feb 2020 - 19:56

हमारा सामना इस असुविधाजनक सत्य से है कि हिंदुत्व व कश्मीरियत सहित हर राष्ट्रवाद काल्पनिक है

कश्मीर के राजनीतिक दर्जे में किए गए बदलाव से कश्मीरियों में गुस्सा, भय, अलगाव और आत्म-सम्मान खोने की भावना है। कई लोगों ने कश्मीरियत को पहुंची चोट को कानूनी और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखने की कोशिश की है। लेकिन जरूरत राष्ट्रीय पहचान की दार्शनिक समझ की है। खासतौर पर कश्मीरियों और भारतीयों को इस तथ्य को समझना होगा कि राष्ट्रीय

Published on 31 Dec 2019 - 18:03

कुछ दिनों पहले रविवार की रात एक टीवी शो में एंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 5 लाख करोड़ डॉलर के जीडीपी के लक्ष्य का तिरस्कारपूर्व बार-बार उल्लेख किया। यह शो हमारे शहरों के दयनीय पर्यावरण पर था और एंकर का आशय आर्थिक प्रगति को बुरा बताने का नहीं था, लेकिन ऐसा ही सुनाई दे रहा था। जब इस ओर एंकर का ध्यान आकर्षित किया गया तो बचाव में उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि तो होनी चाहिए पर पर्यावरण की जिम्मेदारी के साथ। इससे कोई असहमत नहीं हो सकता पर दर्शकों में आर्थिक वृद्धि के फायदों को लेकर

Published on 19 Aug 2019 - 17:30

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