अब जबकि क्लाइमेट गेट ने जलवायु परिवर्तन के मूल को लेकर चर्चा में तेजी ला दी है। यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि आखिर विज्ञान क्या है? यहां कोपेनहेगन में मौजूद नीति निर्धारकों के लिए कुछ विचार पेश हैं।

हिमालय की बर्फ का पिघलना, समुद्र के जलस्तर का बढ़ना और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग की भयावहता की ओर ही इशारा करते हैं। यही नहीं, बाढ, सूखे, बीमारी, कुपोषण और अकाल सरीखे खतरे भी हमारे सिर पर मंडरा रहे है.

इस सवाल का जो लगभग अनबूझ जवाब मैंने दिया है उसका महत्व समझने में कुछ पल का वक्त लगेगा, मैं यह कह रहा हूं कि स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा संबंधित स्कूलों, परिवारों और कुल मिलाकर समाज के लिए या तो अच्छी हो सकती है या फिर बुरी। यह सब परिस्थितियों पर निर्भर है, जिसमें कानून

भारत शोध और विकास के मुख्य केंद्र के रूप में उभर रहा है, लेकिन क्या यह सिलीकॉन वैली से आगे निकल पाएगा?

हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं. यह घटना जनता की नुमाइंदगी के साम्यवादी दावे को व्यापक रूप से नकार देती है. फिर भी, ऐसे साम्यवादी दावे अब भी बरकरार हैं जो कभी-कभार युवाओं की नई पीढ़ी को चौंकाते हैं जिन्हें यह मालूम ही नहीं है कि 9 नवंबर 1989 के दिन बर्लिन की दिवार क्यों गिरी.

कार्ल मार्क्स का कहना था, लोकतांत्रिक पूंजीवाद में अमीर अधिक अमीर हो जाते हैं और गरीब ज्यादा गरीब. मार्क्सवाद ने युवा आदर्शवादियों को करीब एक शताब्दि तक प्रेरित किया. रूस में 1918 में हुई लेनिन की क्रांति का नई सुबह के रूप में जयजयकार किया गया.

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

नब्बे के दशक की बात है जब मैं पूर्व भारत में काफी भ्रमण किया करता था। अपनी इन यात्राओं से मैं इस नतीजे पर पहुंच गया था कि भारत जल्द ही आर्थिक तौर पर तरक्की कर लेगा और इतिहास में पहली बार भारतीय हर बात की कमी से जूझने से उपर उठकर एक ऐसे युग में पहुंच जाएंगे जब अधिकांश की जिंदगी आराम की होगी।

Author: 
गुरचरण दास

उन्हें अपने एक रिश्तेदार से मिलने कनॉट प्लेस से प्रीत विहार जाना था। उन्हें हेल्पलाइन से कोई जानकारी नहीं मिली। पूछने पर विघ्नेश ने बताया कि उन्हें हिन्दी नहीं आती और जानकारी देने वाले को हिन्दी के अलावा कोई और भाषा नहीं आती है।

हमारी फिल्मों, नाटकों और साहित्य में इस्तेमाल परंपरागत शब्द, अलंकार और उपमाओं को लेकर विरोध की पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ सी आ गई है। विचारों की ऐसी अभिव्यक्ति सदियों से हमारी रोजमर्रा की भाषा और बोलचाल का हिस्सा रही है। एक दशक पहले तक इन बातों को कोई आपत्तिजनक नहीं मानता था।

वैश्वीकरण को प्राय: वैश्विक पश्चिमीकरण के रूप में देखा जाता है। इस विषय पर कई समर्थको एवं विरोधियों के बीच बहुत अधिक सहमति है। वैश्वीकरण को अच्छी दृष्टि से देखने वाले इसे विश्व के लिए पश्चिमी सभ्यता का अद्भुत योगदान मानते है। यूरोप में महत्वपूर्ण विकास का एक रोचक इतिहास है: सबसे पहले यहाँ पुनर्जागरण हुआ फिर यहाँ वह दार्शानिक लहर आई जिसमें मानव

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