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Saturday, July 22, 2017
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पुलिस दुराचरण के विरुद्ध लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। वर्ष 2007 में बनाए गए विभिन्न राज्यों के विकलांग पुलिस कानून में प्रावधान की गयी कमेटियों का आजतक गठन नहीं हुआ है व राजस्थान उनमें से एक है। यद्यपि इन कमेटियों के गठन से भी धरातल स्तर पर कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि जांच के लिए पुलिस का ही सहारा लिया जाता है। आखिर कोई भी पेड़ अपनी शाखा को किस प्रकार काट सकता  है? देश में मानवाधिकार आयोगों का भी यही हाल है क्योंकि वहां पर भी ज्यादातर शिकायतें पुलिस के विरुद्ध ही होती हैं और पुलिस ही इनकी जांच करती है और कई बार तो स्वयं आरोपित से ही जांच रिपोर्ट मांगी जाती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रेम हजारा के मामले में एक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि जब शिकायत स्वयं किसी पुलिस अधिकारी के विरूद्ध हो तो जांच पुलिस द्वारा नहीं होनी चाहिए। इस दृष्टिकोण...

Saturday, July 15, 2017

11 जुलाई, 1987 में विश्व की जनसंख्या ने 5 अरब के आंकड़े को पार किया था। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। तब से इस विशेष दिन को हर साल एक याद और परिवार नियोजन का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा। इसी क्रम में बीते 11 जुलाई को भी दुनिया भर में 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाया गया। विभिन्न मंचों पर विशेषज्ञों, चिंतकों, नीति-निर्धारकों आदि ने बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी समस्या और इसकी भयावहता से लोगों को अवगत कराते हुए अपनी चिंताएं प्रदर्शित की। विशेषज्ञों ने जनसंख्या पर रोक लगाने के तरह तरह के तरीकों पर भी विचार विमर्श किए।
लेकिन क्या बढ़ती जनसंख्या वास्तव में इतनी बड़ी समस्या है? क्या बढ़ती जनसंख्या के सिर्फ दुष्प्रभाव ही हैं? या बढ़ती जनसंख्या के फायदे भी हैं। उदारवादी चिंतक, पत्रकार व लेखक सौविक चक्रवर्ती ने अपने लेख '...

Friday, July 14, 2017

भारत में फीस लेने वाले प्राइवेट स्कूलों को स्नेह और नापसंदगी दोनों समान रूप से प्राप्त है। बच्चों की शिक्षा के लिए एक तरफ तो ये स्कूल अभिभावकों के लिए काफी मूल्यवान हैं, वहीं दूसरी तरफ इन्हें या तो 'बच्चों के जीवन के साथ खेलने वाली शिक्षा की दुकानों (टीचिंग शॉप्स)' अथवा ऊंची फीस वसूलने वाले मुनाफाखोर संस्थाओं के तौर पर नापसंद भी किया जाता है। प्राइवेट स्कूलों की नैतिकता का प्रश्नचिन्ह होने के बावजूद देश में सभी प्रकार की प्राइवेट शिक्षा जैसे कि झुग्गी झोपड़ियों में चलने वाले प्राइवेट स्कूलों से लेकर कुलीन प्राइवेट स्कूलों के विस्तार के साथ एक ख़ामोश प्राइवेट स्कूल क्रांति (साइलेंट प्राइवेट स्कूल रिवोल्यूशन) जारी है। वर्ष 2011 से 2015 के बीच सरकारी स्कूलों में जानें वाले बच्चों की संख्या में 11 मिलियन की गिरावट आयी जबकि सरकारी डीआईएसई (डिस्ट्रिक्ट इंफोर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) द्वारा इसी दरम्यान किए गए स्कूल...

Thursday, July 06, 2017

70000 वर्ष पूर्व शुरू हुई ‘संज्ञानात्मक क्रांति’ से मानव समाज की ‘ज्ञान यात्रा’ वैज्ञानिक क्रांति, औद्योगिक क्रांति, सूचना क्रांति जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरती हुई आज के दौर में पहुँची हैं और शिक्षा इस लंबे मानव जीवन की सहचारिणी रही हैं। हालाँकि प्रारम्भ से ही शिक्षा ‘स्वतंत्र समाज’ का हिस्सा रही हैं लेकिन जबसे ‘राज्य-राष्ट्र’ के सिध्दान्त का उदय हुआ हैं; सभी देशों मे यह सरकारी व्यवस्था के एकाधिकार का शिकार बनकर रह गयी हैं। चूँकि किसी भी देश में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही वहाँ के मानव संसाधन की गुणवत्ता निर्धारित करती हैं इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपस्थिति को लेकर कम प्रश्न उठे हैं लेकिन प्रमुख उदारवादी चिंतक और नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने सरकारी एकाधिकार की बजाय ‘प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था’ को ज्यादा सक्षम बताया था। मैं इसी सरकारी एकाधिकार के अधीन पब्लिक स्कूलों की शिक्षा...

Friday, June 30, 2017

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक बार फिर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। जून के अंतिम सप्ताह में इस संबंध में नौ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया। जाने माने वैज्ञानिक व 1994 से 2003 तक इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन रहे पद्मश्री व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई की पूर्व कुलपति डा. वसुधा कामत, केरल के दो जिलों को सौ फीसदी साक्षर बनाने में महती भूमिका निभाने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी के.जे. अलफोंसेए, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, अमेरिका की गणित की प्रोफेसर डा. मंजुल भार्गव, पूर्व आईएएस व बाबा साहेब अंबेडकर सोशल साइंस यूनिवर्सिटी, महू के कुलपति डा. रमाशंकर कुरील, अमरकंटक स्थित ट्राइबल यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. टी.वी. कट्टीमानी, उत्तर प्रदेश माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन कृष्णमोहन...

Thursday, June 22, 2017

शिक्षा निदेशालय ने 22 मार्च 2013 को एक परिपत्र (सर्क्युलर) जारी कर अनधिकृत कॉलोनियों में संचालित होने वाले प्राइमरी स्कूलों व मिडिल स्कूलों के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा की अनिवार्यता में ढील दी थी। वर्तमान में यह सीमा प्राइमरी स्कूलों के लिए 200 स्क्वायर यार्ड और मिडिल स्कूलों के लिए 700 स्क्वायर मीटर (857 स्क्वायर यार्ड) है।

8 कमरों वाले एक स्कूल के लिए 700 स्क्वायर मीटर जमीन की अनिवार्यता बहुत अधिक है। यदि 5 कमरों के स्कूल के लिए 200 स्क्वायर यार्ड जमीन अनिवार्य है तो इस हिसाब से 3 और कमरों के लिए 120 स्क्वायर यार्ड अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होनी चाहिए। इस प्रकार, मिडिल स्कूल चलाने के लिए प्राइमरी स्कूल के लिए आवश्यक जमीन की अनिवार्यता से चार गुना अतिरिक्त जमीन (700 स्क्वायर मीटर = 837 स्क्वायर यार्ड) की अनिवार्यता तय करना अनुचित और मनमानी पूर्ण है...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Tuesday, July 25, 2017
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। वर्ष 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ही सीबीएफसी का...

Monday, July 24, 2017
हाल ही में लोकसभा में एक एक विधेयक पारित हुआ है जिसके कानून बन जाने की सूरत में देश मे लगभग आठ लाख शिक्षकों की कमी हो जाएगी। पारित...

Tuesday, June 27, 2017
एचआरडी मिनिस्ट्री ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी बनाने के लिए कमिटी का ऐलान किया है। कमिटी का हेड अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन को बन...

Saturday, June 24, 2017
लोक कल्याण के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना उस योजना से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या की गणना के आधार पर...

Thursday, June 01, 2017
खुशखबरी!! ipolicy वर्कशॉप में आवेदन करने से चुक गए पत्रकारों के लिए सुनहरा मौका। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2017 से बढ़ाकर 5 जून 20...

Thursday, May 04, 2017
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित...

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Monday, May 01, 2017
पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में अभिभावकों की पसंद में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है और कम साधनों के बावजूद ग्रामीण एव...

Thursday, April 27, 2017
शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो, बच्चों को सिखाने बैठा हूँ.. मैं डाक बनाने बैठा हूँ , मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ। कक्षा में जाने से पह...

आपका अभिमत

जनसंख्या वृद्धि से देश में समृद्धि आती है या बदहाली?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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