ताज़ा पोस्ट

Wednesday, March 01, 2017

पिछले कुछ वर्षों के भीतर देश में छोटे छोटे पब्लिक स्कूलों की संख्या अचानक से बढ़ी हैं। ऐसे स्कूल जिनमें 20 या उससे भी कम छात्र होते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था के त्रासदीपूर्ण आंकड़ों से परेशान होना एक सामान्य-सी बात हो गई है। स्कूली छात्रों की अध्ययन की उपल्बधियां दयनीय ढंग से कम हो रही हैं और लगातार नीचे ही गिर रही हैं। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षाओं के दौरान बढ़ती सार्वजनिक रूप से होनेवाली नकल और शिक्षकों की अनुपस्थित भी इसकी एक वजह है। हालांकि, शिक्षा के लिए बनी जिला सूचना प्रणाली यानि कि डायस के आंकड़े ये जाहिर करते हैं कि इसके पीछे कि वजह अब तक अनजान है, जोकि एक त्रासद बात है। ऐसे में जल्द ही एक निर्धारित नीति प्रतिक्रिया को शुरु करना ज़रुरी हैं। डीआईएसई के 21 राज्यों से एकत्रित शुरुआती आंकड़ों पर हुए अध्ययन के मुताबिक शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लागू होने के चार साल बाद, साल 2010 से 2014 के बीच पब्लिक...

Friday, February 24, 2017

भाग 1 http://azadi.me/our-failed-education-policy से आगे..

वर्ष 2008 में ओडिसा और राजस्थान के छ: हजार अधिक विद्यार्थियों ने गणित एवम् विज्ञान के जाने-माने "ग्लोबल ट्रेण्ड इन इण्टरनेशनल मैथेम्टिक्स एण्ड साइन्स स्टडी टेस्ट' में भाग लिया। वे इसमें हिस्सा लेने वाले कुल 49 प्रतिभागियों में से क्रमश: 43वें व 47वें स्थान पर रहे थे। उनका औसत प्रदर्शन का विचलन "ऑर्गनाईजेशन फॉर इकोनॉमिक को-आपरेशन एण्ड डेवलपमेन्ट" (ओइसीडी) के मानक से तीन मानक नीचे था। वर्ष 2009 में शैक्षिक दृष्टि से भारत के श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले दो राज्यों -हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु ने ओइसीडी द्वारा संचालित "प्रोग्राम फॉर इन्टरनेशनल स्टूडेण्ट एसोशिएशन (पीआईसीए) टेस्ट में भाग लिया। दोनों राज्य इस टेस्ट में एकदम निचले क्रम...

Thursday, February 23, 2017

वर्ष 2016 के अंत के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। अतः मध्यावधि समीक्षा के लिये यह अच्छा समय है। मगर ऐसी किसी भी समीक्षा पर विमुद्रीकरण आघात से जुड़ी घटनाओं का प्रभुत्व तो रहेगा ही। इस एक अल्पावधि के घटनाचक्र को छोड़कर सरकार को अपने कार्यकाल के उत्तरार्ध में किस एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार पर जोर देना चाहिये? तो मैं यह कहूँगा कि यह हमारी विफल शिक्षा नीति है जिसमें सुधार की जरुरत है। आगे पूरा आलेख इसी बात की व्याख्या करेगा कि ऐसा क्यों जरुरी है?

भारतीय अर्थव्यवस्था लम्बे समय से दो व्यापक चुनौतियों का सामना कर रही है। एक चुनौती तो तेजी से बिगड़ते पर्यावरण की है, जिसमें स्वच्छ जल का अभाव शामिल है, जिसे मैं अभी इस आलेख से अलग रखना चाहूँगा। दूसरी चुनौती है बोरोजगारी का भूत (या भय)। सटीक शब्दावली में कहें तो "अण्डर-एम्पलायमेन्ट"...

Wednesday, February 22, 2017

सरकारी जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने के एक मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सरकार की अनुमति को आवश्यक बताया है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि स्कूली फीस एक बड़ा मुद्दा है; सामाजिक मुद्दा भी और राजनैतिक मुद्दा भी। एक तरफ स्कूल प्रबंधन अपने खर्चे का हवाला देते हुए फीस वृद्धि को न्यायसंगत साबित करने की कोशिश करता है वहीं अभिभावक और उनके साथ साथ सरकार इसे स्कूलों की मनमानी बताती है। अभिभावक चाहते हैं कि स्कूली फीस के मामले में सरकार दखल दे और स्कूलों की मनमानी से उन्हें निजात दिलाए। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत कुछ एनजीओ व स्वयंसेवी समूह भी सरकारी दखल के लिए दबाव बनाते देखे जा सकते हैं। लेकिन, निजी स्कूलों के कामकाज में सरकारी दखल की अलग समस्याएं हैं।

पाठ्यक्रम निर्धारण में यह दखल पहले से मौजूद है और सरकार...

Thursday, February 16, 2017

शिक्षा के क्षेत्र में हमें गुणवत्ता पर केन्द्रित रहना चाहिये और यह सुनिश्चित करना चाहिये कि दाखिला प्राप्त करने वाला प्रत्येक विद्यार्थी सीखने के लक्ष्य की सबसे सीधी राह को पा सकें।

शिक्षा और अध्यापन को समूचे विश्व में मानव समुदाय की जरुरतों के अनुसार विकसित किया गया है। अध्यापन का पहला अभिलेखित मॉडल भारत में गुरुकुलों का और ग्रीस में अकादमियों का था, जहाँ केवल प्रभावशाली और अत्यन्त सौभाग्यशाली परिवारों के बच्चों को ही प्रवेश मिलता था। इनमें शिक्षकों और विद्यार्थियों का अनुपात काफी ऊँचा होता था। प्रत्येक विद्यार्थी (और उनके अभिभावकों की भी) जरुरतों के मुताबिक ही पाठ्यक्रम और कक्षा का समय रखा जाता था और अध्यापन के विषयों में भी खगोल विज्ञान से प्राणीशास्त्र तक शामिल होते थे। विद्यार्थी प्राय: इस प्रकार के मॉडल में कामयाब...

Wednesday, February 15, 2017
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- तमाम व्यवहारिक दिक्कतों के बावजूद बाजार द्वारा देश में कैशलेस इकोनॉमी की ठोस नींव रखी जा चुकी है। अब आवश्यकता है कि सरकार उस नींव के सहारे अपने बहु-उद्देशीय और महत्वकांक्षी योजना वाले भवन का निर्माण करे।

8 नवंबर की देरशाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट को कानूनी लेनदेन की प्रक्रिया को (लीगल टेंडर) के लिए अयोग्य घोषित करने के बाद से विमुद्रीकरण और कैशलेस इकोनॉमी जैसे भारी भरकम माने जाने वाले विषय पर होने वाले गंभीर विमर्श का दायरा आर्थिक विशेषज्ञों और बौद्धिक समूहों के गोलमेज सम्मेलन से बाहर निकलकर हर आम-ओ-खास द्वारा नुक्कड़-चौराहों पर होने वाली चर्चा तक विस्तारित हो गया। कैशलेस इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री की दृष्टि जहां स्पष्ट है और वह इसे समानांतर चलने वाली भ्रष्टाचार आधारित अर्थव्यवस्था, आतंकवाद की फंडिंग...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Wednesday, March 01, 2017
जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2...

Thursday, February 02, 2017
चुनाव आ गए क्या..

Saturday, January 07, 2017
स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर...

Monday, December 26, 2016
- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने प्रिंसिपल की नियुक्ति में सीबीएसई के हस्तक्षेप को बताया स्वायतता से खिलवाड़ - बजट प्राइवेट स्कूलों क...

Thursday, December 22, 2016
स्कूलों के लिए जरूरी है सरकारों से आजादी हाल में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश...

Tuesday, December 06, 2016
"संविधान एक अद्भुत मंदिर था जिसका निर्माण हमने देवताओं के रहने के लिए किया था लेकिन इससे पहले कि वे वहां स्थापित होते शैतानों ने उ...

Wednesday, November 30, 2016
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लाकर बच्चों की पहुंच स्कूल तक तो हो गई लेकिन शिक्षा तक उनकी पहुंच अब भी नहीं हो पायी है। आरटीई में...

Wednesday, November 30, 2016
हमारे आस पास तमाम ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जो अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाती लेकिन अक्सर समाज में बदलाव लाने में उनकी महत्वपूर्...

आपका अभिमत

क्या आपको लगता है कि देश में सेंसर बोर्ड जैसी संस्था की प्रासंगिकता है?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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