ताज़ा पोस्ट

Thursday, July 21, 2016
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जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में बैठे लोग यदि इस दृष्टिकोण से चलें और मुख्य रूप से कानून बनाने वाले लोग यदि इसे समझें और पूरे विश्वास के साथ इसे लागू करें, तो हम अपेक्षाकृत अधिक सशक्त, मुक्त समृद्ध और पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुशासित लोग होंगे।

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Thursday, July 14, 2016

- 'एजुकेशनः फिलॉसफी, पॉलिसी एंड प्रैक्टिस' विषयक वर्कशॉप के दौरान शिक्षा के वर्तमान व भावी स्वरूप और नीतियों पर हुई गहन चर्चा
- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी और आजादी.मी ने मीडियाकर्मियों के लिए किया था दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन

नई दिल्ली। किसी देश व वहां के नागरिकों समेकित विकास के लिए शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवयव है। अतः देश, समाज और नागरिकों के विकास के लिए शिक्षा सभी सरकारों की प्राथमिकता सूची में होती है। हालांकि अन्य क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र में भी बनने वाली सरकारी नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव देखने को मिलता है। पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव के कारण नागरिकों से कर के रूप में हासिल होने वाले धन का एक बहुत बड़ा हिस्सा, जो कि सरकार के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किया जाता है, बर्बाद हो जाता है।...

Wednesday, June 15, 2016

देश के प्रत्येक बच्चे को समुचित शिक्षा मिलनी चाहिए, यह एक आदर्श वाक्य है। यह वाक्य जितना आदर्शवादी है उतना ही निर्विवाद भी है। भला कौन कहेगा कि समुचित शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए! शायद कोई नही। खैर, इस आदर्श वाक्य को मै दो शब्दों की वजह से अधूरा मानता हूँ। बेहतर होता कि हम ये कहते कि "देश के प्रत्येक बच्चे को 'मन-मुताबिक़' शिक्षा मिले" बजाय कि उपरोक्त वाक्य कहें। शाब्दिक तौर पर दोनों ही वाक्य समानार्थी प्रतीत होते हैं लेकिन व्यहारिकता के स्तर पर प्रयोग होने वाले सिद्धांतों के धरातल पर दूसरा वाक्य ज्यादा सुधारवादी एवं पारदर्शी है। चूँकि किसी बच्चे को शिक्षा मिले यह तो अच्छा है ही, लेकिन वह शिक्षा उसके एवं उसके अभिभावकों की सहूलियत, उनकी इच्छा के अनुरूप मिले, इसका भी ख्याल रखा जाना बेहद जरुरी है। आज से पांच साल पहले ही भारत शिक्षा का अधिकार दे चुका है लेकिन बावजूद इसके हम बच्चों को उनके मन-मुताबिक़ शिक्षा प्राप्त करने...

Wednesday, June 08, 2016

जोनाथन ने खास फायदे के मेले वाली उस औरत का सपना देखा। वह बार बार उसे पैसे दे रही थी और फिर से वापस छीनती जा रही थी। उसने उसे एक बार फिर पैसे दिए और उसे वापस लेने के लिए आगे बढ़ी। अचानक जोनाथन एक झटके से नींद से जागा। उसे याद आया कि उसे अपनी आमदनी की रिपोर्ट कर अधिकारियों को देनी है, वर्ना उसे भी इंसानों वाले चिड़ियाघर के बाड़े में बंद होना पड़ेगा।

ताजा सिंकी रोटी की स्वादिष्ट खुशबू उसकी नाक में भी गई। बूढ़ा आदमी मेज के पास खड़ा होकर नाश्ते के लिए जैम लगे टोस्ट तैयार कर रहा था। जोनाथन ने ध्यान दिया कि नाश्ते की मेज पर उनके साथ उदास चेहरे वाला एक छोटा बच्चा भी बैठा हुआ है। उस बूढ़े दंपत्ति ने बताया कि वह उनका पोता डेवी था जो कुछ दिन उनके साथ रहने वाला था।
'मुझे तुम्हारी याद है,' जोनाथन को देखते ही वह बच्चा चहका। 'दादाजी, जब हमें अपना खेत छोड़ना...

Thursday, June 02, 2016

एक प्रावधान को लेकर 'शिक्षा का अधिकार' कानून एक बार पुन: चर्चा में है। इसबार बहस इसबात पर हो रही है कि आरटीई के आर्टिकल 30(1) में दिए गये 'नो डिटेंशन' नीति में बदलाव किया जाय अथवा नहीं! सबसे पहले तो यह समझते हैं कि आरटीई का आर्टिकल 30(1) क्या कहता है ? इस अनुच्छेद के अनुसार  शिक्षा के अधिकार क़ानून में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि प्राथमिक स्तर पर किसी भी छात्र को कक्षा की परीक्षा में उत्तीर्ण-अनुतीर्ण करने की बाध्यता अथवा अनिवार्यता नहीं होगी। दूसरे शब्दों में कहें तो कानून में एक 'सेट ऑफ़ क्वेश्चंस' वाली परीक्षा प्रणाली के आधार पर छात्रों को कक्षा में अनुत्तीर्ण कर उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश से अवरुद्ध करने की प्रणाली को ही खारिज किया गया है।

हालांकि इसी क़ानून के आर्टिकल 29(2)(H) के तहत इस बात की स्पष्ट व्याख्या की गयी है कि प्रत्येक स्कूल...

Wednesday, May 25, 2016

अगर सवाल उठाया जाय कि 'स्कूल' क्यों ? तो सीधा जवाब मिलेगा, शिक्षा प्रदान करने के लिए। लेकिन वर्तमान स्थिति इस सीधे जवाब से उलट है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा देने की बजाय सरकारी कानूनों का पालन करने अथवा न पालन कर पाने की स्थिति से निपटने में अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। १ अप्रैल २०१० को 'शिक्षा का अधिकार क़ानून' चौदह साल तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था। लेकिन आज इस क़ानून के कई प्रावधान ही बच्चों की शिक्षा में आड़े आ रहे हैं। मसलन, आरटीई का बिल्डिंग कोड अथवा लैंड नार्म्स।

दरअसल शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत यह प्रावधान रखा गया है कि कक्षा नर्सरी से लेकर ५वीं  तक के स्कूलों के पास ८०० स्कावयर मीटर की जमीन होनी अनिवार्य है जबकि नर्सरी ८वीं तक के स्कूल १००० स्क्वायर मीटर तक की अहर्ता पूरी करें। पहली बात तो यह...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Tuesday, May 17, 2016
समाजवाद के 6 चमत्कार 1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं 3- पैसे...

Monday, May 09, 2016
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक...

Monday, May 02, 2016
- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा - आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर...

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Thursday, April 21, 2016
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरका...

Tuesday, March 08, 2016
रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर क...

Thursday, February 18, 2016
निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) ही विद्यार्थियों की शिक्षा के...

Tuesday, February 16, 2016
रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्ष...

Monday, February 15, 2016
- देशभर के निजी स्कूल संगठन 24 फरवरी को जंतर मंतर पर देंगे धरनाः कुलभूषण शर्मा - मोदी के गुजरात मॉडल को ही नहीं अपना रहे मोदी के...

आपका अभिमत

दस साल से पुराने डीजल वाहनों के डी-रजिस्ट्रेशन के एनजीटी के फैसले से क्या आप सहमत हैं?

आज़ादी वी‌डियो

  जनवरी 1, 2009 को एटलस वैश्विक पहल की घोषणा करी गयी. टॉम पामर के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल क...

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