ताज़ा पोस्ट

Monday, April 24, 2017

कुछ कारण से आधिकारिक रूप से ऐसा माना जाता है कि भारतीयों को आमोद-प्रमोद से नफरत है। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे नेता अथवा अदालतें ऐसे आमोद-प्रमोद को खत्म करने संबंधी किसी फैसले पर एक पल भी नहीं सोचतीं। जब तक इरादा अच्छा हो तो हमें किसी भी मौज-मजे की चीज को कुचलने पर कोई आपत्ति नहीं होती। फिर चाहे उस फैसले से कुछ मूल्यवान हासिल न भी हो।

इस प्रवृत्ति का सबसे बड़ा शिकार शराब रही है। हम इसे मौज-मजे का पापपूर्ण रूप मानते हैं। हमें न जाने क्यों लगता है कि सरकार को इस पर यथासंभव लगाम लगानी चाहिए। फिर चाहे पूरी तरह पाबंदी ही क्यों न लगानी पड़े अथवा ऐसेे अजीब से नियम बना दे कि जिसके कारण पांच सितारा होटलों को अपने मिनी बार रातोंरात खाली करने पड़े। सुप्रीम कोर्ट का हाल का वह आदेश ऐसी ही विचित्रता की कगार पर है, जिसमें राजमार्गों से 500 मीटर के दायरे में शराब-...

Friday, April 21, 2017

प्राइवेट स्कूल प्रत्येक वर्ष फीस में कुछ न कुछ बढ़ोतरी अवश्य करते हैं। बच्चों को मिलने वाली गुणवत्ता युक्त शिक्षा के ऐवज में आमतौर पर अभिभावकों यह स्वीकार्य भी होता है। हालांकि, हाल फिलहाल में अलग अलग मदों में होने वाली फीस वृद्धि को अनापेक्षित व अनावश्यक बताते हुए अभिभावकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। वे अब सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे हैं।

सत्ता एवं विपक्ष सहित समस्त राजनैतिक दलों ने इस मौके को भुनाते हुए फीस नियमन व स्कूल प्रबंधन को नियंत्रित करने की तरफ कदम बढ़ा दिए। दो सप्ताह पूर्व गुजरात में, जहां इस वर्ष विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं; स्कूली फीस को नियंत्रित करने के लिए एक कानून पारित कर दिया गया। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब किसी राज्य ने ऐसा कदम उठाया हो।
फीस नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने की शुरूआत वर्ष 2009...

Saturday, April 15, 2017
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राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे दोनों तरफ पांच सौ मीटर की दूरी पर से शराब की दुकानें हटाने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश क्या दिया, राज्य सरकारों ने शराब की दुकानें आबादी में लगाने की तैयारियां शुरू कर दीं। इसकी वजह से महिलाएं गुस्से में हैं। लेकिन इस फैसले ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। मसलन यह कि क्या गारंटी है कि पांच सौ मीटर दूर होने के बावजूद शराब पीकर लोग गाड़ियां नहीं चलाएंगे। सवाल यह भी है कि क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले लोग हाईवे से पांच सौ मीटर दूर स्थित दुकानों पर नहीं जाएंगे। इस फैसले की काट ढूंढ़ी जाने लगी है। कुछ राज्यों में तो सरकारों ने शराब की दुकानें बने रहने देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग की सूची से कई सड़कों को हटा दिया है। ताकि वहां शराब की पहले से स्थित दुकानें बनी रह सकें।

इसमें दो राय नहीं कि पिछले कुछ सालों में शराब पीकर गाड़ी...

Monday, April 03, 2017

कुछ दिनों पहले खबर थी कि केंद्र सरकार ने बजट में 2.80 लाख कर्मचारियों की भर्ती का प्रावधान किया है। यह प्रधानमंत्री के इस वादे के खिलाफ है कि उनके नेतृत्व में कम सरकार, अधिक शासन मूल मंत्र रहेगा। मैंने भोलेपन में इसका यह अर्थ लगाया कि यह मेरी, आपकी और आम नागरिकों की जिंदगी को अधिक आसान बना देगा, जो नियमों की भूल-भुलैया में से राह निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले दशकों में अधिकांश भारत को चलाने वाली सुस्त और विशाल नौकरशाही में पर्किंसन्स लॉ (नौकरशाही की अनियंत्रित वृद्धि) के साथ नियम-कानून भी खरगोशों की तरह तेजी से बढ़ते चले गए।

मुझे तो वाकई उम्मीद थी कि नरेंद्र मोदी उलटा ही करेंगे। अपने चुनाव अभियानों में उन्होंने साबित कर दिया है कि किसी भी हालत में जीतने के लिए प्रतिबद्ध पेशेवरों की छोटी-सी टीम से बढ़कर कोई इतना अच्छा काम नहीं कर सकता। भारत...

Friday, March 31, 2017

शिक्षा के क्षेत्र में हमें गुणवत्ता पर केन्द्रित रहना चाहिये और यह सुनिश्चित करना चाहिये कि दाखिला प्राप्त करने वाला प्रत्येक विद्यार्थी सीखने के लक्ष्य की सबसे सीधी राह को पा सकें।

शिक्षा और अध्यापन को समूचे विश्व में मानव समुदाय की जरुरतों के अनुसार विकसित किया गया है। अध्यापन का पहला अभिलेखित मॉडल भारत में गुरुकुलों का और ग्रीस में अकादमियों का था, जहाँ केवल प्रभावशाली और अत्यन्त सौभाग्यशाली परिवारों के बच्चों को ही प्रवेश मिलता था। इनमें शिक्षकों और विद्यार्थियों का अनुपात काफी ऊँचा होता था। प्रत्येक विद्यार्थी (और उनके अभिभावकों की भी) जरुरतों के मुताबिक ही पाठ्यक्रम और कक्षा का समय रखा जाता था और अध्यापन के विषयों में भी खगोल विज्ञान से प्राणीशास्त्र तक शामिल होते थे। विद्यार्थी प्राय: इस प्रकार के मॉडल में कामयाब भी होते हैं...

Thursday, March 30, 2017

राजधानी दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के हवाले से मीडिया में प्रकाशित खबरों के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2017-18 में ईडब्लूएस कैटेगरी के तहत नर्सरी कक्षाओं दाखिलों के लिए कुल 1,13,991 आवेदन प्राप्त हुए। बीते दिनों निदेशालय द्वारा लॉटरी/ ड्रॉ प्रक्रिया के बाद कुल उपलब्ध 31,653 सीटों के लिए पहली सूची जारी की गयी। निजी स्कूलों में दाखिले की इच्छा रखने वाले 82,338 छात्रों के अभिभावकों के लिए उहापोह की स्थिति बनी हुई है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि उनके बच्चों को दाखिला कैसे मिलेगा।

कुछ आशावादी अभिभावकों को अब भी उम्मीद है कि पहली सूची में नाम निकलने वाले कुछ छात्रों के दाखिला न लेने अथवा आवश्यक कागजातों के न होने की दशा में निकलने वाली दूसरी सूची में शायद उनके बच्चों का नाम आ जाए। हालांकि यह स्थिति बिल्ली के भाग्य से छीका फूटने के जैसी ही है और इससे अधिकतम...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Thursday, April 06, 2017
कानून बनाने का उद्देश्य क्या होता है और वास्तव में कानून क्या करता है, इस विषय को बेहद हल्के फुल्के किंतु सटीक ढंग से चित्रित किया...

Thursday, March 02, 2017
  सुनो सुनो... विधायक जी कह रहे हैं कि ये ही मिल कर मुख्यमंत्री चुनते हैं   साभारः काजल कुमार  

Wednesday, March 01, 2017
जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2...

Thursday, February 02, 2017
चुनाव आ गए क्या..

Saturday, January 07, 2017
स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर...

Monday, December 26, 2016
- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने प्रिंसिपल की नियुक्ति में सीबीएसई के हस्तक्षेप को बताया स्वायतता से खिलवाड़ - बजट प्राइवेट स्कूलों क...

Thursday, December 22, 2016
स्कूलों के लिए जरूरी है सरकारों से आजादी हाल में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश...

Tuesday, December 06, 2016
"संविधान एक अद्भुत मंदिर था जिसका निर्माण हमने देवताओं के रहने के लिए किया था लेकिन इससे पहले कि वे वहां स्थापित होते शैतानों ने उ...

आपका अभिमत

क्या सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की बजाए गैरसहायता प्राप्त निजी स्कूलों पर तमाम प्रतिबंध लगाना उचित है?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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