ताज़ा पोस्ट

Saturday, January 21, 2017
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विकास की मंजिल पाने की मुख्य राह शिक्षा दिखाएगी। तरक्की में शिक्षा अहम है। यह जुमला विद्वानों की सभा से लेकर, गोष्ठिïयों, संगोष्ठियों में खूब सुनाई देगा। मगर उज्जवल भविष्य की नींव कहलाने वाली शिक्षा, आम जन की पहुंच से उतनी दूर और मुश्किल हो रही है, जैसे मंगल पर पानी की खोज। चुनावी बिसात पर बैठे नेताओं ने अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा को आरटीई के सांचें में ढाला। मगर यहां भी बढ़ती मुनाफाखोरी ने अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को कुचलता हुआ आगे निकल गया। स्कूलों के गेट पर सुबह ६ बजे से बच्चों के एडमिशन के लिए लगी अभिभावकों की लंबी कतारों से जाहिर होता है, कि अधिकतम कमाने की भूख ने विकास के उस मॉडल को मसल दिया है जिसे सर्वपल्ली राधाकृष्णन, सावित्री बाई फुले और पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. एपीजे कलाम ने शिक्षा की नींव पर खड़ा किया था।

शहरों में निजी स्कूल...

Wednesday, January 18, 2017

आठवीं कक्षा तक छात्रों को फेल न करने की नीति को सैद्धांतिक मंजूरी पर विवाद शुरू हो गए हैं। जिन कारणों के चलते आठवीं तक छात्रों को फेल ना करने की नीति 1986 की नई शिक्षा नीति में स्वीकार की गई थी, उसमें सबसे प्रमुख कारण था स्कूलों से असमय ही बच्चों का पढ़ाई छोड़ देना। निश्चित तौर पर आठवीं तक छात्रों को फेल न करने की नीति से स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ देने की प्रवृत्ति पर रोक लगी। लेकिन अब इस नीति को सिर्फ पांचवीं कक्षा तक ही सीमित करने के प्रावधान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भारत जैसे देश में, जहां शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल किया जा चुका है, वहां यह नीति एक बार फिर स्कूली पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देगी।

आठवीं तक फेल न करने की नीति पर पहली बार जोरदार सवाल 2012 में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार समिति की बैठक...

Monday, January 09, 2017
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संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों में शिक्षा के अधिकार को शामिल किए जाने के बाद एक बार वह पुराना सवाल फिर उठने लगा है। सवाल यह कि देश के सभी बच्चों को एक समान शिक्षा का अधिकार मिलना ही चाहिए। 1935 में जब भारत सरकार अधिनियम के तहत गठित राज्यों की सरकारों को जिन आठ विषयों पर शासन करने का अधिकार तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने दिया था, उनमें से एक अधिकार शिक्षा व्यवस्था का भी संचालन था। गांधीजी को तब आने वाली चुनौतियों का पता था, इसीलिए उन्होंने डॉक्टर जाकिर हुसैन की अध्यक्षता में राज्यों की शिक्षा व्यवस्था कैसी हो, इस पर विचार करने की जिम्मेदारी दी थी। गांधी जी ने खुद भी इस पर आधार पत्र लिखा था, जिसके आधार पर 1937 में वर्धा में आयोजित बैठक में जिस बुनियादी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना की, उसमें भी सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा एक समान देने पर जोर था। उस व्यवस्था का मकसद देश के सभी बच्चों को एक समान बेहतर शिक्षा व्यवस्था देना...

Friday, January 06, 2017

प्राचीन काल से ही भारत व्यापार एवं व्यवसाय को प्राथमिक स्तर की वरीयता देने वाला देश रहा है। चाणक्य की अर्थनीति में भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की अवधारणा में भी अर्थ को प्रथम वरीयता पर रखा गया है। ऋग्वेद में भारत को कृषि एवं पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मध्य-युगीन भारतीय इतिहास को देखें तो वहां भी भारत की स्थिति व्यापार एवं व्यवसाय के अनुकूल नजर आती है। चूँकि इस दौरान अरब व्यापारियों का भारत में व्यापार के लिए आगमन हो चुका था और यूरोप के लोग भी समुद्री मार्ग से भारत आने का रास्ता खोजने लगे थे। ईस्ट इंडिया कंपनी भी भारत में व्यापार के लिहाज से ही आई थी। ऐसे अनेक प्रमाण हैं जो भारत में व्यापार की अनुकूलता को प्रदर्शित करते हैं। अंग्रेजों की हुकुमत के बाद भारत में व्यापार को लेकर स्थितियां क्रमश: मुश्किल होती गयीं जो स्वतंत्रता के बाद और बदतर होती गईं ।

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Wednesday, January 04, 2017

प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस में की जा रही मनमानी वृद्धि को लेकर पैरंट्स मे खासा आक्रोश है। हर नए साल में 30-40 प्रतिशत फीस बढ़ाना सामान्य बात हो गई है। पैरंट्स की मांग है कि सरकार स्कूल मालिकों की इस मनमानी पर अंकुश लगाए। उनकी मांग सही है। शिक्षा को पूरी तरह बाजार पर नहीं छोड़ा जा सकता। लेकिन, सरकारी दखल की अलग समस्याएं है। पूरे देश में सरकारी स्कूलों की बदहाली बताती है कि सरकारी दखल से प्राइवेट स्कूलों का भी यही हाल हो जाएगा।

पाठ्यक्रम में यह दखल पहले से मौजूद है। फीस में दखल देकर सरकारी महकमा टीचरों के वेतन और सेवा शर्तों आदि पर भी हावी हो जाएगा। तब स्कूल मैनेजमेंट का लापरवाह टीचरों के विरुद्ध कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। शिक्षा के अधिकार का कानून पहले ही प्राइवेट स्कूलों की स्वायत्तता को संकट में डाले हुए है। 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को आयु के...

Tuesday, January 03, 2017
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निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से निर्मित शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई एक्ट 2009) आने और वर्ष 2010 से लागू होने के 7 वर्ष पूरे हो चुके हैं। लेकिन इतनी बड़ी समयावधि बीत जाने के बाद भी तमाम समस्याएं अब भी बरकरार हैं। एक तरफ स्कूल आरटीई के प्रावधानों को अव्यवहारिक बताकर इसकी मुखालफत कर रहे हैं वहीं सरकार हर हाल में उन प्रावधानों को लागू कराना चाहती है। तय समय सीमा के भीतर प्रावधानों के लागू न किए जाने की दशा में स्कूलों पर तगड़े जुर्माने और उन्हें बंद करने का नियम है। गैर आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक आरटीई कानून आने के बाद से अबतक देशभर में तालाबंदी की मार झेल रहे अथवा बंद हो चुके छोटे छोटे स्कूलों की संख्या 2 लाख से ज्यादा है। इतनी भारी तादात में स्कूलों के बंद होने से करीब ढाई करोड़ बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है। इन्हीं सारे मुद्दों पर आजादी.मी ने बजट...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Saturday, January 07, 2017
स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर...

Monday, December 26, 2016
- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने प्रिंसिपल की नियुक्ति में सीबीएसई के हस्तक्षेप को बताया स्वायतता से खिलवाड़ - बजट प्राइवेट स्कूलों क...

Thursday, December 22, 2016
स्कूलों के लिए जरूरी है सरकारों से आजादी हाल में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश...

Tuesday, December 06, 2016
"संविधान एक अद्भुत मंदिर था जिसका निर्माण हमने देवताओं के रहने के लिए किया था लेकिन इससे पहले कि वे वहां स्थापित होते शैतानों ने उ...

Wednesday, November 30, 2016
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लाकर बच्चों की पहुंच स्कूल तक तो हो गई लेकिन शिक्षा तक उनकी पहुंच अब भी नहीं हो पायी है। आरटीई में...

Wednesday, November 30, 2016
हमारे आस पास तमाम ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जो अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाती लेकिन अक्सर समाज में बदलाव लाने में उनकी महत्वपूर्...

Tuesday, November 29, 2016
बीते दिनों केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 10वीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा को पुनः अनिवार्य बनाने पर अपनी सह...

Tuesday, November 29, 2016
क्या आप जानते हैं? भीषण प्रदूषण से प्रभावित एक देश ने लोगों को प्रदूषण फैलाने से रोकने की बजाए उन्हें पर्यावरण प्रदूषित करने का अ...

आपका अभिमत

तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद क्या आपको लगता है कि नर्सरी दाखिले के दौरान निजी स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी समाप्त हो जाएंगी?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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