ताज़ा पोस्ट

Wednesday, November 01, 2017

निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोत्तरी और उस पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से की जा रही कार्रवाई इन दिनों चर्चा में है। बेशक निजी स्कूलों को मनमाने ढंग से फीस में बढ़ोत्तरी को अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन फीस बढ़ोतरी नियंत्रित कैसे हो इसके तरीके अलग अलग हो सकते  हैं। निजी स्कूलों के फीस नियंत्रण पर चर्चा करने से पहले एक अहम सवाल यह है कि छठवें और सातवें वेतन आयोग के बाद अध्यापकों के वेतन में जो बढ़ोत्तरी हुई है, क्या उसी अनुपात में सरकारी स्कूलों की शिक्षा का स्तर भी बढ़ा है? जब तक इन सवालों पर विचार नहीं किया जाएगा, सरकारी स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था को सुधारा नहीं जाएगा, निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी को सवालों के कठघरे में खड़ा करना भी अनुचित ही माना जाना चाहिए। लेकिन निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी पर हो रहे बवाल के बीच खासकर सरकारी शिक्षा से जुड़े बुनियादी सवालों को लगातार नजरंदाज किया जा रहा है।

...

Tuesday, October 31, 2017

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी यूरोप में आर्थिक विचारों के दो विरोधी संप्रदायों- जर्मन ऐतिहासिक संप्रदाय और ऑस्ट्रियन संप्रदाय का जन्म हुआ। जर्मन ऐतिहासिक संप्रदाय ने आर्थिक इतिहास की सहायता से आर्थिक सच्चाई को जानने का प्रयास किया। प्रारंभिक ऑस्ट्रियन विचारकों ने 1883 में जर्मन संप्रदाय द्वारा विकसित अनुभवाश्रित पद्धति को अपनी आलोचना का केंद्र बनाया। इनका मत था कि आर्थिक ज्ञान इतिहास के अध्ययन से नहीं बल्कि सैद्धांतिक विश्लेषण से उत्पन्न होता है। पद्धति को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद दो दशकों से अधिक समय तक बना रहा। ऑस्ट्रियन संप्रदाय के विचारों का उल्लेख करने वाले थॉमस सी. टेलर के मोनोग्राफ "एन इंट्रोडक्शन टू ऑस्ट्रियन इकोनॉमिक्स" के कुछ अध्याय...

Wednesday, October 11, 2017

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार को लेकर इस बार भारतीयों की उत्सुकता कुछ ज्यादा थी। संभावित विजेता के रूप में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का नाम चर्चा में आ जाने की वजह से इस पर बहुत से लोगों का ध्यान अटका था कि देखें, उन्हें यह पुरस्कार मिलता है या नहीं। दिलचस्प बात यह रही कि जब अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर का नाम घोषित हो गया और यह स्पष्ट हो गया कि रघुराम राजन को यह पुरस्कार नहीं मिला है, तब फिर बिल्कुल अलग रूप में लेकिन ठेठ भारतीय संदर्भ में यह फैसला चर्चा में आ गया। कुछ लोगों ने इस तथ्य को प्रचारित करना शुरू किया कि नोबेल पुरस्कार उस अर्थशास्त्री को मिला है जिसने मोदी सरकार के नोटबंदी वाले फैसले का समर्थन किया था। कुछ अन्य लोग यह बताने में लग गए कि उक्त प्रचार कितना झूठा है, और यह कि दो हजार का नोट छापे जाने की सूचना मिलते ही इस अर्थशास्त्री ने उस फैसले की भर्त्सना की थी।

...
Sunday, September 24, 2017

पहली बार कर्नाटक सरकार ने एक प्रस्ताव दिया जिसका उद्देश्य था लोगोँ के लिए व्यक्तिगत स्तर पर स्कूल की शुरुआत करना और उसे चलाना आसान बनाना। प्रस्ताव के अनुसार, एक शैक्षिक संस्थान खोलने के लिए कोई भी प्राइवेट बॉडी लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) रजिस्टर  कराकर काम कर सकती है, उसके लिए एक सोसायटी अथवा चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर कार्य करने की बाध्यता नहीं होगी। लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि इनका प्राथमिक उद्देश्य शिक्षा ही होगा और संस्थान नॉन-प्रॉफिट शेयरिंग आधार पर ही चलेगा।

पहल से कम हुई शुरुआत की बाध्यता
यह एक ऐसी पहल है जो स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की ओर एक कदम है, क्योंकि इसके जरिए कानूनी बाध्यताएँ कम हो गई। सामान्य स्थिति में, नियम बेहद जटिल हैं, आवेदन के प्रक्रिया से लेकर जमीन...

Friday, September 22, 2017

निजी स्कूलोँ को उनके क्लासरूम के आकार के हिसाब से जज करने के बजाए उनके रिजल्ट के आधार पर क्योँ नही जज किया जा सकता है? हमारे लिए लाइब्रेरी के साइज के बारे में जानने के बजाए यह जानना जरूरी क्योँ नही हो सकता है कि बच्चोँ में पढ़ने का कौशल कितना है? हमारे लिए यह तय करना जरूरी क्योँ है कि एक गणित के अध्यापक की योग्यता क्या है, जबकि यह जानना जरूरी है कि उसके छात्र गणित में कितने कुशल हो रहे हैं? प्राइवेट स्कूलोँ को उनके यहाँ उपलब्ध संसाधनोँ और उनकी गुणवत्ता के आधार पर शुल्क लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। और सरकार को फीस रीएम्बर्समेंट के पैसे सीधे गरीब बच्चोँ के अभिभावकोँ को कैश में भुगतान करना चाहिए।

“ नियमत: स्कूल की लाइब्रेरी का आकार 14मी गुणा 8मी होना चाहिए और यहाँ कम से कम 1,500 किताबोँ का...

Friday, September 15, 2017

निजी स्कूलोँ को उनके क्लासरूम के आकार के हिसाब से जज करने के बजाए उनके रिजल्ट के आधार पर क्योँ नही जज किया जा सकता है? हमारे लिए लाइब्रेरी के साइज के बारे में जानने के बजाए यह जानना जरूरी क्योँ नही हो सकता है कि बच्चोँ में पढ़ने का कौशल कितना है? हमारे लिए यह तय करना जरूरी क्योँ है कि एक गणित के अध्यापक की योग्यता क्या है, जबकि यह जानना जरूरी है कि उसके छात्र गणित में कितने कुशल हो रहे हैं?

प्राइवेट स्कूलोँ को उनके यहाँ उपलब्ध संसाधनोँ और उनकी गुणवत्ता के आधार पर शुल्क लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। और सरकार को फीस रीएम्बर्समेंट के पैसे सीधे गरीब बच्चोँ के अभिभावकोँ को कैश में भुगतान करना चाहिए।

“नियमत: स्कूल की लाइब्रेरी का आकार 14 मीटर गुणा 8 मीटर होना चाहिए और यहाँ कम से कम 1,500...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Friday, November 17, 2017
अमेरिकी अर्थशास्त्री थॉमस सॉवेल के अनुसार, देश में आम चुनावों के लिए मतदान इनकम टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि (अमेरिका के संदर्भ मे...

Wednesday, November 01, 2017
एक खबरः भारत में व्यापार करना हुआ आसान बीबीसी हिंदी द्वारा इस मुद्दे पर प्रकाशित कार्टून असंगठित क्षेत्र के व्यवसायियों के साथ जा...

Tuesday, October 31, 2017
"यह भारत के नागरिकों के प्रति प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है कि इस आजाद देश में उनकी आजादी की रक्षा करें!" - सरदार वल्लभ भाई पटेल (...

Thursday, October 12, 2017
- सरकार व शिक्षा विभाग पर स्कूलों के साथ भेदभाव का आरोप, प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख मामले से कराया अवगत -...

Tuesday, October 10, 2017
"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए...

Thursday, October 05, 2017
सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। य...

Tuesday, September 26, 2017
[जन्म 26 सितंबर 1820 – निधन 29 जुलाई 1891] नैतिक मूल्यों के संरक्षक शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर का मानना था कि अंग्रेजी और स...

Thursday, September 07, 2017
 शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लाकर बच्चों की पहुंच स्कूल तक तो हो गई लेकिन शिक्षा तक उनकी पहुंच अब भी नहीं हो पायी है। आरटी...

आपका अभिमत

नोटबंदी लागू होने के एक वर्ष बाद क्या आपको लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कालेधन पर अंकुश लगाने में सफलता मिली है?

आज़ादी वी‌डियो

इस वीडियो के माध्यम से डा. टॉम जी.

सबस्क्राइब करें

अपना ई-मेल पता भरें:

फीडबर्नर द्वारा वितरित

आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक