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बुधवार, जुलाई 01, 2015
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वह एक जाने माने अर्थशास्त्री हैं, लेकिन अमेरिका के सांटा क्लारा यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर लॉ पढ़ाते हैं। उन्होंने स्वयं किसी विश्वविद्यालय से लॉ और इकोनॉमिक्स की डिग्री हासिल नहीं की है बल्कि हावर्ड से फिजिक्स और केमेस्ट्री की पढ़ाई की है। हालांकि इकोनॉमिक्स और लॉ पर उन्होनें कई किताबें लिखी हैं जो कि दुनियाभर के इकोनॉमिस्ट्स और लॉ एक्सपर्ट्स के बीच काफी लोकप्रिय है। हम बात कर रहे हैं स्वयं को अनार्किस्ट-अनाक्रोनिस्ट इकोनॉमिस्ट कहलाना पसंद करने वाले प्रो. डेविड फ्रीडमैन की। प्रो. फ्रीडमैन नोबेल पुरस्कार विजेता मशहूर अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन व रोज फ्रीडमैन के बेटे भी है। हाल ही में उन्होंने भारत का दौरा किया और दिल्ली, मुंबई और बैंग्लोर में छात्रों के साथ कुछ समय बिताया। प्रस्तुत है आजादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र की उनसे हुई...

बुधवार, जून 24, 2015
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक स्कूल ने लड़कियों को पढ़ाई छोड़ने से रोकने के लिए एक अनोखी तरक़ीब अपनाई है.
ये स्कूल दिल्ली से क़रीब 125 किलोमीटर दूर बुलंदशहर ज़िले के उप प्रखंड अनूपशहर में स्थित है.
इस स्कूल में छठी कक्षा से ऊपर की हर छात्रा को कक्षा में आने के लिए प्रतिदिन 10 रुपए दिए जाते हैं.
यह पैसा छात्राओं के बैंक खातों में जमा कर दिया जाता है.
इसके अलावा स्कूल की ओर से हर छात्रा को दो जोड़ी ड्रेस, एक स्वेटर और एक जोड़ी जूते, किताबें और दवाएं भी ख़रीदकर दी जाती हैं.
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बुधवार, जून 17, 2015
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रेलवे में सुधारों के लिए अर्थशास्त्री डा. बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता में गठित 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने 12 जून 2015 को अपनी रिपोर्ट रेलवे मंत्रालय को सौंप दी। पेश रिपोर्ट में रेलवे की हालत सुधारने के लिए निजी क्षेत्र के योगदान की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में प्राइवेट सेक्टर को यात्री ट्रेन और मालगाड़ी चलाने की अनुमति देने की सलाह दी गई है और कहा गया है कि रेलवे को अपना काम नीतियां बनाने तक सीमित रखना चाहिए। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे बोर्ड की भूमिका सीमित करने, मानव संसाधन के कार्य को अच्छा करने तथा रेलवे के कामकाज के लिए व्यावसायिक लेखा प्रणाली शामिल करने संबंधी कुछ सिफारिशें की हैं।
 
कमेटी की सिफारिशें मान ली जाती हैं तो गाड़ी के डब्बे और इंजन आदि बनाने का काम भी प्राइवेट कंपनियों...
मंगलवार, जून 16, 2015
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बांग्लादेश के साथ हुआ समझौता ऐतिहासिक है। इससे कश्मीर जितना ही पुराना विवाद तो हल हुआ ही, उपमहाद्वीप को साझा बाजार की ओर बढ़ने में भी मदद मिली है। व्यापार और निवेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अथक कूटनीति का ताजगीदायक फोकस है। सत्ता में आने के बाद से ही हमारे पड़ोसियों की जरूरतों पर उन्होंने बहुत निकटता से गौर किया है, जिसका फल अब सामने आ रहा है। हालांकि, समझौते पर बरसों से काम हो रहा था, लेकिन इतिहास इसका श्रेय मोदी को देगा। अन्य किसी भारतीय नेता की तुलना में उनमें यह सहज समझ है कि सत्ता धान के कटोरे से आती है न कि बंदूक की नली से, जैसा कि माओ का विश्वास था। इस संदर्भ में वे प्राचीन परंपरा का ही अनुसरण कर रहे हैं, जिसने भारत को एक महान व्यापारिक राष्ट्र बना दिया था, जो अपने व्यापारिक जहाजों पर अपनी अद्‌भुत सॉफ्ट पावर विदेश ले जाता था।
 
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गुरूवार, जून 11, 2015
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उदारवाद शब्द का मूल आज़ादी या स्वतंत्रता है। दूसरे शब्दों में यहां केंद्र बिंदू व्यक्ति है। समाज व्यक्ति की मदद के लिए है और न कि व्यक्ति समाज के लिए जैसा कि साम्यवाद या समाजवाद जैसी व्यवस्थाएं परिभाषित करने की कोशिश करती हैं। उदारवाद के मूल तत्व व्यापक हैं और जीवन के हर पहलू को छूते हैं। जहां तक मनोभाव की बात है तो सहनशीलता, खासतौर पर असहमति को लेकर, ही इसका आधार है। मामला चाहे धार्मिक हो, सांप्रदायिक, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या फिर जाति या भाषाई समूह से ताल्लुक रखता हो, दूसरे के विचारों को लेकर सहनशीलता और इसे लेकर तर्क करने की तैयारी, उदारवाद का सार हैं।
 
जहां तक धर्म की बात है तो उदारवाद धर्मविरोधी नहीं है, लेकिन गैर-सांप्रदायिक और शायद नास्तिक भी है। एक अच्छा उदारवादी...
मंगलवार, जून 09, 2015
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मैं अपने निजी अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि आज के जमाने में अगर आप किसी यूनिवर्सिटी कैंपस में खुली बाजार व्यवस्था की बात करेंगे तो आप वैश्वीकरण की आलोचनाओं के तले दब जाएंगे। छात्रों और फैकल्टी के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार की मुखालफत की मुख्य वजह दूसरों के हितों की चिंता है। इसके पीछे सामाजिक और नैतिक कारण है। अगर इसे सरल शब्दों में कहें तो वे मानते हैं कि वैश्वीकरण का कोई मानवीय चेहरा नहीं होता, लेकिन मैं इसके उलट सोचता हूं। मेरा मानना है कि वैश्वीकरण के चलते न केवल धन संपदा का निर्माण और विस्तार हो रहा है, बल्कि इसमें शामिल पक्षों में बेहतर नैतिक मूल्यों का विकास भी हो रहा है।
 
कई आलोचकों का मानना है कि वैश्वीकरण बाल मजदूरी, पिछडे देशों में गरीबी, महिला पुरुष के बीच सम...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

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गुरूवार, जुलाई 02, 2015
निजी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया से लेकर वहां ली जाने वाली फीस पर सूबे का सियासी पारा चढ़ सकता है। दिल्ली सरकार ने जहां इन दोनों...

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मंगलवार, जून 23, 2015
भूटान की राजधानी थिंपू में अपने तीन पड़ोसी देशों- बांग्लादेश, भूटान व नेपाल से भारत का मोटर वाहन सड़क-पारगमन समझौता एक नए दौर का आ...

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गुरूवार, फरवरी 26, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा कर रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्र...

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मंगलवार, फरवरी 17, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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गुरूवार, फरवरी 12, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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सोमवार, फरवरी 02, 2015
गरीबी उन्मूलन का मुद्दा दुनियाभर की सभी साम्यवादी व समाजवादी सरकारों की प्राथमिकता में होती है। दूरदर्शिता व अच्छी नीति अपनाने क...

आपका अभिमत

क्या अमेरिका की तर्ज पर भारत में भी समलैंगिक विवाह को मंजूरी मिलनी चाहिए?:

आज़ादी वी‌डियो

See video पांच साल तक अपने चुनावी क्षेत्र से गायब रहने वाले राजनेता चुनाव आते ही किस प्रकार अपनी लच्छेदार बातो...

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