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Thursday, May 19, 2016
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उस दौरान बड़ी गहमागहमी थी। देश में युद्ध छिड़ा हुआ था, सभी ने हथियार उठा लिये थे, हर किसी के सीने में देशप्रेम की ज्वाला धधक रही थी; नगाड़े बज रहे थे, बैंड बज रहे थे, खिलौना पिस्तौलें ठांय-ठांय कर रही थीं, पटाखे़ फुसफुसा रहे थे; हर एक हाथ में और छतों और बालकनियों की कतार में कई तरह के झंडे धूप में फड़फड़ा रहे थे; रोज़ाना उस चौड़ी सड़क पर नौजवान स्वयंसेवक अपने नए यूनिफॉर्म पहन कर इतराते हुए परेड करते थे, उनके मां-बाप, बहनें, प्रेमिकाएं गर्व के साथ भावनाओं से तर आवाज़ में उनका हौसला बढ़ाते थे; हर रात भीड़ भरी सभाएं होती थीं, जिनमें देशप्रेम से भरी बातें सुन कर भीड़ के दिल गहराई तक हिल जाते थे, और जिन्हें सुनते हुए भीड़ की ओर से आंसुओं के बहाव के साथ ही तालियों की गड़गड़ाहट अक्सर हो जाया करती थी; चर्च में पादरी अपने झंडे और अपने देश के प्रति श्रद्धा रखने की बातें किया करते थे, और युद्ध के देवता की प्रार्थना हमारा...

Thursday, May 12, 2016
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न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ और लम्बित मामलों की तुलना में जजों की संख्या में भारी कमी का हवाला देते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर पिछले दिनों एक कार्यक्रम में भावुक हो गये। उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे। एक खबर के मुताबिक़ भावुक होते हुए न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि निचली अदालतों में 3 करोड मामले लंबित हैं। मात्र बीस हजार जजों के कंधों पर दो करोंड़ मामलों की सुनवाई का दबाव है। लाखों लोग इसलिए जेलों में हैं क्योंकि जज उनके मामले ही नहीं सुन पा रहे हैं, लेकिन इसके लिए जजों को दोष न दीजिये।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने अपने भाषण के क्रम में कहा कि देश के हाईकोर्ट में 38 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इन मामलों को निपटाने के लिए जजों की संख्या कम पड़ रही है। हाईकोर्ट में कुल 434 जजों की वेकेंसी है...

Thursday, April 28, 2016
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गत दिनों दिल्ली सरकार के नीतिगत फैसलों में परस्पर विरोधाभाष पैदा करतीं दो ख़बरें मीडिया में आईं। बीस अप्रैल को मीडिया में एक खबर आई कि ऑड-इवन के दौरान निजी टैक्सी कम्पनियों द्वारा सर्ज-प्राइसिंग अर्थात मांग और आपूर्ति के आधार पर कैब कम्पनियों द्वारा किराया तय किये जाने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बहुत नाराज हैं। मुख्यमंत्री द्वारा इसे खुली लूट बताते हुए इसपर हमेशा के लिए प्रतिबन्ध लगाने की भी बात ख़बरों के माध्यम से सामने आई। इस खबर के ठीक दो दिन बाद एक दूसरी खबर यह आई कि दिल्ली सरकार ऐप आधारित प्रीमियम बस सेवा शुरू करने वाली है। दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री द्वारा २२ अप्रैल को ऐप आधारित बस सेवा शुरू करने की घोषणा की गयी।

राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित इस खबर के मुताबिक़ दिल्ली के परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बताया कि जिन बस मालिकों की बसें इसके तहत...

Thursday, April 21, 2016
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लातूर मे आज पानी की स्थिति इतनी भयानक है कि ट्रेन मे पानी भरकर उनकी प्यास बुझाई जा रही है। देश के कम से कम 9-10 राज्य अभूतपूर्व जल संकट से झूझ रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट पहले ही आईपीएल मैच जल संकट के कारण कहीं ओर कराने का आदेश दे चुका है। सूप्रीम कोर्ट भी इससे पहले केंद्र को पानी के मामले मे फटकार लगा चुका है। बुंदेलखंड और उसके आसपास के इलाकों से लोगो का पलायन जारी है। भारत की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले ही जाट आरक्षण के मुद्दे पर गरमाई राजनीति में जब दिल्ली का पानी बंद कर दिया गया तब सारी दिल्ली त्राहिमाम कर उठी। पंजाब-हरियाणा जल बंटवारा विवाद के बीच हरियाणा दिल्ली का पानी बंद करने की धमकी दे चुका है। इस सब के बीच लोगो के मन में ये सवाल उठना लाज़मी है कि भारत सरकार का जल मंत्रालय इन सबके बीच क्या योजना बना रही है? हलांकि आम आदमी जानता है कि नतीजा कुछ नही होगा इसलिए आश्वस्त भी है और...

Wednesday, April 13, 2016

स्किल डेवलपमेंट अर्थात् कौशल विकास वर्तमान दौर में एक वैश्विक मुद्दा बन चुका है। इसमें कोई शक नही कि तकनीक के इस दौर में दुनिया को स्किल्ड लोगों की जबरदस्त मांग है। दुनिया उन देशों की तरफ देख रही है जहाँ युवाओं की संख्या ज्यादा है और वे युवा वर्तमान दौर के हिसाब से कौशलयुक्त हैं। इस लिहाज से सोचा जाय तो भारत एक संभावनाओं का देश है क्योंकि यहाँ की पैसठ फीसद आबादी पैंतीस साल से कम आयु की है। लिहाजा युवाओं को स्किल्ड बनाने की चुनौती और दुनिया की अपेक्षाओं के अनुरूप युवाशक्ति तैयार करने का दबाव भी भारत पर है। अब सवाल है कि क्या हम अपने प्रयासों से अबतक दुनिया अथवा अपनी जरूरतों के अनुरूप स्किल्ड लोग तैयार कर पाने में सफल हो रहे हैं? भारत के लिहाज से देखें तो स्किल डेवेलपमेंट अर्थात् कौशल विकास शब्द पिछले कुछ वर्षों से चर्चा में है।

गत संप्रग सरकार...

Thursday, April 07, 2016

मुक्त व्यापार ने अपना प्रभाव ब्रिटिश कालीन भारत में भी छोड़ा। अंग्रेजों ने प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने से पूर्व तक, सन 1914 तक, मुक्त बाजार-अर्थव्यवस्था को संचालित किया। सन 1914 में भारत, ब्रिटिश कपड़े की अपेक्षा, ब्रिटिश कपड़ा बनाने वाली मशीनों का सबसे बड़ा आयातक देश था। इस प्रकार भारत इंग्लैंड से आयातित मशीनों से उत्पादन कर कपड़े का बड़ा निर्माता बन रहा था।

सन 1919 की ब्रिटिश व्यापार आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार बहुत सी ऐसी बड़ी व्यापारिक संस्थाओं ने, जो ब्रिटेन में बनी अभियांत्रिक वस्तुओं का लेन-देन करती थी, ने भारत में स्वयं का उत्पादन प्रारंभ कर दिया और ब्रिटेन में बनी वस्तुओं की भारत में बिक्री करने के लिए आपत्ति दर्ज की।
उन्होंने ब्रिटेन में बनी वस्तुओं का लेन-देन बंद कर दिया लेकिन अब उन्होंने स्थानीय बाजार स्थापित कर लिए, स्थानीय...

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मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Tuesday, May 17, 2016
समाजवाद के 6 चमत्कार 1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं 3- पैसे...

Monday, May 09, 2016
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक...

Monday, May 02, 2016
- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा - आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर...

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Thursday, April 21, 2016
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरका...

Tuesday, March 08, 2016
रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर क...

Thursday, February 18, 2016
निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) ही विद्यार्थियों की शिक्षा के...

Tuesday, February 16, 2016
रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्ष...

Monday, February 15, 2016
- देशभर के निजी स्कूल संगठन 24 फरवरी को जंतर मंतर पर देंगे धरनाः कुलभूषण शर्मा - मोदी के गुजरात मॉडल को ही नहीं अपना रहे मोदी के...

आपका अभिमत

क्या देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक प्रवेश परीक्षा एनईईटी (नीट) होनी चाहिए?

आज़ादी वी‌डियो

  जनवरी 1, 2009 को एटलस वैश्विक पहल की घोषणा करी गयी. टॉम पामर के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल क...

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