ताज़ा पोस्ट

Wednesday, October 11, 2017

अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार को लेकर इस बार भारतीयों की उत्सुकता कुछ ज्यादा थी। संभावित विजेता के रूप में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का नाम चर्चा में आ जाने की वजह से इस पर बहुत से लोगों का ध्यान अटका था कि देखें, उन्हें यह पुरस्कार मिलता है या नहीं। दिलचस्प बात यह रही कि जब अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर का नाम घोषित हो गया और यह स्पष्ट हो गया कि रघुराम राजन को यह पुरस्कार नहीं मिला है, तब फिर बिल्कुल अलग रूप में लेकिन ठेठ भारतीय संदर्भ में यह फैसला चर्चा में आ गया। कुछ लोगों ने इस तथ्य को प्रचारित करना शुरू किया कि नोबेल पुरस्कार उस अर्थशास्त्री को मिला है जिसने मोदी सरकार के नोटबंदी वाले फैसले का समर्थन किया था। कुछ अन्य लोग यह बताने में लग गए कि उक्त प्रचार कितना झूठा है, और यह कि दो हजार का नोट छापे जाने की सूचना मिलते ही इस अर्थशास्त्री ने उस फैसले की भर्त्सना की थी।

...
Sunday, September 24, 2017

पहली बार कर्नाटक सरकार ने एक प्रस्ताव दिया जिसका उद्देश्य था लोगोँ के लिए व्यक्तिगत स्तर पर स्कूल की शुरुआत करना और उसे चलाना आसान बनाना। प्रस्ताव के अनुसार, एक शैक्षिक संस्थान खोलने के लिए कोई भी प्राइवेट बॉडी लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) रजिस्टर  कराकर काम कर सकती है, उसके लिए एक सोसायटी अथवा चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर कार्य करने की बाध्यता नहीं होगी। लेकिन इसकी शर्त यह होगी कि इनका प्राथमिक उद्देश्य शिक्षा ही होगा और संस्थान नॉन-प्रॉफिट शेयरिंग आधार पर ही चलेगा।

पहल से कम हुई शुरुआत की बाध्यता
यह एक ऐसी पहल है जो स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की ओर एक कदम है, क्योंकि इसके जरिए कानूनी बाध्यताएँ कम हो गई। सामान्य स्थिति में, नियम बेहद जटिल हैं, आवेदन के प्रक्रिया से लेकर जमीन...

Friday, September 22, 2017

निजी स्कूलोँ को उनके क्लासरूम के आकार के हिसाब से जज करने के बजाए उनके रिजल्ट के आधार पर क्योँ नही जज किया जा सकता है? हमारे लिए लाइब्रेरी के साइज के बारे में जानने के बजाए यह जानना जरूरी क्योँ नही हो सकता है कि बच्चोँ में पढ़ने का कौशल कितना है? हमारे लिए यह तय करना जरूरी क्योँ है कि एक गणित के अध्यापक की योग्यता क्या है, जबकि यह जानना जरूरी है कि उसके छात्र गणित में कितने कुशल हो रहे हैं? प्राइवेट स्कूलोँ को उनके यहाँ उपलब्ध संसाधनोँ और उनकी गुणवत्ता के आधार पर शुल्क लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। और सरकार को फीस रीएम्बर्समेंट के पैसे सीधे गरीब बच्चोँ के अभिभावकोँ को कैश में भुगतान करना चाहिए।

“ नियमत: स्कूल की लाइब्रेरी का आकार 14मी गुणा 8मी होना चाहिए और यहाँ कम से कम 1,500 किताबोँ का...

Friday, September 15, 2017

निजी स्कूलोँ को उनके क्लासरूम के आकार के हिसाब से जज करने के बजाए उनके रिजल्ट के आधार पर क्योँ नही जज किया जा सकता है? हमारे लिए लाइब्रेरी के साइज के बारे में जानने के बजाए यह जानना जरूरी क्योँ नही हो सकता है कि बच्चोँ में पढ़ने का कौशल कितना है? हमारे लिए यह तय करना जरूरी क्योँ है कि एक गणित के अध्यापक की योग्यता क्या है, जबकि यह जानना जरूरी है कि उसके छात्र गणित में कितने कुशल हो रहे हैं?

प्राइवेट स्कूलोँ को उनके यहाँ उपलब्ध संसाधनोँ और उनकी गुणवत्ता के आधार पर शुल्क लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। और सरकार को फीस रीएम्बर्समेंट के पैसे सीधे गरीब बच्चोँ के अभिभावकोँ को कैश में भुगतान करना चाहिए।

“नियमत: स्कूल की लाइब्रेरी का आकार 14 मीटर गुणा 8 मीटर होना चाहिए और यहाँ कम से कम 1,500...

Friday, September 08, 2017

कल्पना कीजिए कि आप ऐसे आदर्शवादी युवा हैं, जिसमें भावी पीढ़ी के बच्चों को प्रेरित करने की महत्वाकांक्षा है। इसलिए आप स्कूल खोलते हैं। आप अपने जैसे ही प्रेरक शिक्षक जुटाते हैं। स्कूल तत्काल सफल हो जाता है और उसे छात्रों, पालकों और समाज का सम्मान प्राप्त होता है। फिर 2010 में एक नया कानून (राइट टू एजुकेशन एक्ट) आता है। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों में वेतन की समानता की बात है। आप अपने शिक्षकों का वेतन दोगुना कर 25 हजार प्रतिमाह करने पर मजबूर होते हैं। यहां तक कि श्रेष्ठतम निजी स्कूल जैसे दून स्कूल और मेयो को भी वेतन बढ़ाने पड़ते हैं। कानून के मुताबिक 25 फीसदी छात्र गरीब परिवारों के होने चाहिए। अपेक्षा थी कि सरकार गरीब छात्रों की फीस देगी पर यह सिर्फ आंशिक भुगतान करती है या कुछ भी नहीं देती। इन दोनों बातों के कारण बढ़ी लागत के कारण सारे 75 फीसदी छात्रों की फीस अत्यधिक बढ़ाई जाती है। जल्दी ही वेतन आयोग फिर...

Sunday, September 03, 2017

शिक्षा के लिए एक नई राष्ट्रीय नीति (नेशनल पॉलिसी) तैयार करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में एक कमिटी का गठन किया है। इस कमिटी को पहले दो वर्षोँ तक देश भर में इस विषय पर हुई मंत्रणा का लाभ मिलेगा। चूंकि वर्तमान दौर में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता एक गम्भीर मुद्दा बन गया है, ऐसे में कमिटी से काफी उम्मीदेँ भी लगाई जा रही हैं।

शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए प्रत्येक चरण आवश्यक है लेकिन स्कूली शिक्षा की क्वालिटी में सुधार की प्रक्रिया सबसे अहम है। मगर यह कार्य इतना आसान नही होगा क्योंकि देश भर में 1.5 मिलियन से भी अधिक स्कूल हैं और 253 मिलियन छात्र उनमें नामांकित है। हालांकि निजी क्षेत्र के सिर्फ 25 फीसदी स्कूलोँ, जिन्हेँ आमतौर पर पब्लिक स्कूल कहा जाता है, में 40 फीसदी छात्रोँ का नामांकन होता है। यह संख्या लगातार बढ़ भी रही...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Thursday, October 12, 2017
- सरकार व शिक्षा विभाग पर स्कूलों के साथ भेदभाव का आरोप, प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख मामले से कराया अवगत -...

Tuesday, October 10, 2017
"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए...

Thursday, October 05, 2017
सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। य...

Tuesday, September 26, 2017
[जन्म 26 सितंबर 1820 – निधन 29 जुलाई 1891] नैतिक मूल्यों के संरक्षक शिक्षाविद् ईश्वर चंद्र विद्यासागर का मानना था कि अंग्रेजी और स...

Thursday, September 07, 2017
 शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लाकर बच्चों की पहुंच स्कूल तक तो हो गई लेकिन शिक्षा तक उनकी पहुंच अब भी नहीं हो पायी है। आरटी...

Tuesday, August 01, 2017
"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए...

Tuesday, July 25, 2017
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। वर्ष 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ही सीबीएफसी का...

Monday, July 24, 2017
हाल ही में लोकसभा में एक एक विधेयक पारित हुआ है जिसके कानून बन जाने की सूरत में देश मे लगभग आठ लाख शिक्षकों की कमी हो जाएगी। पारित...

आपका अभिमत

पटाखों पर बैन से दिल्ली में वायू प्रदूषण के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है!

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

सबस्क्राइब करें

अपना ई-मेल पता भरें:

फीडबर्नर द्वारा वितरित

आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक