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बुधवार, मई 20, 2015
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भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री प्रो. दीपक लाल अपनी पुस्तक ‘पोवर्टी एंड प्रोग्रेसः रियालिटीज एंड माइथ्स अबाउट ग्लोबल पोवर्टी’ के विमोचन के सिलसिले में भारत में हैं। नई दिल्ली स्थित फिक्की ऑडिटोरियम पुस्तक के विमोचन के दौरान उन्होंने गरीबी और विकास से जुड़ी भ्रांतियों और वास्तविकताओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने तीसरी दुनियां के देशों में व्याप्त गरीबी, व इसके निवारण में सरकारी व बाजार आधारित प्रयासों की भी विवेचना की। प्रस्तुत है प्रो. दीपक लाल से आजादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र की अनौपचारिक बातचीत के कुछ प्रमुख अंशः
 
प्रश्नः अपनी पुस्तक ‘पोवर्टी एंड प्रो...
मंगलवार, मई 19, 2015
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सारी कथित क्षमताओं के बाद भी देश आर्थिक वृद्धि दर बढ़ाने के लिए संघर्ष ही कर रहा है। हम हमारे जीडीपी को 10 से 12 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा सकते थे। फिलहाल तो हम 5 से 6 फीसदी निकाल पाने में ही खुद को खुशकिस्मत मान रहे हैं। हमने एक नई सरकार चुनी, जिसने तीव्र आर्थिक वृद्धि का वादा किया था, हमने उसे जबर्दस्त बहुमत दिया और अब वही सरकार अपना पहला वर्ष पूरा करने वाली है। सत्ता में इसकी पहली वर्षगांठ पर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से भाग रहे हैं, विश्व मीडिया की भी हमसे उम्मीद कम होती जा रही है और हमारे युवाओं को नौकरियां नज़र नहीं आ रही हैं। न तो कॉर्पोरेट सेक्टर खुश है और न किसान।
 
विभिन्न विधानसभा चुनावों के...
सोमवार, मई 18, 2015
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कैबिनेट द्वारा अनुमोदित बाल मजदूरी पर प्रस्तावित अधिनियम को मीडिया बाल मजदूरी को बदावा देने वाला एक पिछडा कदम बता रही है। वास्तव में, यह अधिनियम बाल मजदूरी को लगभग पूरी तरह से प्रतिबंधित  करता है। 
 
वर्तमान कानून सीमित तौर पर ही बाल मजदूरी को निषेध करता है – अनुसूची में वर्णित 16 निर्दिष्ट व्यवसायों और 65 निर्दिष्ट प्रक्रमों जिसमे फैक्ट्री अधिनियम में निर्दिष्ट प्रक्रमों के अलावा और भी खतरनाक प्रक्रम शामिल है। सामान्य या गैर-जोखिम रोज़गार क्षेत्रों में बाल मजदूरी पर रोक नहीं है। प्रस्तावित बिल बाल-श्रम पर रोक का दायरा ना केवल सार्वत्रिक बनाने को है, बल्कि किशोरों (14-18 वर्ष) के जोखिम-भरे-क्षेत्रों में रोज़गार पर भी पाबंदियां लगाने को हैं। दो अपवाद छोड़े गए है –...
गुरूवार, मई 14, 2015
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विकास और गरीबी से संबंधित वास्तविकताओं और भ्रांतियों पर आधारित है अर्थशास्त्री दीपक लाल की यह पुस्तक

जाने माने अर्थशास्त्री दीपक लाल की गरीबी और विकास से संबंधित वास्तविकताओं और भ्रांतियों पर आधारित पुस्तक ‘पावर्टी एंड प्रोग्रेसः रियालिटीज एंड माइथ्स अबाउट ग्लोबल पावर्टी’ का बुधवार को भारत में विमोचन किया गया। पुस्तक का प्रकाशन ऑक्सफोर्ड यूनिविर्सिटी द्वारा किया गया है।पुस्तक विमोचन का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स (फिक्की), सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) व फ्रेडरिक न्यूमन फाउंडेशन (एफएनएफ) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स (फिक्की) स...

सोमवार, मई 11, 2015
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सरकार ने हाल ही में गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बनाने का प्रयास किया है और वहां चोट की है जहां नुकसान सर्वाधिक होता है। 'ग्रीनपीस' के साथ फोर्ड तथा हजारों गैर-सरकारी संगठनों पर कार्रवाई के मामलों से यह स्पष्ट है। सरकार की इस कार्रवाई पर जितना संभव हो, उतनी कड़े शब्दों में आलोचना जरूरी है। गैर-सरकारी संगठनों पर अविश्वास और नजर रखने के सरकारी तर्क कमजोर बहानों के अतिरिक्त और कुछ नहीं हैं। 
 
एकजुट होने की स्वतंत्रता
हमारा संविधान हर नागरिक को यह स्वतंत्रता देता है कि वह किसी व्यक्ति/ समूह/ संगठन के साथ जुड़े या नहीं। वास्तव में इस स्वतंत्रता को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विस्तार कर वै...
शनिवार, मई 09, 2015
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यदि किसी असाधारण उत्प्रेरक की संभावना को छोड़ दें तो मई महीने में शेयर बाजार में अक्सर सुस्ती देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए पिछले साल बड़े बड़े रिफार्म का वादा कर सत्ता के करीब पहुंच रही मोदी सरकार से बाजार ने बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। परिणाम स्वरुप शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। किंतु सरकार के कार्यकाल के एक साल पूरा होने को है लेकिन अबतक कोई बड़ा रिफार्म धरातल पर उतरता दिखाई नहीं दे रहा है। इसके अलावा घरेलू स्तर पर मानसून ही एक ट्रिगर होता है जो बाजार को सांत्वना देता है। लेकिन अल नीनो इफेक्ट के कारण इस वर्ष मानसून के औसत से कम रहने की भविष्यवाणी भी बाजार की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रही है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के चीन और वियतनाम का रुख करने से भी बाजार पर विपरीत असर पड़ा है।

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मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

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गुरूवार, फरवरी 26, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा कर रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्र...

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मंगलवार, फरवरी 17, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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गुरूवार, फरवरी 12, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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सोमवार, फरवरी 02, 2015
गरीबी उन्मूलन का मुद्दा दुनियाभर की सभी साम्यवादी व समाजवादी सरकारों की प्राथमिकता में होती है। दूरदर्शिता व अच्छी नीति अपनाने क...

Mahatma Gandhi quote
शुक्रवार, जनवरी 30, 2015
सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। य...

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बुधवार, जनवरी 28, 2015
- पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप ग्लोबल थिंकटैंक सेंटर्स की सूची जारी, टॉप 50 में अकेला भारतीय   -  चीन, भार...

आपका अभिमत

14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सशर्त मजदूरी करने की इजाजत देने के फैसले से क्या आप सहमत हैं?:

आज़ादी वी‌डियो

See video पांच साल तक अपने चुनावी क्षेत्र से गायब रहने वाले राजनेता चुनाव आते ही किस प्रकार अपनी लच्छेदार बातो...

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