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गुरूवार, मार्च 26, 2015
pic credit: live mint
सेक्शन 66ए को रद्द करने के बाबत सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा श्रेया सिंघल काफी चर्चा में हैं। यूथ और नेटीजन्स के बीच श्रेया इतनी पॉपुलर हो गई हैं कि दो दिनों से ट्वीटर पर लगातार ट्रेंड कर रही हैं। हालांकि श्रेया खुद ट्वीटर पर नहीं हैं। फेसबुक पर भी श्रेया के कई फैंस क्लब और ग्रूप बन गए हैं। आजादी.मी ने श्रेया सिंघल की इस कामयाबी पर मुबारकबाद दिए और औपचारिक बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश 
 
 
प्रश्नः श्रेया, सबसे पहले हमारे पाठकों को आप अपने बारे में बताएं
 
श्रेयाः मेरा...
बुधवार, मार्च 25, 2015
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मानविधकारों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट ने यह बहुत ही लैंडमार्क निर्णय दिया है। 107 पेजों में दिए गए इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) असंवैधानिक है। न्यायालय ने कहा कि इस धारा में ऎसे संदेशों या अभिव्यक्ति को आपराधिक बताया गया है जिनका कोई दायरा ही निश्चित नहीं किया जा सकता है।
 
जिनकी कोई सीमा ही नहीं है। किसी को नाराज करने वाले संदेश भेजना, चिढ़ाना, अपमान करना या असुविधा पैदा करना आदि ऎसे संदेशों को इस धारा में आपराधिक और दंडनीय बताया गया है। यह पाबंदियां तो भारत के संविधान द्वारा अनुच्छेद 19 में दिए गए अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हैं।
 
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मंगलवार, मार्च 24, 2015
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सरकार में आरक्षण और शिक्षण संस्थाओं, नौकरी में आरक्षण दो अलग अलग मुद्दे हैं। पंचायत में अथवा संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए जो आरक्षण दिया गया है तथा इस दिशा में जो प्रयास किए जा रहे हैं वो उचित हैं। वह इसलिए कि सरकार का तो काम ही होता है कि वह लोगों का प्रतिनिधित्व करे। इसलिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अगर लिंग, समुदाय या क्षेत्र आधारित आरक्षण दिया जाता है तो उसे गलत नहीं कहा जा सकता। पर यही बात नौकरी या शिक्षण संस्थाओं में दिए जाने वाले आरक्षण के बारे में नहीं कही जा सकती।
 
इंजीनियरिंग या मेडिकल आदि उच्च शिक्षण संस्थाओं तथा नौकरी में चयन का आधार खुली प्रतिस्पर्धा में समान मानकों पर प्रदर्शन होता है। इसके अलावा और किसी भी आधार पर अगर वहां चयन किया जाएगा तो उसका प्रदर्शन और कार्य...
गुरूवार, मार्च 19, 2015
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- जिस विषय पर संसद में बहस होनी चाहिए उस विषय पर सड़क पर हो रहा संघर्षः गुरचरन दास
 
- सरकार ऐसी व्यवस्था सुनिश्चत करे जहां भू स्वामी और खरीददार आपस में सौदा कर सकें: पार्थ जे शाह
 
 
नई दिल्ली स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब में गुरूवार को 'लैंड एक्वीजिशन बिल एंड कांस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया' विषयक परिचर्चा ओयोजित की गई। वर्तमान भूमि अधिग्रहण बिल मुद्दे के परिपेक्ष्य में की गई इस परिचर्चा का आयोजन थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) व गुड गवर्नेंस इंडिया फाऊंडेशन द्वारा किया गया था। इस मौके पर गुड गवर्नेंस इंडिया फाऊंडेशन के संजीव अग्र...
मंगलवार, मार्च 17, 2015
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क्या आप रेलवे स्टेशनों पर सामान ढोने के ऐवज में कूलियों द्वारा अनाप शनाप पैसे मांगने का कारण जानते हैं? क्या आपको पता है कि एक गरीब इंसान को रेलवे स्टेशनों पर कूली का काम करने के लिए कितनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है? क्या आपको पता है कि सभी प्रक्रियाओं से सफलता पूर्वक गुजरने के बाद भी बांह पर बिल्ला बांधने के लिए हजारों रूपए की जरूरत होती है, और वर्षों का इंतजार करना पड़ता है? क्या आपको पता है कि तत्काल कूली बनने के लिए आपके पास 3 से 4 लाख रुपयों की जरूरत पड़ती है? अधिकांश लोगों का जवाब होगा नहीं। लेकिन आज हम बताते हैं कूलीगिरी से जुड़ी ये आश्चर्यजनक बातें: 
 
यात्री सेवा व उनके सामानों की सुरक्षा को ध्यान में रख कर कुलीगिरी के पेशे का सृजन किया गया था। यह एक ऐसा पेशा है, जिसके लिए ऊंची शिक्षा व...
सोमवार, मार्च 16, 2015
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विपक्ष के विरोध के बावजूद नया भूमि अधिग्रहण बिल कुछ संशोधनों के बाद लोकसभा में पास करा लिया गया। अब बिल उच्च सदन अर्थात राज्यसभा के पाले मे हैं। केंद्र सरकार के लोकसभा में बहुमत और राज्यसभा में अल्पमत में होने के कारण असल चुनौती बिल को इस उच्च सदन से पारित कराना है। हालांकि सीबीआई द्वारा अप्रत्याशित तरीके से पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को बतौर आरोपी समन जारी करने से विपक्षी दलों को ये आरोप लगाने का मौका मिल गया है कि सरकार उसपर दबाव बनाने का काम कर रही है।
 
हालांकि ऐसे ही आरोप पिछली सरकारों पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव व मायावती सहित अन्य राजनेता भी लगा चुके हैं। समय समय पर सरकार द्वारा सीबीआई के गलत इस्तेमाल के आरोप लगते रहते हैं। हालांकि आज हम जिस मुद्दे पर चर्चा कर रहे...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

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गुरूवार, फरवरी 26, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा कर रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्र...

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मंगलवार, फरवरी 17, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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गुरूवार, फरवरी 12, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें स...

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सोमवार, फरवरी 02, 2015
गरीबी उन्मूलन का मुद्दा दुनियाभर की सभी साम्यवादी व समाजवादी सरकारों की प्राथमिकता में होती है। दूरदर्शिता व अच्छी नीति अपनाने क...

Mahatma Gandhi quote
शुक्रवार, जनवरी 30, 2015
सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। य...

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बुधवार, जनवरी 28, 2015
- पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप ग्लोबल थिंकटैंक सेंटर्स की सूची जारी, टॉप 50 में अकेला भारतीय   -  चीन, भार...

आपका अभिमत

क्या समलैंगिकता के मुद्दे पर यूएन में भारत के विरोध से आप सहमत हैं?:

आज़ादी वी‌डियो

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