ताज़ा पोस्ट

Thursday, June 22, 2017

शिक्षा निदेशालय ने 22 मार्च 2013 को एक परिपत्र (सर्क्युलर) जारी कर अनधिकृत कॉलोनियों में संचालित होने वाले प्राइमरी स्कूलों व मिडिल स्कूलों के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा की अनिवार्यता में ढील दी थी। वर्तमान में यह सीमा प्राइमरी स्कूलों के लिए 200 स्क्वायर यार्ड और मिडिल स्कूलों के लिए 700 स्क्वायर मीटर (857 स्क्वायर यार्ड) है।

8 कमरों वाले एक स्कूल के लिए 700 स्क्वायर मीटर जमीन की अनिवार्यता बहुत अधिक है। यदि 5 कमरों के स्कूल के लिए 200 स्क्वायर यार्ड जमीन अनिवार्य है तो इस हिसाब से 3 और कमरों के लिए 120 स्क्वायर यार्ड अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होनी चाहिए। इस प्रकार, मिडिल स्कूल चलाने के लिए प्राइमरी स्कूल के लिए आवश्यक जमीन की अनिवार्यता से चार गुना अतिरिक्त जमीन (700 स्क्वायर मीटर = 837 स्क्वायर यार्ड) की अनिवार्यता तय करना अनुचित और मनमानी पूर्ण है...

Friday, June 09, 2017

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency
पारदर्शिता अर्थात transparency
उत्तरदायित्व अर्थात accountability
और निष्पक्ष आंकलन
आज बात विधि के शासन अर्थात Rule of law की।

सरल शब्दों में कहें तो कानून या विधि का मतलब है मनुष्य के व्यवहार को नियंत्रित और संचालित करने वाले नियमों,...

Thursday, June 08, 2017

रिलायंस ने 1 सितंबर 2016 को अपनी दूरभाष सेवा ‘जियो’ का लोकार्पण किया। इसके तहत फोन पर निशुल्क बातचीत करने और ग्राहको के लिए 4 जी इंटरनेट डेटा प्लान उपलब्ध है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक रिलायंस जियो का सिम हासिल करने के लिए पूरा देश उमड़ पड़ा और कतारबद्ध होकर खड़ा हो गया।

देश के विभिन्न इलाकों की मेरी यात्रा के दौरान मैनें पाया कि मेरे मित्रों सहित बहुत सारे लोग हमेशा ऑनलाइन रहते थे खुशी खुशी निशुल्क 4 जी डेटा सर्विस का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसा होते हुए अब छह महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। जियो ने हाल ही में अपनी सेवा के बदले 100 रूपए प्रति माह के बेसिक कैपिटेशन चार्ज लेने की घोषणा की जो कि अप्रैल 2017 से लागू हो गयी। जीवन भर मैं एयरटेल का ग्राहक रहा...

Friday, June 02, 2017

अध्यापकों की शैक्षणिक योग्यता और वेतन

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून 2009 में शिक्षक होने के लिए बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की योग्यता को अनिवार्य बना दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पहले से ही अध्यापनरत समस्त अध्यापकों के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उतीर्ण करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकारों ने भी उक्त नियमों में रियायत नहीं दी और सभी निजी स्कूलों के अध्यापकों के लिए पांच वर्ष के भीतर टीईटी उतीर्ण करना आवश्यक कर दिया।

पहली बात तो ये कि भारत में वर्तमान में प्रशिक्षित शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या मौजूद नहीं है जिससे कि मौजूदा अध्यापकों को उनसे बदला जा सके। दूसरी बात बीपीएस बीएड व टीईटी उतीर्ण अध्यापकों को नियुक्त करने का अतिरिक्त खर्च भी वहन नहीं कर सकते।...

Sunday, May 28, 2017

भारत में, सरकार 6 से 14 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है। हमारे देश में शिक्षा नीति की संरचना इस प्रकार की गई है कि वह शिक्षा मयस्सर कराने के लिए मुख्य रूप से सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाले स्कूलों पर केंद्रीत है। यकीनन, गैर सरकारी संस्थानों द्वारा संचालित स्कूलों को दोयम स्तर का दर्जा हासिल है। इसलिए, हमें अपने पर्यवेक्षण के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों के प्रति नीतिगत दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। सरकारी स्कूलों के संबंद्ध में यह दृष्टिकोण जहां सहयोगी और सुविधा प्रदान करने वाला होता है वहीं निजी स्कूलों के प्रति यह दृष्टिकोण अधिक नियंत्रणकारी और नियमन युक्त होता है। स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) से संबंधित मानदंड एक ऐसा ही क्षेत्र है जहां नियमन में असंगतता ज्यादा स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है।

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Saturday, May 27, 2017

उदारवादः 

उदारवाद शब्द का मूल आज़ादी या स्वतंत्रता है। दूसरे शब्दों में यहां केंद्र बिंदू व्यक्ति है। समाज व्यक्ति की मदद के लिए है और न कि व्यक्ति समाज के लिए जैसा कि साम्यवाद या समाजवाद जैसी व्यवस्थाएं परिभाषित करने की कोशिश करती हैं। उदारवाद के मूल तत्व व्यापक हैं और जीवन के हर पहलू को छूते हैं। जहां तक मनोभाव की बात है तो सहनशीलता, खासतौर पर असहमति को लेकर, ही इसका आधार है। मामला चाहे धार्मिक हो, सांप्रदायिक, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या फिर जाति या भाषाई समूह से ताल्लुक रखता हो, दूसरे के विचारों को लेकर सहनशीलता और इसे लेकर तर्क करने की तैयारी, उदारवाद का सार हैं।

जहां तक धर्म की बात है तो उदारवाद धर्मविरोधी नहीं है, लेकिन गैर-सांप्रदायिक और शायद नास्तिक भी है।

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मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Saturday, June 24, 2017
लोक कल्याण के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना उस योजना से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या की गणना के आधार पर...

Thursday, June 01, 2017
खुशखबरी!! ipolicy वर्कशॉप में आवेदन करने से चुक गए पत्रकारों के लिए सुनहरा मौका। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2017 से बढ़ाकर 5 जून 20...

Thursday, May 04, 2017
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित...

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Monday, May 01, 2017
पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में अभिभावकों की पसंद में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है और कम साधनों के बावजूद ग्रामीण एव...

Thursday, April 27, 2017
शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो, बच्चों को सिखाने बैठा हूँ.. मैं डाक बनाने बैठा हूँ , मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ। कक्षा में जाने से पह...

Thursday, April 06, 2017
कानून बनाने का उद्देश्य क्या होता है और वास्तव में कानून क्या करता है, इस विषय को बेहद हल्के फुल्के किंतु सटीक ढंग से चित्रित किया...

Thursday, March 02, 2017
  सुनो सुनो... विधायक जी कह रहे हैं कि ये ही मिल कर मुख्यमंत्री चुनते हैं   साभारः काजल कुमार  

Wednesday, March 01, 2017
जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2...

आपका अभिमत

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आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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