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Monday, September 26, 2016

एक अप्रैल 2010 को ‘शिक्षा का अधिकार’ क़ानून 86वें संशोधन के तहत लागू किया गया था। इस क़ानून को लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यही था कि छह वर्ष से चौदह वर्ष तक के बच्चों की मुफ्त शिक्षा को सुनिश्चित किया जाये। इस क़ानून से शिक्षा प्राप्त करना न सिर्फ हर बच्चे का अधिकार बना बल्कि सरकार की भी जवाबदेही तय हो गयी।

प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि सबको शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में यह क़ानून परिवर्तनकारी साबित होगा। लेकिन आज शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू होने के छह साल बाद जब इसके उद्देश्यों के मापदंडों पर इस क़ानून का मूल्यांकन करते हैं तो स्थिति उलट नजर आती है। वैसे तो क़ानून का उद्देश्य शिक्षा मुहैया कराना था लेकिन इसमें सभी स्कूलों की मान्यता होना अनिवार्य कर दिया गया। इस क़ानून के तहत बिल्डिंग कोड भी बना दिया गया जिसके तहत यह तय कर दिया गया कि पांचवीं तक 800...

Monday, September 19, 2016

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों ने प्रकृति और संस्कृति, कला और जीवन, सामरिक ललक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक शांति, जैव एवं सांस्कृतिक विविधता के बीच एक बेमिसाल तालमेल स्थापित किया है और इसे संरक्षित भी किया है। इन लोगों ने इस संतुलन की खूबी को संगीत, कला, स्थापत्य, अपनी सोच और ज्ञान प्रणाली, जीवन के आधारभूत रीति रिवाज से लेकर अपने कार्यों, मौसम और प्रकृति में संजोये रखा है।

पूर्वोत्तर अपनी भौगोलीय और पर्यावरणीय विविधता के कारण अलौकिक सुंदरता वाला क्षेत्र है। चारों तरफ हरे भरे जंगल, उत्कृष्ट जड़ी बूटियों का खजाना, तेज प्रवाह में बहते नदी नाले, शानदार पहाड़ और बर्फ से ढ़की हुई अद्भुत चोटियां इस क्षेत्र को अलौकिक बनाते है। प्रकृति ने पूर्वोत्तर को खुले दिल से विलक्षण खूबसूरती और वानिकी जीवन का कीमती खजाना दिया है जो इस क्षेत्र को अंतराष्ट्रीय स्तर पर जैव...

Friday, September 16, 2016

- फ्रेजर इंस्टिट्यूट व सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा जारी वैश्विक रैंकिंग में 102 से फिसलकर 112वें स्थान पर पहुंचा भारत
- आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में भूटान (78), नेपाल (108) व श्रीलंका (111) से पिछड़ा पर चीन (113), बांग्लादेश (121) व पाकिस्तान (133) से रहा आगे
- आर्थिक रूप से स्वतंत्र देशों की सूची में हांगकांग शीर्ष पर, सिंगापुर व न्यूजीलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर

नई दिल्ली। फ्रेज़र इंस्टिट्यूट, कनाडा द्वारा जारी वार्षिक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक सूची (इकोनॉमिक फ्रीडम इंडेक्स लिस्ट) में भारत दस पायदान फिसलकर 112वें क्रम पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष जारी सूची में भारत की रैंकिंग 102 थी। आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में 159 देशों की सूची में में भारत को 112वें क्रम पर रखा गया है। पड़ोसी देश भूटान, नेपाल व श्रीलंका क्रमशः 78वें, 108वें व 111वें...

Thursday, September 15, 2016

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से हाल ही में दिल्ली सरकार द्वारा ‘चुनौती 2018’ कार्यक्रम की घोषणा की गई। इस कार्यक्रम के तहत छठी से नौवीं कक्षा के छात्रों के सीखने की क्षमता का मूल्यांकन (लर्निंग असेसमेंट) कराने का कार्य किया गया। मूल्यांकन का परिणाम ठीक वैसा ही रहा जैसा कि अपेक्षित था। छठीं कक्षा के 74 फीसदी छात्र धारा प्रवाह हिंदी की किताब पढ़ने में और साधारण वाक्य लिखने भी असमर्थ पाए गये। हालांकि यह परिणाम कहीं से भी चौंकाने वाला नहीं साबित हुआ। अर्थात यह वह परिणाम था जिससे ज्यादा की अपेक्षा आमतौर पर सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर शायद ही कोई करता होगा। यदि कुछ स्कूलों के छात्रों का प्रदर्शन बेहतर है तो यह वहां के अध्यापकों के विशेष प्रयास अथवा छात्रों की असाधारण प्रतिभा का परिणाम अधिक और व्यवस्था की देन कम ही होती है। 

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Thursday, August 25, 2016

पिछले एक दशक में देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के तेज प्रयास देखने को मिले हैं। 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की गारंटी प्रदान करने वाला 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009' (आरटीई एक्ट) सुधार के प्रयासों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) बनाने की कवायद भी सुधार का अगला चरण हैं। हालांकि इससे पहले सन् 1968 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बाद में सन् 1986 में राजीव गांधी सरकार द्वार नई शिक्षा नीतियां लागू की गईं। वर्ष 1992 में इसमें कुछ छोटे-छोटे बदलाव भी किए गए। किंतु सभी शिक्षा नीतियों में कमोवेश एक बात उभयनिष्ठ थीं कि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में और ज्यादा खर्च करना चाहिए।

आरटीई एक्ट भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की बात करता है और इसके लिए विद्यालय के...

Thursday, August 25, 2016

आज अगर किसी से भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था की बात की जाय तो सब यही कहेंगे कि शिक्षा एक व्यवसाय बन गया है, एक बाजार बन गया है। लेकिन क्या सच में ऐसा है अगर इस बात में सच्चाई होती तो क्या भारतीय शिक्षा व्यवस्था की इतनी दुर्दशा होती? इतनी खामियां और नाकामियां होती? शायद नही क्योंकि बाजार या व्यवसाय की एक नैतिकता है जिसका आधार प्रतिस्पर्धा और ग्राहक संतुष्टि है। लेकिन ये दोनों ही मूलभूत तत्व भारतीय शिक्षा व्यवस्था से नदारद है। शिक्षा का अधिकार कानून आए एक अरसा बीत गया है। जितनी उम्मीदें लोगों और सरकार की इससे थीं उतनी फलीभूत नही हुईं। पहले से ही कंडम शिक्षा व्यवस्था का इसने और कबाड़ा किया है।

आज बात इसी से जुड़े एक पहलु पर जिसपर बहुत कम लोगों का ध्यान गया है। ध्यान गया है तो सिर्फ भुक्तभोगियों का जिनकी कोई सुनवाई नही है। उदाहरण के लिए बात दिल्ली की करूँगा...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Thursday, September 08, 2016
बड़े व्यापारिक घराने उच्च मजदूरी दर (न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ाने) के लिए लॉबिंग करते हैं, ताकि छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस बढ़े...

Thursday, August 04, 2016
सहभागितापूर्ण लोकतंत्र के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय व...

Monday, August 01, 2016
जन्मदिन विशेषः "सही लोगों का चयन करना अच्छी बात है, लेकिन समस्याओं का समाधान इतने से ही नहीं होता। समस्याओं का समाधान गलत व्यक्ति...

Tuesday, July 26, 2016
आजादी के पूर्व से ही देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट प्राइवेट स्कूल्स अर्थात लो फी प्राइवेट स्कूल्स का योगदान अत्यंत महत्व...

Tuesday, May 17, 2016
समाजवाद के 6 चमत्कार 1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं 3- पैसे...

Monday, May 09, 2016
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक...

Monday, May 02, 2016
- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा - आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर...

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Thursday, April 21, 2016
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरका...

आपका अभिमत

क्या आरटीई एक्ट के प्रावधान शिक्षा के क्षेत्र में पूंजीपतियों के प्रवेश को बढ़ावा देते प्रतीत होते हैं?

आज़ादी वी‌डियो

  जनवरी 1, 2009 को एटलस वैश्विक पहल की घोषणा करी गयी. टॉम पामर के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल क...

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