ताज़ा पोस्ट

Thursday, July 28, 2016

जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में बैठे लोग यदि इस दृष्टिकोण से चलें और मुख्य रूप से कानून बनाने वाले लोग यदि इसे समझें और पूरे विश्वास के साथ इसे लागू करें, तो हम अपेक्षाकृत अधिक सशक्त, मुक्त समृद्ध और पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुशासित लोग होंगे।

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Wednesday, July 27, 2016

जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समष्द्धि का कारण है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर  अंकित प्रत्येक बिन्दु,  जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है,  तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं तथा यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उसने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े रोचक परिणाम निकलकर आये कि वेतन एवं मुद्रास्फीति की तुलना में सभी प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पिछले दो सौ सालों में लगातार गिरी है, जबकि इस दौरान पृथ्वी पर मनुष्यों की जनसंख्या बढ़ कर चार गुनी हो गई है।

यह सचमुच एक...

Thursday, July 21, 2016
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जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में बैठे लोग यदि इस दृष्टिकोण से चलें और मुख्य रूप से कानून बनाने वाले लोग यदि इसे समझें और पूरे विश्वास के साथ इसे लागू करें, तो हम अपेक्षाकृत अधिक सशक्त, मुक्त समृद्ध और पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुशासित लोग होंगे।

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Thursday, July 14, 2016

- 'एजुकेशनः फिलॉसफी, पॉलिसी एंड प्रैक्टिस' विषयक वर्कशॉप के दौरान शिक्षा के वर्तमान व भावी स्वरूप और नीतियों पर हुई गहन चर्चा
- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी और आजादी.मी ने मीडियाकर्मियों के लिए किया था दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन

नई दिल्ली। किसी देश व वहां के नागरिकों समेकित विकास के लिए शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवयव है। अतः देश, समाज और नागरिकों के विकास के लिए शिक्षा सभी सरकारों की प्राथमिकता सूची में होती है। हालांकि अन्य क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र में भी बनने वाली सरकारी नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव देखने को मिलता है। पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव के कारण नागरिकों से कर के रूप में हासिल होने वाले धन का एक बहुत बड़ा हिस्सा, जो कि सरकार के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किया जाता है, बर्बाद हो जाता है।...

Wednesday, June 15, 2016

देश के प्रत्येक बच्चे को समुचित शिक्षा मिलनी चाहिए, यह एक आदर्श वाक्य है। यह वाक्य जितना आदर्शवादी है उतना ही निर्विवाद भी है। भला कौन कहेगा कि समुचित शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए! शायद कोई नही। खैर, इस आदर्श वाक्य को मै दो शब्दों की वजह से अधूरा मानता हूँ। बेहतर होता कि हम ये कहते कि "देश के प्रत्येक बच्चे को 'मन-मुताबिक़' शिक्षा मिले" बजाय कि उपरोक्त वाक्य कहें। शाब्दिक तौर पर दोनों ही वाक्य समानार्थी प्रतीत होते हैं लेकिन व्यहारिकता के स्तर पर प्रयोग होने वाले सिद्धांतों के धरातल पर दूसरा वाक्य ज्यादा सुधारवादी एवं पारदर्शी है। चूँकि किसी बच्चे को शिक्षा मिले यह तो अच्छा है ही, लेकिन वह शिक्षा उसके एवं उसके अभिभावकों की सहूलियत, उनकी इच्छा के अनुरूप मिले, इसका भी ख्याल रखा जाना बेहद जरुरी है। आज से पांच साल पहले ही भारत शिक्षा का अधिकार दे चुका है लेकिन बावजूद इसके हम बच्चों को उनके मन-मुताबिक़ शिक्षा प्राप्त करने...

Wednesday, June 08, 2016

जोनाथन ने खास फायदे के मेले वाली उस औरत का सपना देखा। वह बार बार उसे पैसे दे रही थी और फिर से वापस छीनती जा रही थी। उसने उसे एक बार फिर पैसे दिए और उसे वापस लेने के लिए आगे बढ़ी। अचानक जोनाथन एक झटके से नींद से जागा। उसे याद आया कि उसे अपनी आमदनी की रिपोर्ट कर अधिकारियों को देनी है, वर्ना उसे भी इंसानों वाले चिड़ियाघर के बाड़े में बंद होना पड़ेगा।

ताजा सिंकी रोटी की स्वादिष्ट खुशबू उसकी नाक में भी गई। बूढ़ा आदमी मेज के पास खड़ा होकर नाश्ते के लिए जैम लगे टोस्ट तैयार कर रहा था। जोनाथन ने ध्यान दिया कि नाश्ते की मेज पर उनके साथ उदास चेहरे वाला एक छोटा बच्चा भी बैठा हुआ है। उस बूढ़े दंपत्ति ने बताया कि वह उनका पोता डेवी था जो कुछ दिन उनके साथ रहने वाला था।
'मुझे तुम्हारी याद है,' जोनाथन को देखते ही वह बच्चा चहका। 'दादाजी, जब हमें अपना खेत छोड़ना...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Tuesday, July 26, 2016
आजादी के पूर्व से ही देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट प्राइवेट स्कूल्स अर्थात लो फी प्राइवेट स्कूल्स का योगदान अत्यंत महत्व...

Tuesday, May 17, 2016
समाजवाद के 6 चमत्कार 1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं 3- पैसे...

Monday, May 09, 2016
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक...

Monday, May 02, 2016
- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा - आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर...

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Thursday, April 21, 2016
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरका...

Tuesday, March 08, 2016
रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर क...

Thursday, February 18, 2016
निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) ही विद्यार्थियों की शिक्षा के...

Tuesday, February 16, 2016
रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्ष...

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आज़ादी वी‌डियो

  जनवरी 1, 2009 को एटलस वैश्विक पहल की घोषणा करी गयी. टॉम पामर के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल क...

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