ताज़ा पोस्ट

Friday, May 19, 2017

गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

अपने युवावस्था के दिनों में मैं इस खिसिया देने वाले लेकिन निष्ठुर कानून से अनजान था। उन दिनों तो मैं गरीबी को हल करने के तुरत-फुरत सलोने उपायों के सपने बुन लिया करता था। यह बात मेरी समझ में ही नहीं आई कि अगर गरीबी को खत्म करना इतना आसान होता तो यह काम तो सदियों पहले ही कर लिया गया होता।

सम्राट तुगलक ने चांदी को तांबे की कीमत का ही बताने वाले फरमान के साथ ऐसा ही करने की कोशिश...

Saturday, May 13, 2017

दो दशक पूर्व लाइसेंस, परमिट, कोटा आधारित प्रशासनिक व्यवस्था के दौर में जब अधिकांश सेवा प्रदाता कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र की यानि सरकारी हुआ करती थीं तब उपभोक्ताओं के लिए उन सेवाओं को हासिल करना टेढ़ी खीर हुआ करती थीं। बात चाहे हवाई जहाज की यात्रा करने की हो या टेलीफोन कनेक्शन लेने की, ऐसी सेवाएं लग्जरी की श्रेणी में शामिल हुआ करतीं थीं और स्टेटस सिंबल के तौर पर जानी जाती थीं और मध्यवर्ग के लिए ऐसा कर पाना किसी बड़े सपने के पूरा होने से कम नहीं हुआ करता था। इसके अलावा सेवा की गुणवत्ता की बात करना तो जैसे दूसरी दुनियां की बात थी। लेकिन आज परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। रेल यात्रा के खर्च में हवाई यात्रा की जा सकती है और अब यह आम आदमी के पहुंच में है। हवाई यात्रा करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। उधर, देश में टेलीफोन और मोबाइल ग्राहकों की संख्या भी 80 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है।

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Friday, May 12, 2017

सिंगापुर में सात वर्ष तक प्रवास करने और प्रॉक्टर एंड गैम्बल लिमिटेड में काम करने के बाद दस साल पहले सन् 2007 में मैं भारत लौट आया। भारत में शिक्षा की तस्वीर बदलने की इच्छा मुझमें बलवती हो रही थी क्योंकि हमारे बच्चों को यहां मिलने वाली शिक्षा की खराब गुणवत्ता से मैं बेहद असंतुष्ट था। शिक्षा के प्रारूप को समझने के लिए मैनें भारत की गिनी चुनी लिस्टेड एजुकेशन कंपनियों में से एक – ज़ी लर्न लिमिटेड के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर पांच वर्ष तक जुड़ा रहा। इससे मुझे शिक्षा के स्कूल और प्री स्कूल वाले प्रारूप के बारे में विस्तृत समझ प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ। मेरी पाठचर्या (करिकुलम) तैयार करने व अध्ययन अध्यापन (पेडागॉजी) कला में गहरी रूचि थी और मैनें अपनी टीम के साथ मिलकर छोटे बच्चों की प्रगति और गणित व विज्ञान पढ़ाने व सीखने के लिए नवाचार (इनोवेटिव) युक्त तरीकों को विकसित किया।

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Monday, May 08, 2017

थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटी (सीसीएस), उदारवादी वेबपोर्टल आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग कार्यक्रम ipolicy 2017. 16-18 जून 2017 तक एटलस नेटवर्क व एडलगिव के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारों के लिए ipolicy (लोकनीति में सर्टिफिकेट) कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस बार उत्तराखंड के रमणीय स्थल भीमताल का चयन किया गया है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन करने की की अंतिम तिथि 31 मई 2017 है। इस तीन दिवसीय (दो रात, तीन दिन) आवासीय कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक समस्याओं के मूल कारणों, सरकारी नीतियों का शिक्षा, रोजगार, सुशासन आदि पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा परिचर्चा और सार्थक विमर्श करना है। यह कार्यक्रम पत्रकारों को खबर खोजने तथा घटनाओं और प्रवृत्तियों के तीक्ष्ण विश्लेषण के लिए नई दृष्टि प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों के साथ...

Wednesday, May 03, 2017

निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोत्तरी और उस पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से की जा रही कार्रवाई इन दिनों चर्चा में है। बेशक निजी स्कूलों को मनमाने ढंग से फीस में बढ़ोत्तरी को अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन फीस बढ़ोतरी नियंत्रित कैसे हो इसके तरीके अलग अलग हो सकते  हैं। निजी स्कूलों के फीस नियंत्रण पर चर्चा करने से पहले एक अहम सवाल यह है कि छठवें और सातवें वेतन आयोग के बाद अध्यापकों के वेतन में जो बढ़ोत्तरी हुई है, क्या उसी अनुपात में सरकारी स्कूलों की शिक्षा का स्तर भी बढ़ा है? जब तक इन सवालों पर विचार नहीं किया जाएगा, सरकारी स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था को सुधारा नहीं जाएगा, निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी को सवालों के कठघरे में खड़ा करना भी अनुचित ही माना जाना चाहिए। लेकिन निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी पर हो रहे बवाल के बीच खासकर सरकारी शिक्षा से जुड़े बुनियादी सवालों को लगातार नजरंदाज किया जा रहा है।...

Saturday, April 29, 2017

प्राचीन काल में सुकीर्ति नामक एक प्रतापी राजा हुआ करता था। उसके राज्य का नाम था अनंतप्रस्थ जिसकी राजधानी थी सूर्यनगर। अनंतप्रस्थ के निवासी अपने राजा का बहुत ही आदर करते थे। आदर करते भी क्यों नहीं, राज्य के विकास और सबकी भलाई ही सुकीर्ति के जीवन का एकमात्र उद्देश्य जो था। सुकीर्ति अपने राज्य के निवासियों की भलाई के लिए दिन-रात, सुबह-शाम बिना रुके, बिना थके काम करता रहता था और अपने साथ अपने दरबारियों और मंत्रियों पर भी कड़ी निगरानी रखता था। देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राजा ने सुकीर्ति ने राजधानी सूर्यनगर के बीचोबीच एक विशाल हाट का निर्माण कराया जहां दिनभर पूरे राज्य के व्यापारी, व्यवसायी, पशुपालक, किसान, कलाकार आदि एकत्रित होकर व्यापार करते और शाम होते होते अपने अपने नगर को वापस लौट जाते। जिनके नगर दूर थे वे सूर्यनगर में ही कई दिनों और कई कई बार कई हफ्तों तक प्रवास करते और कुछ धन एकत्रित होजाने के बाद ही...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Thursday, May 04, 2017
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित...

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Monday, May 01, 2017
पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में अभिभावकों की पसंद में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है और कम साधनों के बावजूद ग्रामीण एव...

Thursday, April 27, 2017
शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो, बच्चों को सिखाने बैठा हूँ.. मैं डाक बनाने बैठा हूँ , मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ। कक्षा में जाने से पह...

Thursday, April 06, 2017
कानून बनाने का उद्देश्य क्या होता है और वास्तव में कानून क्या करता है, इस विषय को बेहद हल्के फुल्के किंतु सटीक ढंग से चित्रित किया...

Thursday, March 02, 2017
  सुनो सुनो... विधायक जी कह रहे हैं कि ये ही मिल कर मुख्यमंत्री चुनते हैं   साभारः काजल कुमार  

Wednesday, March 01, 2017
जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2...

Thursday, February 02, 2017
चुनाव आ गए क्या..

Saturday, January 07, 2017
स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर...

आपका अभिमत

क्या आपको लगता है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने हेतु सरकारें गंभीर हैं?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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