ताज़ा पोस्ट

Thursday, August 17, 2017

“माल-ए-मुफ्त, दिल–ए-बेरहम, फिर क्या तुम, क्या हम?” हमारी एक आदत सी हो गई है। हम हर चीज की अपेक्षा सरकार या सरकारी व्य वस्था  से करते हैं। यह ठीक है कि हमारे दैनिक जीवन में सरकार का दखल बहुत अधिक है बावजूद इसके हम उस पर कुछ ज्य़ादा ही निर्भर हो जाते हैं। एक कहावत है कि किसी समाज को पंगु बनाना है तो उसे कर्ज या फिर सब्सिडी की आदत डाल दो, वो इससे आगे कभी सोच ही नहीं पाएगा। देश की राजनीति में ये कथन बहुत मौजूं है।  

सरकार देश के कमजोर तबके के लोगों के लिए कुछ मूलभूत जरूरत की चीजों को खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देती है जिसे सब्सिडी कहा जाता है। लेकिन हकीकत ये है कि सब्सिडी को जिस तबके के लिए फायदेमंद बताया जाता है, वो या तो उस तक पहुंचती नहीं है या फिर उस वर्ग विशेष का भला नहीं कर पाती। इस तथ्य को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने...

Sunday, August 13, 2017

सभी बच्चोँ को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए लाए गए अधिनियम ‘फ्री एंड कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट-2009’, जिसे आमतौर पर आरटीई एक्ट के नाम से भी जाना जाता है, की खामिया अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगी हैं।

प्रथम द्वारा प्रकाशित एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2016 (एएसईआर 2016) में ही बताया गया था कि किस तरह से नया नियम आने के बाद बच्चोँ की अटेंडेंस और उनके सीखने के स्तर में गिरावट आई है। अब कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की रिपोर्ट ने न सिर्फ प्रथम द्वारा जारी रिपोर्ट की पुष्टि की कर दी है बल्कि इस सर्वविदित राज पर से भी पर्दा उठा दिया है कि नए नियम ने किस तरह से अनियमितताओं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।

हालांकि रिपोर्ट में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया है मगर इस...

Sunday, August 13, 2017

बहुत पुरानी बात है। गंगा तट पर बसी काशी नगरी को तब भी व्यापार, कला और कारीगरी के क्षेत्र में उत्कृष्ट मुकाम हासिल था। नगर से थोड़ी दूरी पर जुलाहों का एक दल निवास करता था। जुलाहों का मुख्य पेशा बांस की टोकरी आदि बनाना था। आमतौर पर उनके मकान कच्चे थे और बांस, मिट्टी और खपरैल आदि के ही बने थे। उनमें से सिर्फ दो-एक मकान ऐसे थे जो पक्के थे। इन पक्के मकानों में से एक मकान वृद्ध रामदीन का था। दरअसल, रामदीन अन्य जुलाहों की तरह बांस की टोकरी इत्यादि बनाने के स्थान पर रेशम के वस्त्र बनाया करता था। उसके बनाए हुए वस्त्रों की एक अलग खासियत थी। वस्त्र सदैव मुलायम और चमकदार बने रहते थे। रामदीन का भी दावा था कि वस्त्र भले ही तार तार हो जाएं लेकिन उनकी चमक पर असर पड़े तो वह वस्त्र बनाना छोड़ देगा। रामदीन की देखादेखी कुछ अन्य जुलाहों ने भी रेशम के वस्त्र बनाने की कोशिश की लेकिन गुणवत्ता के मामले में वे रामदीन के आसपास भी नहीं...

Wednesday, August 02, 2017
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ब्रिटिश एयरवेज और लुफ्तहांसा। एयरलाइंस की दुनिया में चमकते ऐसे नाम हैं जिनके विमानों में हर शख्स एक ना एक बार यात्रा जरूर करना चाहता है। इनकी बेहतरीन सर्विस और शानदार मेहमाननवाजी का हर कोई कायल है लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था। 1987 में ब्रिटेन की सरकारी एयरलाइंस ब्रिटिश एयरवेज में घाटा जब लगातार बढ़ता गया और कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई तो वहां की सरकार ने एविएशन सेक्टर से निकलने का फैसला कर लिया। कुछ ऐसा ही 1994 में जर्मनी की लुफ्तहांसा के साथ हुआ। भारी घाटे और कर्ज के बोझ से लुफ्तहांसा दब चुकी थी। जर्मन सरकार ने समय रहते उसे निजी क्षेत्र को बेच दिया। आज यूरोप की इन दोनों एयरलाइंस को दुनिया की दस बेहतरीन एयरलाइंस में शुमार किया जाता है। निजी क्षेत्र मे जाने के बाद इन एयरलाइंस की कामयाबी एक मिसाल बन गई है।

ज्यादातर देश अब एयरलाइन्स का...

Monday, July 31, 2017

- 25 से 27 अगस्त तक चलेगी कार्यशाला, आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त
- पब्लिक पॉलिसी व एजुकेशन पॉलिसी पर आधारित होगी ipolicy, हरियाणा व चंडीगढ़ के पत्रकारों को मिलेगी वरीयता

सेंटर फार सिविल सोसायटी एडलगिव के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप। सुरम्य वातावरण व प्रकृति की हसीन वादियों में ipolicy वर्कशॉप कराने की परंपरा को जारी रखते हुए इसवर्ष हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन मैक्लोडगंज को चुना गया है। 25 से 27 अगस्त 2017 तक चलने वाले इस वर्कशॉप के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गयी है। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख...

Saturday, July 22, 2017
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पुलिस दुराचरण के विरुद्ध लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं। वर्ष 2007 में बनाए गए विभिन्न राज्यों के विकलांग पुलिस कानून में प्रावधान की गयी कमेटियों का आजतक गठन नहीं हुआ है व राजस्थान उनमें से एक है। यद्यपि इन कमेटियों के गठन से भी धरातल स्तर पर कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि जांच के लिए पुलिस का ही सहारा लिया जाता है। आखिर कोई भी पेड़ अपनी शाखा को किस प्रकार काट सकता  है? देश में मानवाधिकार आयोगों का भी यही हाल है क्योंकि वहां पर भी ज्यादातर शिकायतें पुलिस के विरुद्ध ही होती हैं और पुलिस ही इनकी जांच करती है और कई बार तो स्वयं आरोपित से ही जांच रिपोर्ट मांगी जाती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रेम हजारा के मामले में एक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि जब शिकायत स्वयं किसी पुलिस अधिकारी के विरूद्ध हो तो जांच पुलिस द्वारा नहीं होनी चाहिए। इस दृष्टिकोण...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Tuesday, August 01, 2017
"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए...

Tuesday, July 25, 2017
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। वर्ष 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ही सीबीएफसी का...

Monday, July 24, 2017
हाल ही में लोकसभा में एक एक विधेयक पारित हुआ है जिसके कानून बन जाने की सूरत में देश मे लगभग आठ लाख शिक्षकों की कमी हो जाएगी। पारित...

Tuesday, June 27, 2017
एचआरडी मिनिस्ट्री ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी बनाने के लिए कमिटी का ऐलान किया है। कमिटी का हेड अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन को बन...

Saturday, June 24, 2017
लोक कल्याण के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना उस योजना से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या की गणना के आधार पर...

Thursday, June 01, 2017
खुशखबरी!! ipolicy वर्कशॉप में आवेदन करने से चुक गए पत्रकारों के लिए सुनहरा मौका। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2017 से बढ़ाकर 5 जून 20...

Thursday, May 04, 2017
नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित...

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Monday, May 01, 2017
पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में अभिभावकों की पसंद में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है और कम साधनों के बावजूद ग्रामीण एव...

आपका अभिमत

गैस सिलेंडर से सब्सिडी समाप्त करने के सरकार के फैसले से क्या आप सहमत हैं?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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