ताज़ा पोस्ट

Wednesday, February 22, 2017

सरकारी जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने के एक मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सरकार की अनुमति को आवश्यक बताया है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि स्कूली फीस एक बड़ा मुद्दा है; सामाजिक मुद्दा भी और राजनैतिक मुद्दा भी। एक तरफ स्कूल प्रबंधन अपने खर्चे का हवाला देते हुए फीस वृद्धि को न्यायसंगत साबित करने की कोशिश करता है वहीं अभिभावक और उनके साथ साथ सरकार इसे स्कूलों की मनमानी बताती है। अभिभावक चाहते हैं कि स्कूली फीस के मामले में सरकार दखल दे और स्कूलों की मनमानी से उन्हें निजात दिलाए। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत कुछ एनजीओ व स्वयंसेवी समूह भी सरकारी दखल के लिए दबाव बनाते देखे जा सकते हैं। लेकिन, निजी स्कूलों के कामकाज में सरकारी दखल की अलग समस्याएं हैं।

पाठ्यक्रम निर्धारण में यह दखल पहले से मौजूद है और सरकार...

Thursday, February 16, 2017

शिक्षा के क्षेत्र में हमें गुणवत्ता पर केन्द्रित रहना चाहिये और यह सुनिश्चित करना चाहिये कि दाखिला प्राप्त करने वाला प्रत्येक विद्यार्थी सीखने के लक्ष्य की सबसे सीधी राह को पा सकें।

शिक्षा और अध्यापन को समूचे विश्व में मानव समुदाय की जरुरतों के अनुसार विकसित किया गया है। अध्यापन का पहला अभिलेखित मॉडल भारत में गुरुकुलों का और ग्रीस में अकादमियों का था, जहाँ केवल प्रभावशाली और अत्यन्त सौभाग्यशाली परिवारों के बच्चों को ही प्रवेश मिलता था। इनमें शिक्षकों और विद्यार्थियों का अनुपात काफी ऊँचा होता था। प्रत्येक विद्यार्थी (और उनके अभिभावकों की भी) जरुरतों के मुताबिक ही पाठ्यक्रम और कक्षा का समय रखा जाता था और अध्यापन के विषयों में भी खगोल विज्ञान से प्राणीशास्त्र तक शामिल होते थे। विद्यार्थी प्राय: इस प्रकार के मॉडल में कामयाब...

Wednesday, February 15, 2017
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- तमाम व्यवहारिक दिक्कतों के बावजूद बाजार द्वारा देश में कैशलेस इकोनॉमी की ठोस नींव रखी जा चुकी है। अब आवश्यकता है कि सरकार उस नींव के सहारे अपने बहु-उद्देशीय और महत्वकांक्षी योजना वाले भवन का निर्माण करे।

8 नवंबर की देरशाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट को कानूनी लेनदेन की प्रक्रिया को (लीगल टेंडर) के लिए अयोग्य घोषित करने के बाद से विमुद्रीकरण और कैशलेस इकोनॉमी जैसे भारी भरकम माने जाने वाले विषय पर होने वाले गंभीर विमर्श का दायरा आर्थिक विशेषज्ञों और बौद्धिक समूहों के गोलमेज सम्मेलन से बाहर निकलकर हर आम-ओ-खास द्वारा नुक्कड़-चौराहों पर होने वाली चर्चा तक विस्तारित हो गया। कैशलेस इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री की दृष्टि जहां स्पष्ट है और वह इसे समानांतर चलने वाली भ्रष्टाचार आधारित अर्थव्यवस्था, आतंकवाद की फंडिंग...

Saturday, February 11, 2017

गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

अपने युवावस्था के दिनों में मैं इस खिसिया देने वाले लेकिन निष्ठुर कानून से अनजान था। उन दिनों तो मैं गरीबी को हल करने के तुरत-फुरत सलोने उपायों के सपने बुन लिया करता था। यह बात मेरी समझ में ही नहीं आई कि अगर गरीबी को खत्म करना इतना आसान होता तो यह काम तो सदियों पहले ही कर लिया गया होता।

सम्राट तुगलक ने चांदी को तांबे की कीमत का ही बताने वाले फरमान के साथ ऐसा ही करने की कोशिश...

Thursday, February 02, 2017

एक राज्य का नया वित्तमंत्री काकभुशुण्डजी से मिलने गया और हाथ जोड़कर बोला कि मुझे शीघ्र ही बजट प्रस्तुत करना है, मुझे मार्गदर्शन दीजिए. तिस पर काकभुशुण्ड ने जो कहा सो निम्नलिखित है:

हे वित्तमंत्री, जिस प्रकार कैक्टस की शोभा काँटों से और राजनीति लंपटों से जानी जाती है उसी प्रकार वित्तमंत्री विचित्र करों तथा ऊलजलूल आर्थिक उपायों से जाने जाते हैं. पर-पीड़ा वित्तमंत्री का परम सुख है. कटोरी पर कर घटा थाली पर बढ़ाने, बूढ़ों पर कर कम कर बच्चों पर बढ़ाने और श्मशान से टैक्स हटा दवाइयों पर बढ़ाने की चतुर नीति जो बरतते हैं वे ही सच्चे वित्तमंत्री कहाते हैं. हे वित्तमंत्री, बजट का बुद्धि और हृदय से कोई संबंध नहीं होता. कमल हो या भंवरा, वेश्या अथवा ग्राहक, गृह अथवा वाहन तू किसी पर भी टैक्स लगा, रीढ़ तो उसी की टूटेगी जिसकी टूटनी है. हर प्रकार का बजट हे...

Wednesday, February 01, 2017

बजट 2017 पेश करने का समय सिर पर आ गया है और शिक्षा व्यवस्था का क्षेत्र ऐसे कुछेक क्षेत्रों में शामिल है जिन पर वित्त मंत्री को तुरंत ध्यान देना चाहिए। हमारी सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल तहस-नहस हो चुकी है और उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रही। हम जब तक इसे दुरुस्त नहीं करेंगे, तब तक अच्छे दिन लाने की सरकार के तमाम कोशिशें बेकार साबित होंगी। 

वर्ष 2010 में ओईसीडी (ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) की रैंकिंग में पीसा (प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेन्ट्स एसेस्मेंट) के 73 सदस्य देशों में से भारत को 72वां स्थान दिया गया। इसकी प्रतिक्रिया के रूप में भारत ने बाद की रैंकिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन देश से भी बुरी खबर ही मिल रही है। वर्ष 2016 के लिए 18 जनवरी को जारी की गई एनुअल स्टेटस ऑफ एडुकेशन रिपोर्ट में पढ़ाई...

मुक्त बाज़ार और नैतिक चरित्र

Morality of Marketक्या मुक्त बाज़ार हमारी नैतिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है? जाने कुछ विशेषज्ञों की राय...

आज़ादी ब्लॉग

Thursday, February 02, 2017
चुनाव आ गए क्या..

Saturday, January 07, 2017
स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर...

Monday, December 26, 2016
- प्राइवेट अनएडेड स्कूलों ने प्रिंसिपल की नियुक्ति में सीबीएसई के हस्तक्षेप को बताया स्वायतता से खिलवाड़ - बजट प्राइवेट स्कूलों क...

Thursday, December 22, 2016
स्कूलों के लिए जरूरी है सरकारों से आजादी हाल में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश...

Tuesday, December 06, 2016
"संविधान एक अद्भुत मंदिर था जिसका निर्माण हमने देवताओं के रहने के लिए किया था लेकिन इससे पहले कि वे वहां स्थापित होते शैतानों ने उ...

Wednesday, November 30, 2016
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लाकर बच्चों की पहुंच स्कूल तक तो हो गई लेकिन शिक्षा तक उनकी पहुंच अब भी नहीं हो पायी है। आरटीई में...

Wednesday, November 30, 2016
हमारे आस पास तमाम ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जो अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाती लेकिन अक्सर समाज में बदलाव लाने में उनकी महत्वपूर्...

Tuesday, November 29, 2016
बीते दिनों केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 10वीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा को पुनः अनिवार्य बनाने पर अपनी सह...

आपका अभिमत

क्या आपको लगता है कि बजट 2017 में शिक्षा के मद में पर्याप्त बजट का प्रावधान किया गया है?

आज़ादी वी‌डियो

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के एक अहम प्रावधान 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को जारी रखने, समाप्त करने या फिर...

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