विशेष लेख

क्यों बातें बेहतर होने पर ज्यादा खराब लगने लगती हैं?

अर्थशास्त्र के पेशे में इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि आय असमानता को लेकर आम सोच दिशाहीन करने वाली है। साथ ही इस बात के भी पक्के प्रमाण हैं कि अब तक जिन रुझानों का अध्ययन किया गया है, वे वास्तविक असमानता में इजाफे को कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। विल (विलकिंसन) ने इस क्षेत्र में इनमें ज्यादा महत्वपूर्ण ताजा जानकारियों को संक्षेप में अच्छी तरह से पेश किया है। वह यह कह सकते थे कि जब घर बनाम व्यक्ति (लोग आजकल अकेले रहने के लिहाज

Published on 21 May 2010 - 14:01

उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ आंकड़ों के मुताबिक 1979 में  कर कटौती के बाद अमेरिकी निवासियों के शीर्ष एक फीसदी लोगों की औसत आय लगभग 340,000 डॉलर थी। 2006 तक यही आय बढ़कर 1,200,000 डॉलर तक पहुंच गई थी। इसकी तुलना में निचले 60 फीसदी घरों में औसत आय में 1979 के 29,000 डॉलर की तुलना में हल्का सा इजाफा होकर यह 35,000 डॉलर हो सकी। इस दौरान कुल कमाई के लिहाज से जहां शीर्ष एक फीसदी की आय 7 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी हो गई, वहीं निचले तीन स्तरों के लोगों की आय 36 फीसदी से गिरकर 28 फीसदी हो गई। यह आय असमानता में पर्याप्त बढ़ोत्तरी

Published on 13 May 2010 - 12:15

मैं विल विलकिनसन की इस बात से सहमत हूं कि अगर अलग से सोचा जाए तो समाज में आय का वितरण हमें इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता पाता कि समाज न्यायपूर्ण है या अन्यायपूर्ण। फिर भी एक समतावादी होने के नाते मैं सोचती हूं कि जब एक कारण के संदर्भ में सोचा जाता है तो धन और आय का काफी महत्व होता है। आर्थिक असमानता उस वक्त आपत्तिजनक हो जाती है जब यह लोगों, खासतौर पर कमजोर तबके को बेहतर हालात में रहने की स्थितियों के बावजूद बुरे हालात में रहने पर मजबूर करती है। यह उस वक्त भी आपत्तिजनक है जब साफ दिखाई देता है कि सरकार का झुकाव

Published on 7 May 2010 - 13:14

बराक ओबामा के चुनाव से पहले आय में असमानता एक गर्म मुद्दा था। इसका ज्यादातर श्रेय न्यूयॉर्क टाइम्स के दमदार स्तंभकार और अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार विजेता पॉल क्रुगमैन को जाना चाहिए। अमेरिका में आय में असामनता को लेकर उनकी चेतावनी भरी आक्रामक किताब द कांशंस ऑफ ए लिबरल ने इस विषय को जनता के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया, जो ओबामा के पद संभालने के बाद और मंदी के पैर जमा लेने के बाद काफी शांत हो गया था। क्रुगमैन का तर्क है कि आय में बढ़ते अंतर कारण ढांचागत समस्या नहीं मुख्य तौर पर राजनीतिक है। इस स्थिति में सुधार के

Published on 30 Apr 2010 - 17:46

डेविड श्मिट्ज और जेसन ब्रेनन के आलेख “आज़ादी की अवधारणाएं” पर फिलिप पेटिट की प्रतिक्रिया

इसैया बर्लिन (Isaiah Berlin) द्वारा प्रसिद्ध बना दिए गए शब्दों को इस्तेमाल करके और इसमें तोड़-मरोड़ की बात को भी स्वीकारते हुए जेसन ब्रेनन और डेविड श्मिट्ज, नकारात्मक और सकारात्मक आज़ादी के बीच अंतर के जिक्र के साथ अपनी बात शुरु करते हैं। आपके पास 'एक्स' काम करने की नकारात्मक आज़ादी होती है जब कोई आपका ऐसा करने में विरोध नहीं करता, भले ही विरोध चाहे जो हो; आपके पास 'एक्स' काम करने की सकारात्मक आज़ादी (या

Published on 23 Apr 2010 - 15:01

डेविड श्मिट्ज और जेसन ब्रेनन के आलेख “आज़ादी की अवधारणाएं” पर जॉन क्रिसमैन की प्रतिक्रिया

जेसन ब्रेनन और डेविड श्मिट्ज के बेहद रोचक निबंध के कई अंतर्निहित विचारों में से एक यह है कि नकारात्मक और सकारात्मक आज़ादी विचारों का एक समूह है न कि विभाजन। इसी तरह वे ध्यान दिलाते हैं कि, मेरी सोच से सही भी है, नागरिकों को दी जाने वाली आज़ादी के स्तर और प्रकार का फैसला केवल वैचारिक विश्लेषण से ही नहीं किया जा सकता, और (उन शब्दों में जिनका वो इस्तेमाल नहीं करते) आज़ादी एक ऐसा

Published on 16 Apr 2010 - 17:09

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