आस्था पर आघात...
आधुनिकता की दौड़ में सब लोग थोड़े-से दिमागी सुकून की दरकार रखते हैं। इसी के चलते तो अक्सर श्रद्धा, संस्कार और आस्था सरीखे धार्मिक और आध्यात्मिक चैनलों पर बाबाओं को प्रवचन देते हुए और लाखों की भीड़ को उन्हें ध्यान लगाकर सुनते हुए देखा जा सकता है। लेकिन अगर एक बाबा, जो आध्यात्मिक शक्ति से लैस होने की बात करता है और खुद के सभी दुनियावी मोह-माया से दूर होने का दावा करता है, उन्हें अगर सैक्स रैकेट में गिरफ्तार किया जाए तो इसे क्या कहेंगे?
दिल्ली में हाल में पुलिस ने शिवमूर्त उर्फ इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद महाराज को एक युवक और छह कॉलगर्ल के साथ देह व्यापार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आए दिन बाबाओं का जनता के सामने पर्दाफाश होने की घटनाओं ने काफी हद तक इस बात को सिद्ध कर दिया है कि धर्म और आस्था की आड़ में आम लोगों को ही बेवकूफ बनाया जा रहा है। काम-वासना पर विजय पाने का दावा यह बाबा करते हैं, यह उसमें कहीं ज्यादा लिप्त हैं, और उससे भी ज्यादा माया महाठगिनी के सबसे बड़े भक्त भी।
अक्सर यह भी कहा जाता है कि इन बाबाओं को अक्सर ऊँचे पदों पर बैठे अधिकारियों और नेताओं का प्रश्रय मिलता है. इस बात को साबित करना कानून के लिए हमेशा लगभग असंभव होता है. इन बाबाओं की करतूतें हमेशा समाज में एक अविश्वास का वातावरण पैदा कर देती हैं. ऐसे पाखंडियों के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही कम ही हो पाती है.
- क्या यह धर्म को लेकर मिली आज़ादी का दुरुपयोग है?
- ऐसे बाबाओं के बारे में आपकी क्या राय है?
- आपकी नजर में धार्मिक भावनाओं के खिलवाड़ के क्या कारण हैं?
- क्या सरकार को इन बाबाओं पर लगाम कसने के लिए ठोस कदम नहीं उठाने चाहिए?
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