स्कूल वाउचर: "छात्रों को फंड दें, स्कूलों को नहीं''

वर्षों से भारत ने स्कूली शिक्षा की गुणवता एवं दाखिला दिलाने में सुधार करने के लिए अनेकों तरीके अपनाने की कोशिश की है। जैसा कि प्रथम  का सर्वेक्षण यह बताता है कि हमारी आकांक्षाओं एवं हमारी वास्तिवक उपलब्धियों में भारी अंतराल है। इस प्रकिया में हमने स्कूली शिक्षा की दोहरी पद्धति का निर्माण किया हैं। जो निजी स्कूलों को शुल्क देने में सक्षम है वे निजी स्कूल जाते हैं और जो नहीं, वे सरकारी स्कूल। यह गहन शिक्षा के अवसर में असमानता का होना हमारी वर्तमान शिक्षा तक पहुंचने का परिणाम है। सरकार जिस तरह से गरीबों की शिक्षा पर खर्च करती है उसमें बदलाव लाने का एक उपकरण स्कूल वाउचर है। यह एक टिकट है जो सरकार द्वारा दी जाती है तथा जो छात्रों द्वारा चयनित स्कूल में पढने के लिए शिक्षा का पूरा या अंशत: खर्च की भरपाई करता है। स्कूल छात्रों से वाउचर जमा करते है, स्कूल उनको छात्रों के बैंक खाते में जमा कराता है और सरकारी खाते से समान रकम घटाते हुए बैंक स्कूल खाते में जमा करता है। किसी के हाथ मे नगद रुपये नहीं दिये जाते हैं। सिर्फ वाउचर ही छात्रों से स्कूल और फिर वापस सरकार तक गतिशील रहता है।

वर्तमान पद्धति के अनुसार स्कूल, सरकार के प्रति सीधे रूप से जिम्मेदार है। वाउचर पद्धति उनको छात्रों के प्रति सीधे रूप से जिम्मेदार बनाती है क्योंकि वे अपने शिक्षा शुल्क वाउचर के जरिये देते हैं। छात्र अगर स्कूल पसंद नही करता है तो वह वाउचर दूसरे स्कूल में ले जा सकता है। इस प्रकार वाउचर पद्धति के तहत पैसा छात्रों का अनुकरण करता है।

स्कूल वाउचर उपलब्ध कराता है:-

छात्रों का चयन: यह वाउचर गरीब छात्रों को सशक्त करता है ताकि वे अपनी इच्छा के स्कूल में जा सकें। अगर स्कूल उनकी उम्मीदें पर खरा उतरता है तो छात्रों को स्कूल बदलने की छूट है।

समानता के अवसर: यह योजना मूल मानव अधिकार की पुष्टि करती है कि सब बच्चों के साथ समान बर्ताव हो तथा उन्हें बिना उनकी धन दौलत, जाति या मजहब के नाम पर भेदभाव किए बिना शिक्षा का समान अवसर मिले।

स्कूलों के बीच प्रतियोगिता: भारत के वर्तमान निजी स्कूल सिर्फ पैसे वाले छात्रों के लिए स्पर्धा करते हैं। वाउचर से न केवल निजी स्कूल बल्कि सरकारी स्कूल भी गरीब या अमीर सारे छात्रों के लिए स्पर्धा करेंगे।

उपलब्धि आधारित भुगतान: स्कूल की आमदनी उनके स्कूल में पढ़नेवाले छात्रों की संख्या पर निर्भर करती है, दोनो ही तरह के स्कूल जो प्रत्यक्ष रूप से तथा वाउचर द्वारा भुगतान करते हैं। इस प्रकार स्कूलों को स्वत: प्रोत्साहन मिलता रहता है कि वे दाखिलों की संख्या में बढ़ोतरी एवं गुणवत्ता में विकास द्वारा छात्रों को अपने अधिकार में बनाए रखें।

जीतो विजय परिणाम: सरकारी स्कूल के छात्र जिनको वाउचर मिलता है वे स्कूल बदलने तथा अपने लिए बेहतर करने के योग्य हैं। तथ्यों से पता चलता है कि यहां वे छात्र भी जो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं बेहतर करते हैं। सर्वप्रथम छात्र शिक्षक अनुपात सुधरता है और दूसरा, अन्य स्कूल छात्रों की घटती संख्या को रोकने में और अधिक सावधान हो जाते हैं।

वाउचर पद्धति में स्कूल को फंड देने के बजाय, सरकार छात्रों को फंड देती है। परिणामित चयन और प्रतिस्पर्धा दोनों का एक साथ काम करना विश्वव्यापकता बढ़ाता, साथ ही साथ शिक्षा की गुणवता में सुधार प्रदान करता है।

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