गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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आईपीएल विरोध का अर्थ पूंजीवाद विरोध नहीं

आईपीएल छह हफ्तों तक चली नॉन स्टॉप पार्टी की तरह था। भारत के लाखों-करोड़ों लोगों के लिए आईपीएल की जादुई रातें रोजमर्रा की जिंदगी में राहत देने वाली थीं। सट्टा बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। ललित मोदी के आईपीएल कमिश्नर पद पर बने रहने के कयासों की कीमत बीते शनिवार ही एक के बदले साढ़े पांच रुपए थी।

बीटी बैंगन की दिल तोड़ने वाली कहानी

बीटी बैंगन की दिल तोड़ने वाली कहानी एक उद्यमी के जीवन की अनिश्चितताओं के साथ-साथ हर मोड़ पर पेश आने वाली त्रासदियों को प्रतिबिंबित करती है। यह सभी लोकतंत्रों के लिए ऐसा संस्थागत तं

बिजनेस की ही सामाजिक जिम्मेदारी क्यों?

हाल ही में दिल्ली में एक दोपहर भोज के दौरान गुलाबी साड़ी पहने एक महिला ने मुझे घेर लिया। वह मुझे कारपोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी पर धाराप्रवाह भाषण देने लगीं। मैंने अपने आप से पूछा कि आखिर क्यों कोई डॉक्टरों, वकीलों, पत्रकारों को सामाजिक जिम्मेदारी पर भाषण नहीं देता? बिजनेस के लोगों के खिलाफ ही यह आक्रोश क्यों? सही है कि भारत में आर्थिक सुधारों की सफलता के बाद पूंजीवाद के प्रति हमारा शत्रु भाव कुछ कम हुआ है। लोग यह तो मानते हैं कि बाजार व्यवस्था से समृद्धि आई है, लेकिन पूंजीवाद को नैतिक व्यवस्था वे अब भी नहीं मानते।

अनैतिक आचरण से बाजार को खतरा

महाभारत के अनुसार मनुष्य बुनियादी रूप से दोषयुक्त है और उसकी गलतियां संसार को विषम बनाती हैं। दुर्योधन उस विषमता का सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन अन्य लोग भी उसमें अपना खासा योगदान करते हैं। युधिष्ठिर जुए का प्रतिकार नहीं कर सकते, कर्ण समाज में अपनी प्रतिष्ठा की चिंता से ग्रस्त है, अश्वत्थामा की प्रकृति में प्रतिशोध की भावना है, धृतराष्ट्र के मन में अपने बड़े बेटे के ल

व्यवस्था बदलने के लिए दोहराना होगा कुरुक्षेत्र

रुचिका गिरहोत्रा की मौत व्यर्थ नहीं गई है। उसने नए और निश्चयी भारत की नैतिक कल्पनाओं को ऊर्जावान किया है और उस विश्वास का खंडन किया है कि हमारा मध्यम वर्ग पूरी तरह से आत्म

नैतिक तानेबाने में सेंधमारी का खामियाजा

इक्कीसवीं सदी के पहले दशक को दो रुझान परिभाषित करते हैं। एक, अच्छा रुझान और दूसरा, खराब रुझान। अच्छा रुझान यह है कि उच्च आर्थिक विकास दर के फलस्वरूप समृद्धि का फैलाव होने लगा है। दूसरा

बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं

बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं - Read complete article...

कोई सीमा तो हो बेलगाम वेतन की

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आतंकवाद के खिलाफ बातें कम काम ज्यादा

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पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार

पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार - Read complete article...