गुरचरण दास
इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।
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अनैतिक आचरण से बाजार को खतरा
फरवरी 2, 2010 - 16:59महाभारत के अनुसार मनुष्य बुनियादी रूप से दोषयुक्त है और उसकी गलतियां संसार को विषम बनाती हैं। दुर्योधन उस विषमता का सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन अन्य लोग भी उसमें अपना खासा योगदान करते हैं। युधिष्ठिर जुए का प्रतिकार नहीं कर सकते, कर्ण समाज में अपनी प्रतिष्ठा की चिंता से ग्रस्त है, अश्वत्थामा की प्रकृति में प्रतिशोध की भावना है, धृतराष्ट्र के मन में अपने बड़े बेटे के ल
व्यवस्था बदलने के लिए दोहराना होगा कुरुक्षेत्र
जनवरी 17, 2010 - 16:00
रुचिका गिरहोत्रा की मौत व्यर्थ नहीं गई है। उसने नए और निश्चयी भारत की नैतिक कल्पनाओं को ऊर्जावान किया है और उस विश्वास का खंडन किया है कि हमारा मध्यम वर्ग पूरी तरह से आत्म
नैतिक तानेबाने में सेंधमारी का खामियाजा
जनवरी 3, 2010 - 11:30
इक्कीसवीं सदी के पहले दशक को दो रुझान परिभाषित करते हैं। एक, अच्छा रुझान और दूसरा, खराब रुझान। अच्छा रुझान यह है कि उच्च आर्थिक विकास दर के फलस्वरूप समृद्धि का फैलाव होने लगा है। दूसरा
बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं
दिसम्बर 1, 2009 - 14:53- Login to post comments
कोई सीमा तो हो बेलगाम वेतन की
दिसम्बर 1, 2009 - 14:47- Login to post comments
आतंकवाद के खिलाफ बातें कम काम ज्यादा
सितंबर 29, 2009 - 14:54- Login to post comments
पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार
सितंबर 29, 2009 - 14:51- Login to post comments
गरीबों को सेहतमंद बनाएगा स्मार्ट कार्ड
सितंबर 29, 2009 - 14:48- Login to post comments
लोकतंत्र और पूंजीवाद ही होंगे हमारे तारणहार
सितंबर 29, 2009 - 14:42- Login to post comments
सिंगूर की त्रासदी में सभी की पराजय
सितंबर 29, 2009 - 14:39- Login to post comments
