गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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अनैतिक आचरण से बाजार को खतरा

महाभारत के अनुसार मनुष्य बुनियादी रूप से दोषयुक्त है और उसकी गलतियां संसार को विषम बनाती हैं। दुर्योधन उस विषमता का सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन अन्य लोग भी उसमें अपना खासा योगदान करते हैं। युधिष्ठिर जुए का प्रतिकार नहीं कर सकते, कर्ण समाज में अपनी प्रतिष्ठा की चिंता से ग्रस्त है, अश्वत्थामा की प्रकृति में प्रतिशोध की भावना है, धृतराष्ट्र के मन में अपने बड़े बेटे के ल

व्यवस्था बदलने के लिए दोहराना होगा कुरुक्षेत्र

रुचिका गिरहोत्रा की मौत व्यर्थ नहीं गई है। उसने नए और निश्चयी भारत की नैतिक कल्पनाओं को ऊर्जावान किया है और उस विश्वास का खंडन किया है कि हमारा मध्यम वर्ग पूरी तरह से आत्म

नैतिक तानेबाने में सेंधमारी का खामियाजा

इक्कीसवीं सदी के पहले दशक को दो रुझान परिभाषित करते हैं। एक, अच्छा रुझान और दूसरा, खराब रुझान। अच्छा रुझान यह है कि उच्च आर्थिक विकास दर के फलस्वरूप समृद्धि का फैलाव होने लगा है। दूसरा

बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं

बातें ही नही, सख्त कदम भी उठाऎं - Read complete article...

कोई सीमा तो हो बेलगाम वेतन की

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आतंकवाद के खिलाफ बातें कम काम ज्यादा

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पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार

पुस्तकालयों को भी थामेगा बाजार - Read complete article...

गरीबों को सेहतमंद बनाएगा स्मार्ट कार्ड

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लोकतंत्र और पूंजीवाद ही होंगे हमारे तारणहार

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सिंगूर की त्रासदी में सभी की पराजय

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