विशेष लेख

मशहूर लेखिका और बुकर प्राइज़ विजेता अरुंधती रॉय का हाल ही में श्रीनगर में कश्मीर के ऊपर दिया हुआ बयान काफी विवादस्पद साबित हुआ. नाराज़ लोगों नें उन्हें देशद्रोह के अपराध में दण्डित करने की पुरजोर वकालत की. अरुंधती का विवादों में पड़ना कोई नयी बात नहीं है. देश से जुडे कई संवेदनशील मुद्दों पर अपने क्रन्तिकारी विचारों को प्रगट कर वो पहले भी घेरे में आ चुकी हैं.

ताज़ा विवाद में उन्होंने श्रीनगर में आयोजित कश्मीर की आज़ादी सम्बन्धी एक सेमिनार में कहा कि "कश्मीर

Published on 15 Nov 2010 - 16:23

‘किलर लाइन’ के नाम से कुख्यात ब्लू लाइन बसों का दिल्ली की सड़कों से हटाया जाना एक संवेदनशील मुद्दा है जिस पर अलग अलग किस्म की राय व्यक्त की जा रही हैं. जहां कई यह मानते हैं कि सैंकड़ों जानें ले चुकी इन बसों का दिल्ली की सड़कों से चले जाना ही अच्छा है, एक ऐसा वर्ग ये भी समझता है कि तेज़ रफ़्तार और समय से चलने वाली ब्लू लाइन बसें दिल्ली की लाइफ लाइन थीं और उन का चला जाना एक नुकसान है.

पर यहाँ हमें सार्वजनिक नीति के दोषों के बारे में भी सोचना चाहिए जिन की वजह से शहर में पब्लिक

Published on 8 Nov 2010 - 18:35

आजादी पत्रकारिता पुरस्कारः एक परिचय

आजादी पत्रकारिता पुरस्कार, हिंदी संचार माध्यमों (प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक/रेडियो) में कार्यरत (पूर्णकालीन/अंशकालीन) अथवा किसी प्रकार (लेख/स्तंभ लेखन आदि) से जुड़े उदारवादी विचारधारा के समर्थक पत्रकारों को प्रदान किया जाने वाला पुरस्कार है, जो अपने रिपोर्ट, लेख या स्तंभ के माध्यम से उदारवादी विचारधारा का प्रचार प्रसा

Published on 20 Sep 2010 - 19:37

'आज़ादी समर्थक अभियान' की पैट्री फ्रीडमैन द्वारा की गई आलोचना मूलतः सही है। कम से कम तीस साल हो गए जबकि शैक्षिक अर्थशास्त्र में मुक्त-बाजार के विचार का वर्चस्व रहा है। आज़ादी समर्थक विचारकों के पास पर्याप्त धन है और प्रभाव भी। इन तमाम प्रोत्साहक घटनाओं के बाद भी सरकार का कुल आकार बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका में दोनों ही राष्ट्रीय दल, वाकई शब्दों में न सही काम के लिहाज से तो सरकार के आकार को बढ़ाने और आज़ादी को कम करने के ही काम के प्रति समर्पित हैं। सही विचार और उनके प्रभावी तरीके से प्रचार ने राजनीति में

Published on 11 Jun 2010 - 15:47

पैट्री के तर्कों में निजी विचारों की खासी झलक है। मैं उनके लक्ष्य को साझा करता हूं, उनकी एक ज्यादा मुक्त समाज में रहने की कोशिश को भी। वे जिसे 'लोक अभियान (folk activism)' कहते हैं और जिसे निश्चित तौर पर उम्मीदहीन बताकर खारिज करते हैं-उसे मैं अपनाता हूं। मेरे पूरे पेशेवर कैरियर में मैंने पत्रकारिता की है, इसमें अधिकांश हिस्सा परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर आज़ादी का ही संदेश लिए रहा है।

पैट्री की ही तरह मैं भी कुछ छोटे समुदाय बनाने के तात्कालिक प्रयास करता रहा हूं। ऐसे समुदाय

Published on 4 Jun 2010 - 18:21

भूमिकाः भविष्य के एक नाटकीय आदर्शलोक या थोड़ी सी आज़ादी हासिल करने की बजाय वास्तविक तौर पर मुक्त समाज में रहना मेरी दिली तमन्ना है। मैं इस खयाली पुलाव के साथ आज़ादी की वकालत करता रहा कि महज इससे ही यह संभव हो जाएगा। हालांकि, हाल ही में मैंने मुक्त समाज बनाने को अपना पूर्णकालिक काम बना लिया है और इससे मुझे अपने आरामकुर्सी में बैठकर हासिल दर्शन की बनिस्बत एक नया नाटकीय नजरिया मिला है। मेरा नया नजरिया यह है कि कई आज़ादी के समर्थकों, समूहों और थिंक टैंकों (और दुखद तौर पर कई बार मुझे मिलाकर) का समर्थन का रास्ता कुछ

Published on 28 May 2010 - 13:46

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