विशेष लेख

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को दी गई अनुमति देर से उठाया गया एक सही कदम है। पिछले दस वर्षो से यह उम्मीद की जा रही थी कि सरकार खुदरा क्षेत्र में भी उदारीकरण की नीतियों को लागू करे, क्योंकि दूसरे देशों की तुलना में हमारा रिटेल सेक्टर काफी पिछड़ा हुआ और असंगठित था। अब जबकि औद्योगिक विकास दर धीमी पड़ रही है और महंगाई पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है तो नए रोजगारों के सृजन की संभावना धीमी पड़ रही थी।

ऐसे में यह आवश्यक था कि सरकार तत्काल बड़े आर्थिक

Published on 9 Dec 2011 - 13:28

पिछले लगभग एक साल के अंतराल में देश में हुए दो बड़े खेल आयोजनों में भारत की दो अलग-अलग तस्वीरें नजर आईं। गत वर्ष अक्टूबर में हुए कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन पुराने भारत के नेता-बाबू गठबंधन द्वारा किया गया था। फॉर्मूला वन ग्रांप्री का आयोजन नए भारत द्वारा स्थानीय निजी उद्यमियों और वैश्विक व्यवसाय के सहर्ष संयोग से किया गया।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन के बारे में आम धारणा है कि उसने देश की छवि पर बट्टा लगाया। दूसरी तरफ फॉर्मूला वन के आयोजन को इस तरह देखा जा रहा है कि उसने

Published on 28 Nov 2011 - 13:45

देश के निजी क्षेत्र और उसके मजबूत नागरिक समाज की चाहे जो भी उपलब्धियां रही हों लेकिन इस बात में कहीं कोई संदेह नहीं है कि अगर भारतीय राज्य की स्पष्ट दिखाई दे रही गड़बडिय़ों में सुधार नहीं लाया गया तो देश बहुत आगे तक नहीं जा पाएगा। भारतीय राज्य की जिन प्रमुख कमियों पर ध्यान केंद्रित है वे हैं भ्रष्टाचार का बढ़ता स्तर और देश के सार्वजनिक जीवन बढ़ता बिकाऊपन। निश्चित रूप से इन चीजों पर इस तरह ध्यान दिया जाना आवश्यक है लेकिन इसकी उतनी ही महत्त्वपूर्ण सीमा है भारतीय राज्य की क्षमताओं में कमी का दिखना। यह एक ऐसा मसला है जिस पर

Published on 22 Nov 2011 - 17:53

चिराग तले अंधेरा देखना हो तो मेवात पधारिए। देश की राजधानी की नाक तले और गुड़गांव की अति आधुनिक इमारतों के बगल में स्थित मेवात का इलाका इंडिया और भारत के बीच खाई की जीती-जागती मिसाल है। देश के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद इसी मुस्लिम बाहुल्य इलाके से सांसद चुने गए थे।

लेकिन सच्चर कमेटी ने पाया कि पूरे देश में इसी इलाके के मुस्लिम शिक्षा के लिहाज से सबसे वंचित हैं। सन् 2001 में महिलाओं में साक्षरता महज 20 फीसदी थी, गांव की मेव महिलाओं में तो पांच फीसद भी नहीं। ग्यारह लाख की आबादी वाले जिले में

Published on 15 Nov 2011 - 15:38

नई दिल्ली- सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा जारी सालाना वार्षिक रिपोर्ट “इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्ड 2011’’ में भारत 94वें पायदान पर है। बीते साल वह 90वें स्थान पर था। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष पार्थ शाह ने कहा, “बीते साल के मुकाबले भारत की रैंकिंग में गिरावट निराशाजनक है। आर्थिक आजादी बढ़ने के बजाय घटी है। व्यापक भ्रष्टाचार और लाइसेंस राज की परेशानियों ने भारतीयों के लिए बेहतर और अपनी क्षमताओं के साथ जीवन-यापन को बेहद मुश्किल बना दिया है।’’

कुल मिलाकर

Published on 8 Nov 2011 - 17:27

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने कुछ समय पहले जारी अपनी रिपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर केन्द्रित किया है। इस हिस्से में बेशक स्कूलों में बच्चों का नामांकन और उपस्थिति बढ़ने के लिए भारत की पीठ थपथपाई गई है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि देश में छात्रों को औसत दर्जे की शिक्षा और कौशल प्रदान किया जा रहा है। इसमें पढ़ना और लिखना भी शामिल है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों से नीचे है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेशक भारत में आने वाले सालों में शिक्षित श्रमजीवी वर्ग की तादाद में इज़ाफा

Published on 26 Sep 2011 - 13:14

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