24 जनवरी: राष्ट्रीय बालिका दिवस

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भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। जिकसा उद्देश्य देश का नाम रौशन कर रही बेटियों को सम्मान देना है। देश की बेटियों की आज लगभग हर क्षेत्र में भागिदारी है। बेटियां अपने कौशल, प्रतिभा, साहस और ज्ञान का लोहा हर क्षेत्र में मनवा रही है। लेकिन इसको भी कोई नहीं झुठला सकता कि अभी भी हमारे समाज में ऐसे भी लोग है जो बेटियों को कोख में ही मार दिया करते हैं। बेटियों का जन्म उनके लिए भार है। तमाम रोक और प्रतिबंध के बावजूद गर्भ का लिंग परिक्षण, बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी कुप्रथाएं अभी भी हमारे समाज का हिस्सा है।

भारत की आजादी से पहले और बाद से ही बेटियों और बेटों में भेदभाव, बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ भारत सरकार और विभन्न प्रदेशों की सरकारें प्रयासरत है। बेटियों को देश की प्रथम पायदान पर लाने के लिए कई योजनाएं और कानून लागू किए गए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई।

देश की बेटियों को सशक्त बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने वाले इस खास दिन को मनाने की भी खास वजह है। यह वजह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी हुई है। चलिए जानते हैं कब और क्यों हुई राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत? 24 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है बालिका दिवस? राष्ट्रीय बालिका दिवस का इंदिरा गांधी से क्या है नाता?

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस – National Girl Child Day in Hindi

कब हुई राष्ट्रीय बालिका की शुरआत?
हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2009 से हुई। महिला बाल विकास मंत्रालय ने पहली बार साल 24 जनवरी 2009 को देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया।

24 जनवरी को क्यों होता है बालिका दिवस?
प्रति वर्ष 24 जनवरी को बालिका दिवस के तौर पर मनाने की वजह खास है। यह वजह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से जुड़ी हुई है। साल 1966 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। भारत के इतिहास और महिलाओं के सशक्तिकरण में इसी वजह से 24 जनवरी का दिन इतना महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य?
यह दिन मनाने का उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। समाज में बालिकाओं के साथ होने वाले भेदभाव के बारे में देश की बेटियों के साथ ही सभी लोगों को जागरूक करना है। इस दिन हर साल राज्य सरकारें अपने अपने प्रदेश में जागरूक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।  जिनका प्रमुख मकसद निम्नलिखित है।

- समाज में बालिकाओं को नए अवसर प्रदान करने के लिए लोगों की चेतना बढ़ाना

- बालिकाओं के सामने आने वाली सभी असमानताओं को दूर करना

- बालिकाओं को देश में सभी मानवाधिकार, सम्मान और मूल्य सुनिश्चित करना

- लोगों को शिक्षित कर लैंगिक भेदभाव के बारे में जागरुक करना

- भारत में घटते बाल लिंगानुपात के खिलाफ काम करने के लिए और एक लड़की के रूप में लड़की के बारे में लोगों की सोच को बदलने के लिए

- बालिकाओं के महत्व और भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना

- लड़की को अवसर प्रदान करना और उनकी बेहतरी के लिए अधिकार प्रदान करना

- लोगों को लड़की के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में शिक्षित करना

- समान अधिकार प्रदान करने और उन्हें देश के किसी भी हिस्से में स्थानांतरित करने की अनुमति

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2022 की थीम :
हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम अलग होती है। बालिका दिवस साल 2021 की थीम 'डिजिटल पीढ़ी, हमारी पीढ़ी' थी। साल 2020 में बालिका दिवस की थीम 'मेरी आवाज, हमारा समान भविष्य' थी। साल 2022 बालिका दिवस की थीम की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है।

आप सभी को राष्ट्रीय बालिका दिवस की बधाई!

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ऊपर व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और ये आवश्यक रूप से आजादी.मी के विचारों को परिलक्षित नहीं करते हैं।

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