India

दशकों तक भारत में अर्थशास्त्र का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरुआत 'गरीबी के दोषपू्र्ण चक्र' नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (biography) का इतिहास 'गरीबी से अमीरी का सफर' करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है। हांगकांग और अमेरिका गरीब अप्रवासियों (immi

देश 67वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जी जान से जुटा हुआ है। यह वह मौका है जब हम दुनिया को अपनी ताकत, विभिन्नता में एकता और आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक प्रचुरता आदि से अवगत कराते हैं। हम यह प्रदर्शित करते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से देश व देशवासियों ने क्या क्या अर्जित किए हैं। निसंदेह आजादी के बाद से देश ने काफी प्रगति की है और दुनियाभर में अपनी मेधा और फौजी ताकत से काफी सम्मान बटोरा है। लेकिन कुछ प्रश्न अब भी उतने ही प्रासंगिक हैं जो छह दशक पहले थे। 10 अगस्त 2003 को अंग्रेजी दैनिक 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' में स्वामीनाथन एस.

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

एक दूसरे के पड़ोसी होते हुए भी भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार काफी सिमटा रहा है। कुछ समय पहले तक दक्षिण एशिया में श्रीलंका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में अब बांग्लादेश उससे थोड़ा आगे निकल गया है। पाकिस्तान इन दोनों से पीछे है। इसकी वजह भारत से उसके रिश्तों में आते रहे उतार-चढ़ाव के अलावा कारोबार के लिए ढांचागत सुविधाओं की कमी भी है। दोनों के बीच बहुत सारा व्यापारिक लेन-देन तीसरे देश के जरिए होता रहा है, जो कि दोनों के हित में नहीं है। देर से ही सही, अब आपसी व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने की कोशिश चल रही है।

केवल भारतीयों के बीच ही नहीं, पूरे विश्व में इस बात के खूब हल्ले है कि भारत एक महाशक्ति बन रहा है। हर दिन पाश्चात्य मीडिया में कोई न कोई खबर दिखाई पड़ती है, जिसमें भारत को भविष्य की महाशक्ति के रूप में दर्शाया जाता है। जाहिर है, ये बातें एक ऐसे देश को मीठी ही लगेंगी जिसे बीसवीं सदी में हताश राष्ट्र बताया जाता था। इस हताशा का मुख्य कारण हमारा खराब आर्थिक प्रदर्शन था, किंतु सुधारों की वजह से अब भारत की अवस्था बदल गई है और आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

Author: 
गुरचरण दास