Liberalisation

केवल भारतीयों के बीच ही नहीं, पूरे विश्व में इस बात के खूब हल्ले है कि भारत एक महाशक्ति बन रहा है। हर दिन पाश्चात्य मीडिया में कोई न कोई खबर दिखाई पड़ती है, जिसमें भारत को भविष्य की महाशक्ति के रूप में दर्शाया जाता है। जाहिर है, ये बातें एक ऐसे देश को मीठी ही लगेंगी जिसे बीसवीं सदी में हताश राष्ट्र बताया जाता था। इस हताशा का मुख्य कारण हमारा खराब आर्थिक प्रदर्शन था, किंतु सुधारों की वजह से अब भारत की अवस्था बदल गई है और आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

Author: 
गुरचरण दास

मुझे इस बात की खुशी है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम लोगों में बहस हो रही है। मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार की स्थिति को और अच्छी तरह से समझने के लिए मैंने तीन स्मॉल और मिडकैप कम्पनियों के प्रमुखों के साथ भोजन के दौरान चर्चा की।

उनकी फौरी प्रतिक्रिया यही थी कि हालात तेजी से बिगड़े हैं। ज्यादा गहराई से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या काफी बढ़ गई है। एक कारोबारी ने कहा कि निचले स्तर के इंस्पेक्टर्स और अधिकारियों से काम करवाने में इतनी ज्यादा अड़चनें आ रहीं थीं और इतनी खीझ हो रही थी कि उन्होंने अपना मुख्य उद्योग ही बेच डाला। तीनों ने हालांकि यह माना कि निचले स्तर का भ्रष्टाचार इतना ज्यादा नहीं है कि आप अपना कारोबार फायदे के साथ न चला सकें, लेकिन यह हर दिन बढ़ने वाला सिरदर्द जरूर बन गया है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

मौजूद समय में हम आसानी से कह सकते हैं कि भारत और चीन विश्व आर्थिक जगत की महाशक्तियां बन गयी हैं. व्यापार जगत में दुनिया को पछाड़ना इतना आसान नहीं था, खासकर उन ऐसे दो देशों के लिए जो कई साल तक गुलामी की बेड़ियों से जकड़े हुए थे. परन्तु दोनों देशों ने अपने अतीत से सीख लेकर अपना भविष्य सुदृढ़ बनाया.