Food Grain

आदिवासी इलाकों में स्थित राशन दुकानों में खराब खाद्यान्न दिए जाने का आरोप लगाते हुए वामपंथी दल सीपीएम ने इसकी जांच विशेष निगरानी एजेंसी से कराए जाने और गोदामों में पड़ा खाद्यान्न गरीबों में वितरित किए जाने की मांग की है। बता दें कि करीब सात महीने पहले अगस्त 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने खाद्यान्न के कुप्रबंधन पर केंद्र सरकार को लताड़ पिलाई थी और कहा था कि बरबाद हो रहा अनाज मुफ्त में गरीबों को बांट दिया जाना चाहिए।

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सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त. इंडिया शाइनिंग के इस दौर में सरकार को हजारों करोड़ रुपये का अनाज सड़ा देना मंजूर है. नहीं मंजूर है तो 8 करोड़ से ज्यादा लोगों की भूख को मिटाने के वास्ते उस सड़ते हुए अनाज में से गरीबों के लिए थोड़ा-सा हिस्सा बांटना.

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