'आज़ादी समर्थक अभियान' की पैट्री फ्रीडमैन द्वारा की गई आलोचना मूलतः सही है। कम से कम तीस साल हो गए जबकि शैक्षिक अर्थशास्त्र में मुक्त-बाजार के विचार का वर्चस्व रहा है। आज़ादी समर्थक विचारकों के पास पर्याप्त धन है और प्रभाव भी। इन तमाम प्रोत्साहक घटनाओं के बाद भी सरकार का कुल आकार बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका में दोनों ही राष्ट्रीय दल, वाकई शब्दों में न सही काम के लिहाज से तो सरकार के आकार को बढ़ाने और आज़ादी को कम करने के ही काम के प्रति समर्पित हैं। सही विचार और उनके प्रभावी तरीके से प्रचार ने राजनीति में पर्याप्त बेहतर परिवर्तन नहीं किए हैं। हमें विचार और उनका

पैट्री के तर्कों में निजी विचारों की खासी झलक है। मैं उनके लक्ष्य को साझा करता हूं, उनकी एक ज्यादा मुक्त समाज में रहने की कोशिश को भी। वे जिसे 'लोक अभियान (folk activism)' कहते हैं और जिसे निश्चित तौर पर उम्मीदहीन बताकर खारिज करते हैं-उसे मैं अपनाता हूं। मेरे पूरे पेशेवर कैरियर में मैंने पत्रकारिता की है, इसमें अधिकांश हिस्सा परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर आज़ादी का ही संदेश लिए रहा है।

भूमिकाः भविष्य के एक नाटकीय आदर्शलोक या थोड़ी सी आज़ादी हासिल करने की बजाय वास्तविक तौर पर मुक्त समाज में रहना मेरी दिली तमन्ना है। मैं इस खयाली पुलाव के साथ आज़ादी की वकालत करता रहा कि महज इससे ही यह संभव हो जाएगा। हालांकि, हाल ही में मैंने मुक्त समाज बनाने को अपना पूर्णकालिक काम बना लिया है और इससे मुझे अपने आरामकुर्सी में बैठकर हासिल दर्शन की बनिस्बत एक नया नाटकीय नजरिया मिला है। मेरा नया नजरिया यह है कि कई आज़ादी के समर्थकों, समूहों और थिंक टैंकों (और दुखद तौर पर कई बार मुझे मिलाकर) का समर्थन का रास्ता कुछ और नहीं बस समय की बर्बादी है।

उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ आंकड़ों के मुताबिक 1979 में  कर कटौती के बाद अमेरिकी निवासियों के शीर्ष एक फीसदी लोगों की औसत आय लगभग 340,000 डॉलर थी। 2006 तक यही आय बढ़कर 1,200,000 डॉलर तक पहुंच गई थी। इसकी तुलना में निचले 60 फीसदी घरों में औसत आय में 1979 के 29,000 डॉलर की तुलना में हल्का सा इजाफा होकर यह 35,000 डॉलर हो सकी। इस दौरान कुल कमाई के लिहाज से जहां शीर्ष एक फीसदी की आय 7 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी हो गई, वहीं निचले तीन स्तरों के लोगों की आय 36 फीसदी से गिरकर 28 फीसदी हो गई। यह आय असमानता में पर्याप्त बढ़ोत्तरी है। बहुत कम ही सामाजिक वैज्ञानिक इस हकीकत से इनकार

मैं विल विलकिनसन की इस बात से सहमत हूं कि अगर अलग से सोचा जाए तो समाज में आय का वितरण हमें इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता पाता कि समाज न्यायपूर्ण है या अन्यायपूर्ण। फिर भी एक समतावादी होने के नाते मैं सोचती हूं कि जब एक कारण के संदर्भ में सोचा जाता है तो धन और आय का काफी महत्व होता है। आर्थिक असमानता उस वक्त आपत्तिजनक हो जाती है जब यह लोगों, खासतौर पर कमजोर तबके को बेहतर हालात में रहने की स्थितियों के बावजूद बुरे हालात में रहने पर मजबूर करती है। यह उस वक्त भी आपत्तिजनक है जब साफ दिखाई देता है कि सरकार का झुकाव भी बेहतर तबके की ओर ही है। अमेरिका में तो आर्थिक अस

बराक ओबामा के चुनाव से पहले आय में असमानता एक गर्म मुद्दा था। इसका ज्यादातर श्रेय न्यूयॉर्क टाइम्स के दमदार स्तंभकार और अर्थशास्त्र के नोबल पुरस्कार विजेता पॉल क्रुगमैन को जाना चाहिए। अमेरिका में आय में असामनता को लेकर उनकी चेतावनी भरी आक्रामक किताब द कांशंस ऑफ ए लिबरल ने इस विषय को जनता के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया, जो ओबामा के पद संभालने के बाद और मंदी के पैर जमा लेने के बाद काफी शांत हो गया था। क्रुगमैन का तर्क है कि आय में बढ़ते अंतर कारण ढांचागत समस्या नहीं मुख्य तौर पर राजनीतिक है। इस स्थिति में सुधार के लिए राजनीतिक खासतौर पर पुनर्वितरण से जुड़े कदम की ज

डेविड श्मिट्ज और जेसन ब्रेनन के आलेख “आज़ादी की अवधारणाएं” पर फिलिप पेटिट की प्रतिक्रिया

डेविड श्मिट्ज और जेसन ब्रेनन के आलेख “आज़ादी की अवधारणाएं” पर जॉन क्रिसमैन की प्रतिक्रिया

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