विकीलीक्स का झटका

खुलासों की दुनिया में सबसे मशहूर नाम विकीलीक्स ने फिर कुछ सनसनीखेज दस्तावेज़ जारी कर के अमेरिका, पाकिस्तान सहित और देशों की नींद उदा दी है. हालिया खुलासों में, विकीलीक्स ने विभिन्न देशों के साथ हुए अमेरिका के राजनयिक पत्राचार और विदेश विभाग द्वारा विदेशी राजनयिकों पर नजर रखने के निर्देशों से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया है। जारी हुए करीब  2 लाख 50 हजार दस्तावेजों में विकीलीक्स ने बहुत सारी पोलें खोली हैं जिसकी वजह से इस वेबसाइट के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की जा रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने इंटरनेट साइट विकीलीक्स द्वारा अमेरिकी विदेश विभाग के गोपनीय दस्तावेजों को जारी करने से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक विशेष समिति गठित की है.

खुलासों से पता चला है कि सऊदी अरब के शाह ने अमेरिका से ईरान पर हमला करने का अनुरोध किया था और उनके परमाणु कार्यक्रमों को खत्म करने की अपील की थी और अमेरिका व ब्रिटेन आतंकवादियों से बचाने के नाम पर पाकिस्तान के लैब्स में मौजूद संवर्धित यूरेनियम को पाकिस्तान से बाहर ले जाने के लिए वहां की सरकार पर पिछले तीन साल से लगातार दबाव डालते आए हैं. विकीलीक्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों की नजर में 26/11 के बाद पाकिस्तान भारत द्वारा जवाबी हमला होने की नौबत आने पर परमाणु हथियार उठाने के लिए भी तैयार था। इसी तरह के और भी कई राज़ दस्तावेज़ो मे सामने आये है. विकिलीक्स ने पहले भी कई खुलासे किए हैं लेकिन अमेरिकी दूतावास के खुफिया दस्तावेजों के इस खुलासे को कूटनीति की दुनिया का नाइन इलेवन करार दिया जा रहा है. और अब तो विकिलीक्स चंद दिनों में ही 40 लाख पन्नों का राज़ फाश करनेवाला है.

क्या विकीलीक्स द्वारा जारी किए गए गोपनीय दस्तावेजों को हम निर्भीक पत्रकारिता का एक प्रतीक मानें. देखा जाये तो विकीलीक्स एक व्हिसेलब्लोवर वेबसाइट है जो अमेरिका जैसी ताकत का सच दुनिया के सामने रख रही है. राजनयिक और विदेश नीति के मामलों में गोल गोल बातों के पीछे का रहस्य दुनिया के सामने आ रहा है. दुनिया की सबसे ताकतवर सरकारों के बारे मे नकरात्मक जानकारी निकालना एक खतरनाक कदम है और विकीलीक्स की दाद देनी पड़ेगी कि बिना ज्यादा पैसा और रसूख के उसने ये साहसी कृत्य कर दिखाया. जूलियन असांज विकीलीक्स के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ हैं. वे आस्ट्रेलियाई इंटरनेट कार्यकर्ता हैं. जूलियन के बारे में माना जाता है कि वे कंप्यूटरों से गोपनीय जानकारियां उड़ाने में माहिर हैं. उनका का कहना है कि वे दुनिया में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए ऐसा करते हैं.

सन 2006 में लांच हुई विकीलीक्स कुछ महीने पहले तब चर्चा में आई जब उसने अफ़ग़ान वॉर डायरी के नाम से 90 हज़ार अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ सार्वजनिक किए. इनमें अमरीका के सैन्य अभियानों और अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान में गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी थी. विकीलीक्स ने अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ों के आधार पर सार्वजनिक किया कि पाकिस्तान अफ़गानिस्तान में तालेबान चरमपंथियों को सहयोग देता रहा है.

विकीलीक्स एक अंतरराष्ट्रीय गैर लाभकारी मीडिया संगठन है जो संवेदनशील दस्तावेज प्रकाशित करती है पर वे किस सूत्र से प्राप्त हुए हैं, यह गुप्त रखा जाता है। यह दस्तावेज किसी देश की सरकार, कंपनी, संस्था या किसी धार्मिक संगठन के भी हो सकते हैं.

लेकिन विरोधियों की मानें तो असांज को ना सिर्फ गिरफ्तार करना चाहिए बल्कि मौत के घाट उतार देना चाहिए. कनाडा के प्रधानमंत्री के सलाहकार टॉम फ्लेनेगन ने  कहा है कि असांज की हत्या कर दी जानी चाहिए. उनका कहना है कि राष्ट्रपति ओबामा को शायद ड्रोन का या किसी और चीज़ का इस्तेमाल कर के असांज से छुटकारा पा लेना चाहिए. फ्लेनेगन का कहना था कि ऐसे दस्तावेज़ लीक नहीं होने चाहिए थे और सऊदी अरब व ईरान से संबंधित दस्तावेज़ों के ख़ुलासे की वजह से युद्ध भी छिड़ सकता है. स्वीडन में बलात्कार और यौन उत्पीड़न मामले में इंटरपोल के वांछित मुजरिम असांज के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है. जिसके बाद से दुनिया भर के देशों की सतर्क पुलिस असांज की खोज में जुटी है. चीन की सरकार ने तो फौरी कार्यवाही करते हुए अपने देश में विकीलीक्स पर बैन लगा दिया है और कहा है कि इन संवेदनशील दस्तावेजों को जारी कर वो अमेरिका के साथ अपने सम्बन्ध खराब नहीं करना चाहते.

पर असांज का अपराध आखिर है क्या या फिर उन्हे सिर्फ सच बोलने कि कीमत चुकानी ही पड़ेगी?

- स्निग्धा द्विवेदी