‘निसा’ के राष्ट्रीय संयोजक आर.सी. जैन से आरटीई पर अविनाश चंद्र का साक्षात्कार

केंद्र सरकार द्वारा वंचित व कमजोर वर्ग को गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित कराने के लिए लागू किया गया शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून स्वयं ही सर्वशिक्षा अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित होता प्रतीत हो रहा है। कानून में समाहित कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे देशभर के लाखों निजी (बजट) प्राइवेट स्कूल बंद होने की कगार पर पहूंच गए हैं। अकेले दिल्ली में ही 13 हजार से ज्यादा स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों नौनिहालों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है। दुष्परिणामों से भरे आरटीई के इन्हीं प्रावधानों के खिलाफ आवाज उठाने के उद्देश्य से देशभर के 6 हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशनों के महागठबंधन के तौर पर उभरा नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन (निसा) आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। स्थापना के एक वर्ष से भी कम समय के भीतर ही आठ राज्यों के 12 हजार से अधिक प्राइवेट बजट स्कूलों को अपने अभियान में शामिल कर निसा ने अपने लक्ष्य की ओर मजबूत कदम बढ़ाए हैं। प्रस्तुत है ‘निसा’ के राष्ट्रीय संयोजक आर.सी. जैन से उक्त मसलों पर अविनाश चंद्र से बातचीत के मुख्य अंशः

शिक्षा का अधिकार
आरटीई

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