सरकारी नीतियों के कारण स्कूल का बंद होना बड़ी असफलताः आनंद पांडेय

 

छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व कम्यूनिस्ट विचारधारा से अत्यंत प्रभावित होने के कारण लाल दुर्ग के रूप में मशहूर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से पीएचडी होने के बावजूद डॉ. आनंद पांडेय का मानना है कि देश की आर्थिक प्रगति उदारवाद के रास्ते पर चल कर ही हो सकती है। डॉ. पांडेय स्कूली शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट स्कूलों की जरूरत जैसे मुद्दे पर सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) की राय से इत्तेफाक रखते हुए मानते हैं कि अशिक्षा को दूर करने के काम में इन बजट स्कूलों का बड़ा योगदान है। उनका मानना है कि बजट स्कूल शिक्षा का अधिकार कानून की पूर्ति में बड़ी भूमिका अदा करते हैं। उनका कहना है कि स्कूलों की गुणवत्ता का आंकलन शिक्षा के स्तर के आधार पर किया जाना चाहिए ना कि स्कूल भवन व खेल परिसर की उपलब्धता के आधार पर।

आजादी.मी के एसोसिएट एडिटर अविनाश चंद्र से बात चीत के दौरान डॉ. आनंद पांडेय ने कहा है कि सरकारी नीतियों के कारण यदि स्कूल बंद होते हैं तो यह स्थति शिक्षा के अधिकार के सरकारी प्रयासों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं। डॉ. पांडेय के मुताबिक स्कूल का स्तर केवल भवन अथवा खेस परिसर से आंका जाना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक यदि स्कूल एक पेड़ के नीचे ही चलता है और वहां के छात्रों को प्रदर्शन अच्छा रहता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके आनंद पांडेय खुलकर मानते हैं कि वर्तमान समय में विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनदेखी करना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा। विदेशी निवेश को बढ़ावा देकर ही हम देश का सर्वांगीण विकास हो सकता है।

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