पारदर्शिता की कीमत

भोपाल में सूचना का अधिकार कनून (आरटीआई) कार्यकर्ता व अन्ना हजारे की समर्थक शेहला मसूद की हाल मे गोली मारकर हत्या कर दी गई. अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रकरण में उन लोगों का हाथ हो सकता है, जिनके बारे में वह आरटीआई के तहत सरकार से जानकारियां निकाल रही थीं.

इंडिया अगेंस्ट करप्शन की प्रदेश संयोजक रह चुकी शेहला मसूद मंगलवार को अन्ना हजारे के आंदोलन का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर अभियान शुरू करने वाली थीं. सुबह घर से निकलते समय ही कुछ अग्यात हमलावरो ने उन के गोली चला कर हत्या कर दी. शुरुआती जाँच में मिले आत्महत्या के कुछेक संकेतों को अब दरकिनार कर दिया गया है और पुलिस इसे हत्या का प्रकरण मानकर ही जाँच करेगी.

माना जाता है कि शेहला मसूद ने आरटीआई के ज़रिये कई बड़े मामलों को उजागर किया था. वन, पर्यावरण और खदान माफियाओं के कई मामलों को भी शेहला ने उजागर किया था. उन्होंने बांधवगढ़ व पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की कम होती संख्या पर सवाल उठाए थे. इस के अलावा उन्होंने प्रदेश के कई प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा व वन सेवा के अधिकारियों की गड़बड़ियों पर से पर्दा उठाया था. अपने इसी रवैये के कारण उन्होंने बहुत से लोगों को अपना दुश्मन बना लिया था. शेहला ने अपनी संस्था उदय के जरिए आरटीआई कानून के तहत लगभग 139 आवेदन विभिन्न विभागों में लगा रखे थे. हजारे की ही तरह शेहला मध्य प्रदेश में अफसरों, खदान माफिया और सरकार के मंत्रियों के खिलाफ आंदोलन की तय्यारी कर रही थी. पिछले हफ्ते शेहला अन्ना के आंदोलन की तर्ज पर एम.पी.अगेंस्ट करप्शन अभियान शुरू करने वाली थी.

बीते कुछ समय में देश के विभिन्न हिस्सों में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले और उन्हें धमकाने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. आरटीआई कानून को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते बहुत से लोग महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए इस का इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित हो रहे हैं. नागरिक जब इस अधिकार का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेंगे, तो दोषी तत्वों को दिक्कत अवश्य होगी और वो बदला भी लेना चहेंगे. शेहला हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने का मतलब यह नहीं होगा कि मध्य प्रदेश के सभी आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित हो गए हैं. यह तभी संभव होगा जब इसके लिए अलग उपाय किए जाएंगे और केन्द्र तथा प्रदेश सरकारे कुछ ऐसा करेगी कि आरटीआई कार्यकर्ता स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे.

- स्निग्धा द्विवेदी