कानून क्या करेगा

यह बात हम भारतीयों को शायद ही हजम हो कि अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पर ब्रिटेन में भारी जुर्माना लगाया गया। वह लंदन में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई थीं, लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी 3.30 पाउंड का पार्किंग टिकट खरीदना भूल गए और गाड़ी को बिना फीस दिए ही पार्क कर दिया। इस पर वहां के ट्रैफिक वॉर्डन ने उनकी गाड़ी पर 80 पाउंड जुर्माने का नोटिस चिपका दिया। हिलेरी के बॉडीगार्ड चिल्लाते रहे लेकिन वॉर्डन पर कोई असर नहीं पड़ा। ऐसी ही एक और घटना है। एक स्वीडिश पूंजीपति फिनलैंड में तय गति सीमा से ज्यादा तेज गाड़ी चला रहे थे। पकड़े गए। फिनलैंड में जो जितना ज्यादा पैसे वाला होता है, उस पर उतना ही ज्यादा फाइन लगता है, सो उन पर सीधे 80 लाख रुपये का जुर्माना ठोंक दिया गया। भारत में कभी ऐसा हो सकता है क्या? यहां अव्वल तो कोई अधिकारी किसी वीआईपी की गाड़ी पर नोटिस लगाने की हिम्मत ही नहीं करेगा। किसी गाड़ी पर लाल या नीली बत्ती लगी होना या उसके साथ सुरक्षाकर्मियों का होना ही ट्रैफिक तंत्र के हौसले पस्त करने के लिए काफी है।

शायद भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां प्रभावशाली होने का एक मतलब यह समझा जाता है कि वह नियम-कानून से ऊपर है। वह खुलेआम नियम तोड़ेगा लेकिन कानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। और तो और, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। जैसे कुछ समय पहले गुजरात के एक विधायक विट्ठल रड़ादिया से वडोदरा के एक टोल प्लाजा पर पहचान पत्र दिखाने को कहा गया तो उन्होंने बंदूक निकालकर कर्मचारियों को धमकाना शुरू कर दिया। इस पर शो कॉज मांगे जाने पर उन्होंने पिछले दिनों अपनी पार्टी कांग्रेस छोड़ी तो बीजेपी ने उन्हें सम्मानपूर्वक अपने यहां बुला लिया। भारत में नियम का पालन कमजोर लोग करते हैं और वही ज्यादातर कानून की पकड़ में आते हैं। हम पश्चिमी देशों की तरक्की पर मुग्ध रहते हैं पर उनकी व्यवस्था की बुनियाद पर नजर नहीं डालना चाहते। उनके सिस्टम की नींव में सख्त अनुशासन और व्यवस्था के प्रति सम्मान का भाव है। हमने अपने संविधान में ब्रिटेन और दूसरे पश्चिमी देशों से खूब अच्छी-अच्छी बातें ली हैं, उनके कई कानून भी लिए हैं लेकिन उनका यह जज्बा नहीं ले पाए।

 

साभारः नवभारत टाइम्स