अंकुश का अभाव, सरकारी स्कूल बेहाल

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की विद्यार्थियों के प्रति अरुचि और कक्षाओं से नदारद रहने के मामले सामने आते रहते हैं। इस व्यवस्था में बदलाव के लिए जरूरी है कि न सिर्फ मानिटरिंग सिस्टम बेहतर हो बल्कि शिक्षकों को उनके प्रदर्शन पर आधारित प्रोत्साहन दिया जाए। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (सीसीएस) की ओर से दिल्ली के सरकारी, निजी व बजट स्कूलों को ध्यान में रखकर हुई रिसर्च में सामने आया है कि किस तरह से सरकारी स्कूलों की हालत खराब हो रही है और निजी स्कूलों की साख मजबूत हो रही है।
 
स्कूलों में शिक्षकों की भूमिका पर केंद्रित रिसर्च में बताया गया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का कक्षाओं से गैरहाजिर रहना बड़ी परेशानी है। सीसीएस के अध्यक्ष पार्थ जे शाह कहते हैं कि इसके पीछे के दो अहम कारण हैं-पहला, सरकारी स्कूल के शिक्षक को गंभीर कार्रवाई का भय नहीं रहता है और दूसरा अक्सर उसे शिक्षण से इतर अन्य कामों जैसे जनगणना, चुनाव ड्यूटी आदि में लगाया जाता है।
 
रिसर्च में सामने आया है कि निजी व बजट प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर रोजगार मिलता है। मॉनिटरिंग व अंकुश के मामले में भी ये सरकारी स्कूलों से कहीं आगे हैं। गाहे बगाहे सरकारी स्कूल का विद्यार्थी उम्दा प्रदर्शन कर देता है तो उसे गुदड़ी का लाल कहा जाता है। पार्थ कहते हैं कि सुधार की बात करें तो सरकार को शिक्षकों की नियुक्ति का पैमाना बदलने की जरूरत है। इसमें शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ शिक्षण के प्रति रूझान की परख भी होनी चाहिए। रिसर्च में 55 शिक्षकों व 7 स्कूल प्रमुखों से विस्तार से बातचीत की गई। इसमें चार बड़े निजी स्कूल, तीन बजट प्राइवेट स्कूल, तीन सरकारी स्कूल व एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल रहे।
 
काम का बोझ है ज्यादा
 
गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (जीएसटीए) के महासचिव अजयवीर यादव का कहना है कि सभी शिक्षकों को एक ही नजर से देखना ठीक नहीं है। सरकारी स्कूलों में संसाधनों के अभाव के बावजूद शिक्षक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते हैं। जहां तक नदारद रहने की बात है तो चंद लोगों के चलते समूची शिक्षक बिरादरी का नाम खराब होता है। हालांकि शिक्षण के अलावा स्कूल शिक्षकों को दिए जाने वाले अन्य कामों को वह उचित नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि मध्याह्न् भोजन से जनगणना सरीखे करीब 41 ऐसे काम हैं जो शिक्षकों को दिए जाते हैं। इससे सीधे तौर पर शैक्षणिक कार्य बाधित होता है।
 
 
- शैलेंद्र सिंह
साभारः दैनिक जागरण