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चक्रवर्ती राजागोपालाचारी उर्फ राजाजी (10 दिसंबर 1878 - 25 दिसंबर 1972) गांधी जी के सच्चे अनुयायी थे। वे प्रखर विद्वान, अधिवक्ता, विचारक और राजनीतिज्ञ थे। राजाजी ने मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से 1897 में कानून की पढ़ाई (स्नातक) पूरी करने के बाद वे 1906 में वे इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए। रॉलेट एक्ट का विरोध और असहयोग आंदोलन जैसे आंदोलनों में वे प्रमुखता से सक्रिय रहे। सूबे के किसानों को कर्ज के बोझ से राहत दिलाने के लिए उन्होंने मद्रास सूबे के प्रधान के तौर पर उन्होंने 1938 में कृषि कर्ज राहत कोष की व्यवस्था की। सबकी भागीदारी और समावे

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फ्रेंच लेखक, पत्रकार, अर्थशास्त्री व चिंतक फ्रेडरिक बास्तियात द्वारा 168 वर्ष पहले लिखी गयी पुस्तक 'द लॉ' आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। यही कारण है कि इस पुस्तक को समय समय पर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाता रहा है। अब यह पुस्तक हिंदी में भी उपलब्ध है। 20 जनवरी 2018 को इसका विमोचन कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में किया गया। पुस्तक को http://bit.ly/2Ek3b1W से फ्री डाउनलोड किया जा सकता है..
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“एपीजे अब्दुल कलाम की नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर” देने के लिए द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 400 छात्रोँ के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत की है ताकि उन्हे बेहतरीन शिक्षा हासिल हो सके। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन देश की बढ़ती आबादी और शिक्षा प्राप्त करने के उम्मीदवार छात्रोँ को संख्या की तुलना में यह बेहद कम है। यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि हमारे देश की आने वाली युवा पीढ़ी अच्छी शिक्षा हासिल करने और अपनी क्षमताओँ के अनुकूल अवसर पाने हेतु धर्मार्थ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

पंजाब नेशनल बैंक के मुताबिक नीरव मोदी महाफ्रॉड की रकम 11 हजार चार करोड़ से 1300 करोड़ रूपये और ज्यादा हो सकती है। यानी कुल 12 हजार सात करोड़ का चूना बैंक या सरकार को लग चुका है। इस फ्रॉड के बाद लोगों की जुबान पर बड़ा सवाल यह है कि सरकार हर वो काम क्यों करती है जिससे टैक्स के रूप में वसूली गई लोगों की खून पसीने की कमाई पानी में बह जाए। सरकार का काम देश चलाना है, विदेश नीति और रक्षा मामलों पर ध्यान देना है। बैंक चलाने के लिए प्राइवेट संस्थाएं है जो पहले से ही बैंकों को चला रही है। सरकार प्राइवेट बैंकों पर सेवा शर्तों के लिए निगरानी रख सकती है ज

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नवीन पाल

वैज्ञानिक तौर पर यह सिद्ध हो चुका है कि बांस, पेड़ नहीं बल्कि घांस की एक प्रजाति है। भारत दुनिया में बांस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है इसके बावजूद अगरबत्ती की तीलियों सहित बांस से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण के भारत दुनिया में सबसे अधिक बांस का आयात भी करता है। कारण यह कि बांस के पेड़ के रूप में वर्गीकृत होने के कारण इसके काटने पर रोक है। बांस के उत्पादन और इसे काटने की अनुमति मिल जाने पर बड़ी आबादी बेरोजगारी के जंजाल से मुक्त हो सकती है। साथ ही इससे अर्थव्यवस्था में लगभग 1000 करोड़ रूपए का योगदान हो सकता है..। हाल ही में प्रधानमंत्री न

क्या आपको पता हैः एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 के मुताबिक देश में पतंग और गुब्बारे बनाने, मरम्मत करने और उड़ाने के लिए लाइसेंस का होना अनिवार्य है। ये लाइसेंस ठीक वैसे हैं जैसे एयरक्राफ्ट को उड़ाने के लिए पायलट व उसके मरम्मत करने के लिए विशेषज्ञता वाले लाइसेंस की जरूरत होती है। निर्धारित लाइसेंस के बगैर पतंग अथवा गुब्बारे उड़ाने पर कम से कम 2 वर्ष की कैद और 10 लाख रूपए के जुर्माने का प्रावधान है। इस प्रकार, सभी देशवासी जाने-अनजाने कानून तोड़ने के अपराधी बन रहे हैं। आइए, इस अनुपयोगी कानून के समापन के लिए मिलकर आवाज उठाएं..

इस वीडियो के माध्यम से सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट पार्थ जे.शाह बता रहे हैं कि भारत के लिए मिल्टन फ्रीडमैन के क्या मायने हैं? और किस प्रकार मिल्टन फ्रीडमैन के विचार आज भी हमारे लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने की दशकों पूर्व..
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मामा मेहुल चौकसी और भांजे नीरव मोदी की जोड़ी ने देश के सरकारी बैंकिंग सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। 11,600 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला आजकल देश में हर किसी की जुबान पर है। कोई इसे चटखारे लेकर बयान कर रहा है तो किसी ने इसे अपनी राजनीति चमकाने का हथियार बना लिया है। हैरत ये है कि कैसे फर्जी गारंटियों के दम पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंकिग सिस्टम को भेद नीरव मोदी चूना लगाकर फरार हो गया। अपने आपको गर्व से देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक कहने वाला पंजाब नेशनल बैंक अब खिसयाए अंदाज में सफाई दे रहा है। पर क्या ये मुमकिन है कि आज हो रही है

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नवीन पाल
गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की स्कूल परिसर में हुई हत्या और शुरूआती जांच में स्कूल बस कंडक्टर का नाम सामने आने के बाद से जिस प्रकार गैरशैक्षणिक कर्मचारियों विशेषकर ड्राइवरों और कंडक्टरों के साथ सुरक्षा के नाम पर दोयम व्यवहार किया जाने लगा उससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है..

1.3 बिलियन आबादी के साथ भारत की समस्या भी काफी बडी है, यहाँ 1 बिलियन लोग प्रतिदिन 2 डॉलर्स से कम कमाते हैं, 30 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, नवजात मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चोँ के जन्म पर 45 है और मातृत्व मृत्यु दर 1,00,000 जन्म पर 175 है।इन सारी समस्याओँ का समाधान सिर्फ सरकार ही कर सकती है जो कुल जीडीपी का 18% टैक्स के रूप में वसूल करती है। राज्य और केंद्र द्वारा हर साल 40 लाख करोड रुपये खर्च किया जाता है। सरकार के पास प्रमुख समस्याओँ के समाधान हेतु पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन खर्चँ के प्रभावी सिस्टम के अभाव, सरकारी खर्चोँ की उत्पादकता में कम

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