शासन

गुजरात विधानसभा में 14 मार्च को बजट सत्र के दौरान हुई एक शर्मनाक हरकत ने पूरे देश का ध्यान खींचा। कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों में जमकर हाथापाई हुई। कांग्रेस विधायक प्रताप दुधार्क ने बीजेपी के जगदीश पंचाल को सदन में थप्पड़ मार दिया। इसके जवाब में बीजेपी के विधायकों ने कांग्रेस के विधायक अमरीष डेर की पिटाई कर दी। दरअसल सदन के भीतर रेप आरोपी आसाराम पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक इस पर सत्तापक्ष से अतिरिक्त सवाल पूछना चाह रहे थे लेकिन बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया। इस बीच प्रश्नकाल समाप्त हो गया तो कांग्रेस विधायक आपा खो बै

“एपीजे अब्दुल कलाम की नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर” देने के लिए द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 400 छात्रोँ के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत की है ताकि उन्हे बेहतरीन शिक्षा हासिल हो सके। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन देश की बढ़ती आबादी और शिक्षा प्राप्त करने के उम्मीदवार छात्रोँ को संख्या की तुलना में यह बेहद कम है। यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि हमारे देश की आने वाली युवा पीढ़ी अच्छी शिक्षा हासिल करने और अपनी क्षमताओँ के अनुकूल अवसर पाने हेतु धर्मार्थ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

पंजाब नेशनल बैंक के मुताबिक नीरव मोदी महाफ्रॉड की रकम 11 हजार चार करोड़ से 1300 करोड़ रूपये और ज्यादा हो सकती है। यानी कुल 12 हजार सात करोड़ का चूना बैंक या सरकार को लग चुका है। इस फ्रॉड के बाद लोगों की जुबान पर बड़ा सवाल यह है कि सरकार हर वो काम क्यों करती है जिससे टैक्स के रूप में वसूली गई लोगों की खून पसीने की कमाई पानी में बह जाए। सरकार का काम देश चलाना है, विदेश नीति और रक्षा मामलों पर ध्यान देना है। बैंक चलाने के लिए प्राइवेट संस्थाएं है जो पहले से ही बैंकों को चला रही है। सरकार प्राइवेट बैंकों पर सेवा शर्तों के लिए निगरानी रख सकती है ज

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नवीन पाल

वैज्ञानिक तौर पर यह सिद्ध हो चुका है कि बांस, पेड़ नहीं बल्कि घांस की एक प्रजाति है। भारत दुनिया में बांस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है इसके बावजूद अगरबत्ती की तीलियों सहित बांस से बनने वाले अन्य उत्पादों के निर्माण के भारत दुनिया में सबसे अधिक बांस का आयात भी करता है। कारण यह कि बांस के पेड़ के रूप में वर्गीकृत होने के कारण इसके काटने पर रोक है। बांस के उत्पादन और इसे काटने की अनुमति मिल जाने पर बड़ी आबादी बेरोजगारी के जंजाल से मुक्त हो सकती है। साथ ही इससे अर्थव्यवस्था में लगभग 1000 करोड़ रूपए का योगदान हो सकता है..। हाल ही में प्रधानमंत्री न

मामा मेहुल चौकसी और भांजे नीरव मोदी की जोड़ी ने देश के सरकारी बैंकिंग सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। 11,600 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला आजकल देश में हर किसी की जुबान पर है। कोई इसे चटखारे लेकर बयान कर रहा है तो किसी ने इसे अपनी राजनीति चमकाने का हथियार बना लिया है। हैरत ये है कि कैसे फर्जी गारंटियों के दम पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंकिग सिस्टम को भेद नीरव मोदी चूना लगाकर फरार हो गया। अपने आपको गर्व से देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक कहने वाला पंजाब नेशनल बैंक अब खिसयाए अंदाज में सफाई दे रहा है। पर क्या ये मुमकिन है कि आज हो रही है

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नवीन पाल
गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की स्कूल परिसर में हुई हत्या और शुरूआती जांच में स्कूल बस कंडक्टर का नाम सामने आने के बाद से जिस प्रकार गैरशैक्षणिक कर्मचारियों विशेषकर ड्राइवरों और कंडक्टरों के साथ सुरक्षा के नाम पर दोयम व्यवहार किया जाने लगा उससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है..

1.3 बिलियन आबादी के साथ भारत की समस्या भी काफी बडी है, यहाँ 1 बिलियन लोग प्रतिदिन 2 डॉलर्स से कम कमाते हैं, 30 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, नवजात मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चोँ के जन्म पर 45 है और मातृत्व मृत्यु दर 1,00,000 जन्म पर 175 है।इन सारी समस्याओँ का समाधान सिर्फ सरकार ही कर सकती है जो कुल जीडीपी का 18% टैक्स के रूप में वसूल करती है। राज्य और केंद्र द्वारा हर साल 40 लाख करोड रुपये खर्च किया जाता है। सरकार के पास प्रमुख समस्याओँ के समाधान हेतु पर्याप्त संसाधन हैं लेकिन खर्चँ के प्रभावी सिस्टम के अभाव, सरकारी खर्चोँ की उत्पादकता में कम

पिछ्ले हफ्ते आई एक न्यूज रिपोर्ट ने काफी खलबली मचा दी थी, जिसमेँ नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा था कि स्कूल, कॉलेज और जेलोँ को निजी क्षेत्र के हवाले कर देना चाहिए। जैसा कि पहले से पता था, उनके इस वक्तव्य पर बवाल तो मचना ही था, अधिकतर लोग इस क्षेत्रोँ के निजीकरण की बात सुनकर नाराज हुए, परिणाम्स्वरूप कांत को यह स्पष्ट करना पड़ा कि वह सिर्फ स्कूलोँ के भौतिक संसाधनो में निजी क्षेत्र की भागीदारी की बात कर रहे थे।

निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किए गए शिक्षा का अधिकार कानून के कारण देश यूनिवर्सल इनरॉल्मेंट के लक्ष्य के करीब तो पहुंच गया लेकिन गुणवत्ता युक्त शिक्षा अब भी हमारे यहां दूर की कौड़ी है। छात्रों के सीखने के स्तर व गुणवत्ता को जांचने वाले अंतर्राष्ट्रीय‘प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (पिसा)’कार्यक्रम में भारत 74 प्रतिभागी देशों में 72वें स्थान पर रहा। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर) के मुताबिक वर्ष 2010 में सरकारी स्कूलों के चौथी कक्षा के 55.1 फीसदी बच्चे कम से कम घटाव के सवाल हल कर लेते थे, लेकि

कानून पथभ्रष्ट हो गया है! कानून – और, इससे संबंधित राष्ट्र की समस्त शक्तियां सामूहिक रूप से न केवल अपने वास्तविक मार्ग से विचलित हो गयी हैं बल्कि मैं तो कहूंगा कि वे सर्वथा विपरीत मार्ग पर बढ़ रही हैं! लोभ व लोलुपता की राह में रुकावट बनने की बजाए आज कानून समस्त प्रकार के लोभ की पूर्ति का उपकरण बन गया है! जिन अनैतिक व गैर कानूनी गतिविधियों को दंडित करना कानून का मूल उद्देश्य था वही कानून आज उन्हीं गतिविधियों का कसूरवार है! वास्तव में यदि ऐसा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इस बाबत सभी साथी नागरिकों को आगाह करने के प्रति मैं बाध्य हूं।

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