उद्योगपति

हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री ने लखनऊ में उद्योगपतियों के बीच यह कहा कि वह उनके साथ खड़े होने में डरते नहीं। इसी के साथ उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश के विकास में उद्योगपतियों की भी भूमिका है। वैसे तो इस सामान्य सी बात को हर कोई समझता है, लेकिन कुछ लोग इस बुनियादी बात को समझने से इन्कार करने के साथ ही आम जनता को बरगलाने का काम भी कर रहे हैं।

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देश के पांच राज्यों में लोकतंत्र का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान चुनावी रणभूमि में अपना भाग्य आजमाने वाले नेताओं ने नियमानुसार अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा भी दिया। समस्या यह है कि संपत्ति की जानकारी मिलते ही हंगामा शुरू हो जाता है कि फलां उम्मीदवार के पास इतनी संपत्ति है, कहां से उसके पास इतना पैसा आ गया? जिसके पास संपत्ति अधिक दिखती है, नैतिकतावादी उसे घेरने लगते हैं, जैसे उसने चोरी की हो, घोटाला किया हो या लूटकर संपत्ति बनाई हो। यह क्या बात हुई?

इस साल जब कमानी ट्यूब की चेयरपर्सन कल्पना सरोज अपना पद्म श्री पुरस्कार राष्ट्रपति से ग्रहण करने जाएंगी तो वह उस अवसर पर हीरों का हार और कांजीवरम साड़ी पहनेंगी। हालांकि इस सम्मान को ग्रहण करने के लिए वह अपने हवाई जहाज से दिल्ली आना चाहती हैं लेकिन खरीद के लिए बातचीत तब तक पूरी होगी या नहीं, कहा नहीं जा सकता है।  वह पूछती हैं, 'आप क्या सोचते हैं?'  हालांकि उनकी आवाज थोड़ी भारी और गंभीर है लेकिन उनका ठिठोली करने का अंदाज बेहद आकर्षक है।

पूंजीवाद में संकट तो आते रहेंगे ,समाजवाद में न संकट होंगे न प्रगति –जयतीर्थ राव

लाइसेंस कोटा राज तो अंग्रेजों की तानाशाही से ज्यादा क्रूर था – राव