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भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाने वाले दीपावली के त्यौहार को मनाने के मुख्यतः दो कारण हैं। पहला कारण, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का संहार कर अयोध्या के राजा राम, भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ अपने राज्य वापस लौटे थे। पुष्पक विमान से रात के अंधेरे में अयोध्या पहुंचे राम के स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने घर के बाहर दिए जलाए और रौशनी कर विमान को यथास्थान उतरने की राह दिखाई। कालांतर में यह उस घटना को याद करने और खुशी मनाने की परंपरा के तौर पर प्रचलित हुआ। दूसरा कारण, धन, सुख और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर धनार्जन व लाभ की कामना करना। मजे की

ध्यान हो तो धन भी सुंदर है। ध्यानी के पास धन होगा, तो जगत का हित ही होगा, कल्याण ही होगा। क्योंकि धन ऊर्जा है। धन शक्ति है। धन बहुत कुछ कर सकता है। मैं धन विरोधी नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं, जो समझाते हैं कि धन से बचो। भागो धन से। वे कायरता की बातें करते हैं। मैं कहता हूं जियो धन में, लेकिन ध्यान का विस्मरण न हो। ध्यान भीतर रहे, धन बाहर। फिर कोई चिंता नहीं है। तब तुम कमल जैसे रहोगे, पानी में रहोगे और पानी तुम्हें छुएगा भी नहीं। ध्यान रहे, धन तुम्हारे जीवन का सर्वस्व न बन जाए। तुम धन को ही इकट्ठा करने में न लगे रहो। धन साधन है, साध्य न बन

"लेकिन हम सभी मुक्त अर्थव्यवस्था की ईच्छा रखते हैं... न केवल इसलिए कि यह हमारी स्वतंत्रता की गारंटी है, बल्कि इसलिए भी कि यह धन के सृजन का और पूरे देश को संपन्न बनाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है...।"

- मार्ग्रेट थैचर (1925-3013)

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