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केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का एक बड़ा अनुरोध ठुकराए जाने के बाद नंदन नीलेकणी के निर्देशन में काम कर रहा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) लगातार सवालों के घेरे में आ गया है। एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि यूआईडीएआई उन कई वित्तीय निगरानी और नियंत्रणों से बाहर है जो किसी भी सरकार के कामों में लागू होते हैं। हो सकता है ऐसा इसलिए हो क्योंकि इसकी समूची व्यवस्था को सावधानीपूर्वक कुछ इस तरह तैयार किया गया है  कि वह न्यूनतम परेशानियों और कष्टकारी प्रक्रियाओं के साथ काम कर सके।

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विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणि की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रत्यक्ष सब्सिडी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है. और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रत्यक्ष सब्सिडी पर एक रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा भी है कि रसोई गैस, खाद और मिट्टी के तेल पर प्रत्यक्ष सब्सिडी देकर वर्तमान सब्सिडी व्यवस्था की खामियों से निजात पाया जा सकता है.

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