Third party assessment

हर कोई जानता है कि भारत में शिक्षा प्रणाली कितनी खराब है – लेकिन कितना अजीब है कि, जब चुनाव होते हैं तो यह एक बड़ा मुद्दा नहीं बन पाता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में राज्य की विफलता माता-पिता के वोट देने के तरीके को बदलती नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की स्थिति का सामान्यीकरण हो गया है - जो उदासीनता को स्पष्ट करती है। लेकिन हमारे देश का भविष्य हमारे बच्चों को मिलने वाली शिक्षा पर निर्भर करता है। हमें इसे ठीक करने की जरूरत है।

एक प्रावधान को लेकर 'शिक्षा का अधिकार' कानून एक बार पुन: चर्चा में है। इसबार बहस इसबात पर हो रही है कि आरटीई के आर्टिकल 30(1) में दिए गये 'नो डिटेंशन' नीति में बदलाव किया जाय अथवा नहीं! सबसे पहले तो यह समझते हैं कि आरटीई का आर्टिकल 30(1) क्या कहता है ?