Property Rights

ग्रामीण भारत में जल और जंगल दो सबसे ज्यादा मूल्यवान संसाधन हैं। लेकिन ये संसाधन इन इलाकों में रहने वाले लोगों के हाथ में नहीं हैं। ये राज्य के हाथ में हैं और राज्य ही इनका प्रबंधन करता है। जल और जंगल ग्रामीण समुदायों की बजाए देश की संपत्ति है। ये राष्ट्रीयकृत संसाधन हैं। इस राष्ट्रीयकरण ने ग्रामीणों को उनके बहुमूल्य आर्थिक संसाधन से वंचित कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक अन्याय है। 
 

सन 2011 के अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति अधिकार सूचकांक की हाल में ही घोषणा हुई जिसमें विश्व के 129 देशों के बौद्धिक और भौतिक संपत्ति अधिकारों को मापा गया है.

भारत स्थित सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी सहित विश्व के 67 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इस बार वाशिंगटन डी सी स्थित 'प्रोपर्टी राईट्स अलाइंस' के साथ मिल कर इस पांचवे वार्षिक सूचकांक को पेश किया है.

संपत्ति अधिकार के क्षेत्र में भारत अभी भी पीछे है और काफी सुधार की संभावना है.  इस बार के सूचकांक में भारत का कुल स्कोर 5.6 है और 129 देशों में उसकी रैंक 52 है. अगर क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो 19 देशों में भारत की रैंक 9 है.