Private sector

यह बैठक उसी शहर में थी और उस रामलीला मैदान से ज्यादा दूर भी नहीं थी, जहां कुछ दिन पहले तक भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध में बाबूराव हजारे अनशन पर बैठे थे। उनके इस अनशन ने सरकार, संसद और खबरिया टेलीविजन चैनलों को हिला कर रख दिया। लेकिन एक पांच सितारा होटल के वातानुकूलित और शांत माहौल में कारोबारी शिक्षा के भविष्य पर चल रहा साक्षात्कार मानो किसी अलग ही दुनिया में था। ऐसी दुनिया, जो देश भर में मध्य वर्ग के प्रदर्शनों और इनसे छुटकारा पाने की राजनीतिक तबके की काल्पनिक कोशिशों से परे थी।

गुडग़ांव के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में कदम रखते ही अन्ना पक्ष और सरकार के बीच चल रही तनातनी तो और दूर की चीज होती, बशर्ते टेलीविजन चैनलों पर लगातार इसका प्रसारण नहीं हो रहा होता। इस शहर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और बढ़ती निजी पहल की टक्कर स्वेच्छा से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की गैर मौजूदगी से होती है। भारत के विकास की दोहरी गति का यह सबसे बेहतरीन उदाहरण है।