Poverty

भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाने वाले दीपावली के त्यौहार को मनाने के मुख्यतः दो कारण हैं। पहला कारण, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकापति रावण का संहार कर अयोध्या के राजा राम, भाई लक्ष्मण व पत्नी सीता के साथ अपने राज्य वापस लौटे थे। पुष्पक विमान से रात के अंधेरे में अयोध्या पहुंचे राम के स्वागत के लिए अयोध्यावासियों ने घर के बाहर दिए जलाए और रौशनी कर विमान को यथास्थान उतरने की राह दिखाई। कालांतर में यह उस घटना को याद करने और खुशी मनाने की परंपरा के तौर पर प्रचलित हुआ। दूसरा कारण, धन, सुख और समृद्धि की देवी लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा

अपनी युवावस्था के दिनों में मैंने निचले स्तर तक आर्थिक लाभ के सिद्धांत (थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक ट्रिकल डाउन) के बारे में सुना था। इसके मुताबिक अगर अमीर और अधिक अमीर होंगे तो गरीबों को भी इसका लाभ मिलेगा और इस वजह से यह सबके लिए फायदेमंद रहेगा। ऐसा माना जा रहा था कि यह इस बात का भी खुलासा कर देगा, कार्ल मार्क्स के विपरीत, कि यह सच नहीं है कि अमीर और अमीर हो गए, जबकि गरीब और गरीब। इसके विपरीत हुआ यह कि दोनों ही साथ-साथ अमीर हुए। अमेरिका में गरीबी की रेखा 11 हजार डॉलर प्रति वर्ष (पांच लाख रुपए प्रति वर्ष) की चौंकाने वाली ऊंचाई तक पहुंच गई है। इतिहास

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

गरीबी को खत्म करने के अभी तक सुने गए प्रस्तावों में सबसे आसान एक एनजीओ में काम करने वाले एक दोस्त की ओर से आया। क्यों न हम न्यूनतम वेतन को इतना बढ़ा दें कि सभी लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ जाएं? यह कितना आसान लगता है मनोहारी और दर्दरहित। अफसोस, यह नाकाम रहेगा क्योंकि हमारे यहां एक ऐसा कानून है जिसका परिणाम अनपेक्षित है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

दशकों तक भारत में अर्थशास्त्र का तात्पर्य गरीबी का अध्ययन रहा है। कुछ समय पहले तक कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने की शुरुआत 'गरीबी के दोषपू्र्ण चक्र' नामक सिद्धांत (Theory of vicious circle of poverty) से की जाती थी। इस सिद्धांत के अनुसार गरीबी को दूर नहीं किया जा सकता। गरीब लोग तथा गरीब राष्ट्र के लिए गरीब रहना नियति है। वास्तव में यह कोरी बकवास है। यदि यह सत्य होता तो संसार आज भी पाषाण युग में होता। जीवनियों (biography) का इतिहास 'गरीबी से अमीरी का सफर' करने वाली कथाओं से भरा पड़ा है। हांगकांग और अमेरिका गरीब अप्रवासियों (immi

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..

निर्धन लोगों के साथ असल त्रासदी, दरअसल उनकी आकांक्षाओं की विपन्नता है ः एडम स्मिथ

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असमानता को लेकर हमें अपना नजरिया साफ करने और पाखंड से दूर रहने की जरूरत है।  गरीबी एक निरपेक्ष धारणा है, जबकि असमानता सापेक्ष। गरीबी को घटाना वांछनीय है। लेकिन असमानता में कमी लाना एक स्वयंसिद्ध उद्देश्य नहीं है। ऐसी धारणा है कि बढ़ती असमानता, चाहे वह असल हो या काल्पनिक, बुरी होती है।

बीते साल शंकर आचार्य और राकेश मोहन ने मोंटेक सिंह अहलूवालिया के सम्मान में एक पुस्तक का संपादन किया था। इस किताब में स्वर्गीय सुरेश तेंदुलकर का असमानता पर एक लेख था। इस लेख में बैंकाक में हुए एक सम्मेलन के बेहद रोचक किस्से का जिक्र था। उस वक्त मनमोहन सिंह योजना आयोग के उपाध्यक्ष हुआ करते थे।

Author: 
बिबेक देबरॉय