Peace, love and liberty

उस दौरान बड़ी गहमागहमी थी। देश में युद्ध छिड़ा हुआ था, सभी ने हथियार उठा लिये थे, हर किसी के सीने में देशप्रेम की ज्वाला धधक रही थी; नगाड़े बज रहे थे, बैंड बज रहे थे, खिलौना पिस्तौलें ठांय-ठांय कर रही थीं, पटाखे़ फुसफुसा रहे थे; हर एक हाथ में और छतों और बालकनियों की कतार में कई तरह के झंडे धूप में फड़फड़ा रहे थे; रोज़ाना उस चौड़ी सड़क पर नौजवान स्वयंसेवक अपने नए यूनिफॉर्म पहन कर इतराते हुए परेड करते थे, उनके मां-बाप, बहनें, प्रेमिकाएं गर्व के साथ भावनाओं से तर आवाज़ में उनका हौसला बढ़ाते थे; हर रात भीड़ भरी सभाएं होती थीं, जिनमें देशप्रेम से