NITI Ayog

नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स इन दिनों राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस इंडेक्स में अप्रत्याशित जैसा कुछ भी नहीं है। यह इंडेक्स पूर्व में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर हुए शोधों और उनके आंकड़ों की एक प्रकार से पुष्टि भर ही करता है। वैसे यह इंडेक्स शिक्षा का अधिकार कानून के उन प्रावधानों की भी कलई खोलता है जो स्कूलों को लर्निंग आऊटकम की बजाए बिल्डिंग और प्ले ग्राउंड के आधार पर मान्यता प्रदान करता है। जबकि दुनियाभर के शोध लर्निंग आऊटकम और क्लासरूम के साइज़ के बीच किसी भी प्रकार के संबंध से इंकार

क़ानून क्या है? इस बारे में ऑस्टिन का कथन है कि क़ानून संप्रभु की आज्ञा है। राज्य के सन्दर्भ में अगर बात करें तो राजतंत्र वाली व्यवस्था में राजा का आदेश ही क़ानून होता था। शासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी क़ानून की परिभाषा कमोबेस वही है। सवाल है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में क़ानून लोकहित के लिए हैं या लोकहितों को ही क़ानून के मापदंड पर रखकर देखना होगा?

वर्ल्ड बैंक ने सोमवार को इज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी व्यापार सुगमता सूचकांक पर रिपोर्ट जारी की़। रिपोर्ट के मुताबिक उद्योग-व्यवसाय के लिहाज से सुगमता वाले राज्यों की सूची में गुजरात शीर्ष पर है, जबकि आंध्र प्रदेश दूसरे स्थान पर, झारखंड तीसरे, तो छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है़। यानी इन राज्यों में उद्योग-व्यवसाय लगाना-चलाना सबसे आसान है। रिपोर्ट में प बंगाल को 11 वां, तो बिहार को 21 वां स्थान मिला है़ इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में दिल्ली, पंजाब, केरल और गोवा फिसड्डी साबित हुए हैं।
 
Author: 
बिबेक देबरॉय