Monsoon Session

सांसदों की वेतन कटौती का जो प्रस्ताव है, उसे एक लोकप्रिय जनाक्रोश की तरह से समझना चाहिए। जनता में इसको लेकर गुस्सा है कि हम जिन सांसदों को जनप्रतिनिधि बनाकर भेजते हैं, वे कितने गैरजिम्मेदार तरीके से संसद में व्यवहार करते हैं। इसके लिए जनता चाहती है कि इन सांसदों को अपने गैर-जिम्मेदार आचरण के लिए दंडित किया जाना चाहिए। पर दंड का स्वरूप ऎसा होना चाहिए जिसका सांसदों में डर हो। असर हो।
 

संसद के मानसून सत्र की शुरूआत उम्मीद के मुताबिक ही कही जा सकती है। लोकसभाध्यक्ष की ओर से बुलाई सर्वदलीय बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के रवैए को देखकर कहा जा सकता है कि पिछले सत्र की तरह मानसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ने जा रहा है। सदन को चलाने वाले दोनों पक्षों का मकसद ही जब एक-दूसरे को नीचा दिखाना रह जाए तो संसदीय परम्पराओं की परवाह किसे रह जाती है।

Category: