Microfinance

गरीबी कम करने के मॉडल के तौर पर व्यापक रूप से स्वीकृत किया गया लघुऋण उद्योग अचानक कड़ी आलोचना का शिकार बन गया है, खासतौर पर दक्षिण एशिया में।  भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में एस के एस और अन्य के खिलाफ कथित तौर पर गलत कार्यप्रणाली और उच्च ब्याज़ दर लेने के कारण माहौल में गर्मी है। बांग्लादेश में नोबल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के जीवन पर्यन्त किए कार्यों को गरीबों के गले की फांस कहा जा रहा है। वजह है, ज्यादा ऋणग्रस्तता। हालांकि लघुऋण कार्यक्षेत्र को नियंत्रित करने की बहस प्रासंगिक है, लेकिन इसके लिए संपूर्ण कार्यक्षेत्र को कुसूरवार ठहराने से ना केवल इस उद्योग द्वारा देखरेख किए जाने वाले लाखों गरीब लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा बल्कि ये प्रभावी ढंग से लघु ऋण से संबद्ध कारणों जैसे भारत में प्रगामी वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में भी विघ्न डालेगा।

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हमारे देश में एक अद्भुत घटना घट रही है। तीन करोड़ गरीब महिलाओं ने छोटा-मोटा कारोबार शुरू करने के लिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ऋण लिए हैं।

Author: 
गुरचरण दास