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पाकिस्तान ने भारत को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दरजा देने का निश्चय भले ही बहुत विलंब से किया है, फिर भी उसके इस फैसले का दोनों देशों के रिश्ते पर दूरगामी प्रभाव पड़ना तय है। आपसी विश्वास बहाली की दिशा में इसलामाबाद की ओर से उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। पाकिस्तान की सरकार ने यह निर्णय लेते हुए भारत-चीन के व्यापार का जिस तरह हवाला दिया है, उससे साफ है कि देर से ही सही, इसलामाबाद को यह एहसास हुआ है कि राजनीतिक मोरचे पर असहमतियां होने के कारण आपसी व्यापार को ठप रखना बुद्धिमानी नहीं है।

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