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क़ानून क्या है? इस बारे में ऑस्टिन का कथन है कि क़ानून संप्रभु की आज्ञा है। राज्य के सन्दर्भ में अगर बात करें तो राजतंत्र वाली व्यवस्था में राजा का आदेश ही क़ानून होता था। शासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी क़ानून की परिभाषा कमोबेस वही है। सवाल है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में क़ानून लोकहित के लिए हैं या लोकहितों को ही क़ानून के मापदंड पर रखकर देखना होगा?