Judiciary

भारत में न्याय मिलने में विलंब के लिए कई प्रक्रियागत खामियां जिम्मेदार हैं। न्याय प्रक्रिया में सुधार के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। 

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की जेपीसी से जांच कराने की मांग पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के चलते संसद का पूरा शीतकालीन सत्र बिना किसी काम काज के समाप्त हो गया. इसी के साथ पूरे सत्र के दौरान एक भी दिन कामकाज नहीं हो पाने का देश के संसदीय इतिहास में एक रिकॉर्ड बन गया.

मनरेगा (MGNREGA) के अंतर्गत 100 श्रमिक दिवसों को बढ़ा कर 200 दिवस करने की कई दिनों से बात चल रही है. भारत के अति निर्धनों की आय का स्त्रोत बनी इस विवादित स्कीम के अंतर्गत दिन बढाने का प्रस्ताव सुनने में तो लोक कल्याणकारी लगता है पर इस का बहुत गंभीर आंकलन करने की आवश्यकता है. हमें ध्यान देना होगा की अति निर्धन को आय की गारंटी पहुचाने वाली ये स्कीम कहीं स्थायी रोज़गार गारंटी स्कीम के रूप में ना तब्दील हो जाए. यदि ऐसा होता है तो आर्थिक सुधार के पथ पर चल रहे हमारे देश के लिए ये एक पीछे जाने वाला कदम होगा.

क्या भारत में आम नागरिक की प्राइवेसी (निजता) खतरे में है?

हम लोग अंतर्विरोधों की एक नयी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं. राजनीति में हम एक व्यक्ति-एक वोट के सिद्धांत को स्वीकार करेंगे. पर हमारे सामाजिक-राजनीतिक जीवन में, मौजूदा सामाजिक-आर्थिक ढांचे के चलते हम लोग एक लोग- एक मूल्य के सिद्धांत को हमेशा खारिज करेंगे. कितने दिनों तक हम अंतर्विरोधों का यह जीवन जी सकते हैं?

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