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अदालती कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग के पक्ष में तीन मुख्य तर्क दिए जा सकते हैं। पहला, जब देश की संसद, चाहे राज्य सभा हो अथवा लोक सभा अथवा राज्यों के विधानसभा की कार्रवाई टीवी पर सजीव प्रसारित की जा सकती है तो फिर अदालतों के पास ऐसा क्या कारण है कि वे इसका विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व बॉम्बे हाईकोर्ट तीनों ही पिछले पांच छह सालों में अलग अलग याचिकाओं में वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग को नकार चुके हैं।
 
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