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इस साल मानसून के अच्छे होने का अनुमान मौसम विभाग द्वारा लगाया गया है लेकिन इससे खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति नहीं घटने वाली.
अहम सवाल खाद्य पदार्थों के उत्पादन और वितरण को लेकर सरकारी नीतियों का है. सही नीतियों के अभाव और कुप्रबंधन ने देश को खाद्यान्न संकट के कगार पर ला खड़ा किया है. इसके लिए पूर्ववर्ती एनडीए और मौजूदा यूपीए, दोनों सरकारें दोषी हैं. अनाजों व दालों की जितनी मांग है उस अनुपात में आपूर्ति घटती जा रही है. मुद्रास्फीति का पारा रिजर्व बैंक की कोशिशों के बाद भी खास नीचे नहीं आ रहा. खाद्यान्न उत्पादन इतना घटा है कि अनाज की कीमत में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा देखा जा रहा है.

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