Freedom

हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं. यह घटना जनता की नुमाइंदगी के साम्यवादी दावे को व्यापक रूप से नकार देती है. फिर भी, ऐसे साम्यवादी दावे अब भी बरकरार हैं जो कभी-कभार युवाओं की नई पीढ़ी को चौंकाते हैं जिन्हें यह मालूम ही नहीं है कि 9 नवंबर 1989 के दिन बर्लिन की दिवार क्यों गिरी.
 
Author: 
स्वामीनाथन अय्यर
- चार दिवसीय मीडिया वर्कशॉप "आइ-पॉलिसी" का सोमवार को हुआ समापन 
- सेंटर फॉर सिविल सोसायटी, आजादी.मी और एटलस नेटवर्क द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था आयोजन