entertainment

हम में से जो लोग बड़े शहरों में रहते हैं, वे अपने शहर को इतना चाहते हैं कि शायद ही कभी उसके भीतर झांककर देखते हैं कि जिस शहर में हम रह रहे हैं, उसमें चल क्या रहा है। इतना ही नहीं हमारे पास इतना वक्त ही नहीं होता कि थोड़ा आराम से बैठकर इस बारे में कुछ सोचें। शहरों में रहने वाले हम लोग हमेशा रोजमर्रा की जिंदगी के रोलर-कोस्टर पर होते हैं। आइए, इस लेख को पढ़ने के लिए लगने वाले वक्त में ही अपने शहर पर कुछ निगाह दौड़ा ली जाए। मैं आपको फुर्ती से एक विचार-यात्रा पर ले चलता हूं।
 
भारत जैसे आजाद मुल्क में इन दिनों ‘बैन’ यानी ‘प्रतिबंध’ शब्द अखबारों और समाचार चैनलों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. आम तौर पर प्रतिबंध का नाम सुनते ही किसी ‘कठमुल्ला’ और उसके उल-जुलूल फतवे का ध्यान आता है, मगर हमारे देश में इन दिनों सेंसर बोर्ड (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) और प्रतिबंध एक दूसरे का पर्याय बनते नजर आ रहे हैं.