dirty politics

ब्राजील की कल्पनाओं पर फुटबॉल विश्वकप का खुमार जिस कदर हावी रहता है उतना कोई और आयोजन नहीं रहता। प्रत्येक चार वर्ष पर यह देश फुटबॉल देवता की आराधना करने वाले एक संप्रदाय में परिवर्तित हो जाता है। दरअसल, ब्राजील ने जितनी बार विश्वकप जीता है उतनी बार किसी और देश ने नहीं जीता। अतः वर्ष 2010 में जब वर्ल्डकप 2014 की मेजबानी ब्राजील को मिलने की घोषणा हुई तो हजारों लोगों ने रियो में समुद्र तट पर पार्टी कर जश्न मनाया। हम ब्राजीलियों को लगा कि वर्ल्डकप अपने घर आ रहा है और इससे हमें काफी खुशी हुई।

नए वर्ष में देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की है। घटती आर्थिक विकास दर, बढ़ता राजकोषीय और चालू खाते का घाटा, लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। यही नहीं, पिछले दिनों खुदरा मुद्रास्फीति की दर 14 महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां ने भी आगाह किया है कि यदि समय रहते आर्थिक निर्णय नहीं लिए गए तो भारत की साख और गिर सकती है।