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चायनीज़ दबाव को ना मानते हुए, भारत ने नोर्वे में चीन के लोकतंत्र समर्थक आन्दोलनकारी लियु श्याबाओ को मिलने वाले नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में हिस्सा लिया. ऐसा कदम उठाते हुए, भारत ने स्वतंत्रता और लोकतान्त्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का अच्छा प्रमाण दिया. चीनी सरकार के आव्हान के चलते, रूस और पाकिस्तान समेत 15 देशों ने इस समारोह का बहिष्कार किया. ये समारोह विश्व मानवाधिकार दिवस पर मनाया गया और भारत, अमरीका, यू के और फ्रांस समेत 46 देशों इस अवसर में सम्मिलित हुए.

श्याबाओ चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के एकाधिकार को समाप्त कर लोकतान्त्रिक सुधारों की एक लम्बे समय से मांग कर रहे हैं. 55 वर्षीय श्याबाओ एक लेखक, आलोचक और प्रोफ़ेसर भी हैं. पिछले साल चीनी सरकार ने उन्हे राज्य विरोधी कार्यकलापों के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.