chandrabhan prasad

दलित चिंतक चंद्रभान प्रसाद का स्पष्ट रूप से मानना है कि दलितों का जितना भला पूंजीवाद ने किया है उतना किसी अन्य विभूति द्वारा नहीं किया जा सका है। चंद्रभान प्रसाद का यह भी मानना है कि आजा बाजार जाति और मार्क्स से बड़ा हो चुका है। उनका कहना है कि वैश्वीकरण के साथ भारत में एडम स्मिथ का प्रवेश हुआ जिन्होंने मनु को चुनौती दी। यह बाजार है जहां आपकी जाति नहीं बल्कि आपकी उपयोगिता का सम्मान होता है। उन्होंने ये बातें इंडियन एक्सप्रेस के मुख्य संपादक शेखर गुप्ता को दिए एक साक्षात्कार के दौरान कही। पूरे साक्षात्कार को हूबहू नीचे पढ़ा जा सकता है...

दलित विचारक व चिंतक चंद्रभान प्रसाद ने कहा है कि देश के दलितों के उत्थान की प्रक्रिया में आरक्षण के मुकाबले मुक्त बाजार व्यवस्था ज्यादा कारगर है। उन्होंने कहा है कि आरक्षण की व्यवस्था महज 10 प्रतिशत लोगों का फायदा कर सकती है जबकि मुक्त बाजार व्यवस्था में 90 प्रतिशत दलितों के उत्थान की क्षमता है। बाजारवाद के फायदों को गिनाते हुए चंद्रभान ने कहा कि यह बाजारवाद की ही देन है कि सदियों से जारी दलितों और गैर दलितों के बीच के रहन-सहन, खान-पान और काम-काज का फर्क समाप्त हो गया है। वह एशिया सेंटर फॉर इन्टरप्राइज (एसीई) द्वारा आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय एशिया लिबर्टी फोरम (एएलएफ) के