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भारतीय कृषि और जीएम फसलों का आर्थिक महत्व भारतीय किसानों को जीएम बीजों के संपर्क में आए अब दो दशकों से अधिक का समय हो गया है। इन दो दशकों में कृषि प्रवृति में क्या बदलाव आए हैं और किस प्रकार सरकारी हस्तक्षेप के कारण किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है बता रहे हैं शेतकारी संगठन के प्रौद्योगिकी सेल के पूर्व प्रभारी स्वर्गीय अजीत नार्डे..

आखिर इस महिला को उस मराठी कहावत की याद दिलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है जिसमें कहा जाता है कि 'बैल आजारी पड़ला तार चलेल, बाइल आजारी नको पड़ैला' यानि कि बैल अगर बीमार पड़ जाए तो फिर भी खेती हो सकती है लेकिन घरवाली अगर बीमार पड़ जाए तो काम नहीं चल सकता..!

क्यों कहना पड़ रहा है कि जो युवक अपनी आजीविका के लिए खेती को चुनता है आज उसका विवाह होना मुश्किल हो जाता है..

- आजादी.मी

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जानिए क्यों अकोला (महाराष्ट्र) के किसान जयंत रामचंद्रन बापट प्रतिबंधित एचटीबीटी बीज के प्रयोग को जायज ठहरा रहे हैं। और यह भी जानें कि क्यों उन्हें यह बयान देना पड़ता है कि 'आतंकवाद से व्यक्ति एक बार मरता है लेकिन सरकार के इस प्रावधान के कारण महिला किसान रोज मरती हैं।' किसान सत्याग्रह के दौरान की गई बातचीत के अंश..    - आजादी.मी