bhartiya janta party

एससी एसटी अत्याचार कानून फिर उसी दमखम के साथ लागू हो गया है जैसा सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च के फैसले से पहले था। एससी एसटी अत्याचार संशोधन कानून में धारा 18-ए और जोड़ी गई है जो कहती है कि इस कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले ना जांच की जरूरत है और ना ही जांच अधिकारी को आरोपी की गिरफ्तारी से पहले किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता।

Author: 
नवीन पाल

हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

किसी व्यक्ति के सशक्त होने का व्यवहारिक मानदंड क्या है? इस सवाल के जवाब में व्यवहारिकता के सर्वाधिक करीब उत्तर नजर आता है- आर्थिक सक्षमता। व्यक्ति आर्थिक तौर पर जितना सम्पन्न होता है, समाज के बीच उतने ही सशक्त रूप में आत्मविश्वास के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। निश्चित तौर पर आर्थिक मजबूती के लिए अर्थ को अर्जित करना ही पड़ता है। भारतीय अर्थ परम्परा में धर्म और अर्थ को परस्पर पूरक तत्व के रूप में प्रस्तुत करते हुए महर्षि चाणक्य ने भी कहा है- धर्मस्य मूलम अर्थम्। यानी, धर्म के मूल में अर्थ अनिवार्य तत्व है।

Author: 
शिवानंद दिवेदी

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे एक नई-बिलकुल नई इबारत लिख रहे हैं। इसलिए नहीं कि कांग्रेस दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में से कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी, बल्कि इसलिए कि देश की राजधानी में आम आदमी पार्टी के उभार ने देश को एक नया संदेश दिया है। बमुश्किल एक साल पुराने दल-आप-की दिल्ली में अप्रत्याशित और उल्लेखनीय जीत पर शेष देश में जैसी प्रतिक्रिया हो रही है उससे यह तो साफ है कि आम जनता ने इस संदेश को ग्रहण कर लिया है, लेकिन यह कहना कठिन है कि राजनीतिक दल भी यह सही तरह समझ गए हैं कि उनके लिए अपने तौर-तरीकों में बद