Administrative Reforms

आज के समय में सरकार की वो भूमिका नहीं रह गयी है जिसकी आज़ादी के समय परिकल्पना की गयी थी. आज जिस तरह निजी सेक्टर और दूसरे नागरिक संगठन समाज की ज़रूरतों को पूरा करने में लगे हुए हैं, उसे देखते हुए सरकार को अपनी भूमिका सिर्फ आवश्यक जिम्मेदारियों के निर्वहन तक ही सीमित कर देनी चाहिए. बड़ी सरकारी मशीनरी और हानि में चलने वाली सार्वजनिक इकाइयों से राष्ट्रीय कोष को लगातार नुकसान होता है. ऋण में रहना तो किसी भी तरह से हमारी सरकार के लिए हितकारी नहीं है. इसीलिए आवश्यक है की हम राज्य सरकारों और उनके द्वारा चालित इकाइयों को छोटा करें और उनका प्रदर्शन सुधारे.

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